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आखिर महापौर को क्यों कहना पड़ा ​भोपाल जाकर बात करूं क्या

मेयर इन कांउसिल की बैठक में महापौर मुकेश टटवाल ने निगम अधिकारियों के कामकाज के तरीके पर जमकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा अधिकारी फाइले रोक कर बैठे रहते हैं जो निर्देश देता हूं तो उस पर कोई कार्रवाइ नहीं होती। एक अधिकारी दूसरे को दूसरा तीसरे के नाम पर काम रोके रखता है।

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आखिर महापौर को क्यों कहना पड़ा ​भोपाल जाकर बात करूं क्या

मेयर इन कांउसिल की बैठक में महापौर मुकेश टटवाल ने निगम अधिकारियों के कामकाज के तरीके पर जमकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा अधिकारी फाइले रोक कर बैठे रहते हैं जो निर्देश देता हूं तो उस पर कोई कार्रवाइ नहीं होती। एक अधिकारी दूसरे को दूसरा तीसरे के नाम पर काम रोके रखता है।

उज्जैन. मेयर इन कांउसिल की बैठक में महापौर मुकेश टटवाल ने निगम अधिकारियों के कामकाज के तरीके पर जमकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा अधिकारी फाइले रोक कर बैठे रहते हैं जो निर्देश देता हूं तो उस पर कोई कार्रवाइ नहीं होती। एक अधिकारी दूसरे को दूसरा तीसरे के नाम पर काम रोके रखता है। यही स्थिति बनी रही तो मैं भोपाल बात करुंगा। जिन अधिकारियों को काम नहीं करना है वह चाहे तो जा सकते हैं। महापौर इतने नाराज थे कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि मैं महापौर नहीं अब आम आदमी की तरह बात करुंगा। एमआइसी बैठक में बुधवार को महापौर टटवाल विकास कार्यों को लेकर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने मुद्दा उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन पर विशेष अनुदान के रूप में ५ करोड़ रुपए मिले थे। बावजूद अधिकारी इसकी जानकारी नहीं देकर फंड की कमी का रोना रोते हैं। लंबे समय से आय-व्यय की स्थिति मांग रहे हैं, उन्हें उपलब्ध नहीं करवा जा रही है। अधिकारियों से किसी निर्माण कार्य का कहें तो वे फाइले रोक कर बैठे रहते हैं। फाइलों में अडचनें डालते हैं और एक-दूसरे को झुलाते है। महापौर ने बैठक में सबके सामने कह दिया कि अधिकारी नहीं सुनेंगे तो मैं भोपाल बात करूंगा, जो होगा देखा जाएगा। वहीं एमआइसी सदस्यों ने भी महापौर का समर्थन करते हुए निगम अधिकारियों की कमियां गिनाई।

एमआइसी सदस्य ने रजत मेहता ने बैठक में निगमायुक्त रौशनकुमार सिंह को यह तक बता दिया कि आपकी टेबल पर 70 फाइलें लंबित रखी है। आखिरकार महापौर ने स्पष्ट किया कि शिल्पज्ञ विभाग में जिम्मेदार अधिकारियों का नियुक्त किया जाए, जिससे बात की जाए। बैठक में एमआइसी सदस्य शिवेंद्र तिवारी, डॉ. योगेश्वरी राठौर, प्रकाश शर्मा, रजत मेहता, निगमायुक्त रौशनकुमार सिंह, अपर आयुक्त आदित्य नागर सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

आउटसोर्स ठेके पर विवाद

तीन नहीं दो साल के लिए देंगे एमआइसी बैठक में आउटसोर्स एजेंसी के टेंडर को लेकर भी वाद की स्थिति बनी। कुछ एमआइसी सदस्य स्थानीय कंपनियों को ठेके देने पर जोर दे रहे थे। इसके लिए दो से तीन एजेंसियों को हायर करने की बात हुई। बाद में तय किया गया कि बड़ी कंपनियों के लिए ही टेंडर बुलाया जाएगा। तीन वर्ष के लिए होने वाले टेंडर को दो वर्ष के लिए देंगे। वर्तमान आउटसोर्स एजेन्सी मे. डायमण्ड सिक्यूरिटी पर्सनल एवं मे. ईगल हंटर साल्युशन की अनुबंध अवधि को 3 माह के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

यह भी निर्णय लिए

नमामि गंगे योजना के अन्तर्गत पीलिया खाल और भेरूगढ़ नाले से निकलने वाले दूषित जल को शिप्रा नदी में मिलने से रोकने हेतु 92.78 करोड़ प्रोजेक्ट को स्वीकृति।

- ग्रांड होटल के पीछेे की जमीन को बेचा जाएगा। इसका कलेक्टर गाइड लाइन से मूल्य 67.68 करोड़ मूल्य निकला है। इस प्रस्ताव को परिषद में रखा जाएगा।

- सफाई कर्मचारियों के सेवा निवृत्त होने पर उनके स्थान पर परिवार के किसी सदस्य को शासन के आउटसोर्स सम्बंधी निर्देश के तहत नियुक्ति दी जाएगी।

- केडी गेट मार्ग चौड़ीकरण में प्रभावितों को करीब 87 लाख रुपए के मुआवजे को स्वीकृति दी गई।

- लोकायुक्त प्रकरण से बरी हुए चंद्रकांत शुक्ला को नौकरी से रखने की स्वीकृति दी गई।

एमआइसी में निगम में बेहतर कार्य को लेकर अफसरों को निर्देशित किया है। अब देखते आगे कितना पालन होता है। ग्रांड होटल, नमामि गंगे व अन्य मुद्दों पर निर्णय लिए हैं।

- मुकेश टटवाल, महापौर