
Udaipur News : उदयपुर . खानपान को लेकर बदलती लोगों की आदतों और नित नए उत्पाद बाजार में आने के साथ ही डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। उदयपुर में संचालित महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Maharana Pratap University of Agriculture & Technology) (एमपीयूएटी) (MPUAT) से सम्बद्ध प्रदेश के एकमात्र और सबसे पुराने डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी कॉलेज से स्नातक कर रहे युवाओं को इस क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। दरअसल, भारत में डेयरी का बाजार 15 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि के साथ महत्त्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।
माना जा रहा है कि 2027 तक डेयरी का बाजार 30 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगा। इसी तरह खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र 8.38 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। इसके साथ ही सरकार के प्रोत्साहन से इस क्षेत्र में कई नए स्टार्ट-अप आ रहे हैं और स्थापित उद्योगों में भी नए उपक्रम लगाए जा रहे हैं। यह उत्साहजनक वृद्धि डेयरी क्षेत्र में कॅरियर ग्रोथ की संभावनाओं को बढ़ा रही है।
दुग्ध उत्पादन में राजस्थान दूसरे स्थान पर
डेयरी क्षेत्र में बढ़ते अवसरों का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि वैश्विक दुग्ध उत्पादन की वार्षिक वृद्धि 1.34 प्रतिशत है। जबकि भारत में वार्षिक वृद्धि 5.29 प्रतिशत। भारत में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 444 ग्राम है। जबकि विश्व स्तर पर 320 ग्राम। भारत के कुल दुग्ध उत्पादन में 11 प्रतिशत योगदान के साथ राजस्थान दूसरे स्थान पर है।
कैम्पस प्लेसमेंट के लिए आ रही कम्पनियां
विद्यार्थियों के प्लेसमेंट के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियां कॉलेज की प्रशिक्षण एवं रोजगार इकाई से संपर्क में रहती है। पिछले चार साल में 189 विद्यार्थियों का कैम्पस प्लेसमेंट हुआ है। कॉलेज की सह आचार्य एवं अनुभवात्मक प्रशिक्षण इकाई प्रभारी डॉ. निकिता वधावन के अनुसार हाल ही में गुजरात के गांधीनगर स्थित अमूलफेड और मेहसाणा में स्थित दूधसागर ने कैंपस प्लेसमेंट शिविर आयोजित किया। जिसमें डेयरी प्रौद्योगिकी के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत विद्यार्थियों का ऑन जॉब ट्रेनी के तौर पर चयन किया गया।
प्रशिक्षण अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर उन्हें साढ़े नौ से दस लाख तक का सालाना पैकेज दिया जाएगा। उदयपुर में संचालित राजस्थान का प्रथम एवं सबसे पुराना दुग्ध एवं खाद्य प्रौद्योगिकी कॉलेज महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का संघटक कॉलेज है। जहां दुग्ध प्रौद्योगिकी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी में 4 वर्षीय अभियांत्रिकी डिग्री प्रदान की जाती है।
यह राजस्थान का एकमात्र भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् एवं अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त संस्थान है। कॅरियर के क्षेत्र में व्यापक संभावनाओं को देखते हुए कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए दुग्ध एवं खाद्य प्रसंस्करण, और अभिनव दुग्ध एवं खाद्य उत्पाद के बारे में तकनीकी कौशल प्रदान किया जाता है। यहां चार प्रशिक्षण इकाइयां कार्यरत हैं। जिनमें नियमित प्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
सत्र नियोजित : विद्यार्थी शुुरुआती पैकेज
2019-20 45 4.5 लाख
2020-21 52 5.3 लाख
2021-22 48 5.5 लाख
2022-23 44 6.5 लाख
'डेयरी क्षेत्र में रोजगार की संभावाएं लगातार बढ़ रही है। इस क्षेत्र की प्रौद्योगिकी में स्नातक विद्यार्थियों के लिए अवसर भी लगातार बढ़ रहे हैं। कॉलेज में संकाय सदस्यों के नियमित शिक्षण के साथ ही विशिष्ट मार्गदर्शन के लिए समय समय पर विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया जाता है। कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यही वजह है कि यहां प्रशिक्षित विद्यार्थियों एवं उद्यमियों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भी कैम्पस प्लेसमेंट के लिए आ रही हैं।' - डॉ. लोकेश गुप्ता, डीन, डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविदयालय
Published on:
01 Jun 2024 03:10 pm
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