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Kalidas Samaroh date: चुनाव के कारण टला, जानिए कब होगा विश्व प्रसिद्ध कालिदास समारोह

Akhil Bhartiya Kalidas Samaroh-देव प्रबोधिनी एकादशी पर प्रतीकात्मक कार्यक्रम कर निभाएंगे परंपरा

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Akhil Bhartiya Kalidas Samaroh date ujjain

Akhil Bhartiya Kalidas Samaroh. अखिल भारतीय कालिदास समारोह फिलहाल आगे बढ़ाया जा रहा है। अब 14 फरवरी बसंत पंचमी को हो सकेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर का यह समारोह एक बार फिर आचार संहिता की भेंट चढ़ने जा रहा है। इससे पूर्व दो बार स्थगित होकर बसंत पंचमी पर हुआ। कोशिश की जा रही थी कि 23 दिसंबर को आ रही गीता जयंती पर इस समारोह को किया जाए, लेकिन तब नई सरकार का शपथविधि कार्यक्रम हो सकता है, इसलिए इस तारीख को समारोह के लिए नहीं चुना गया। फिलहाल देव प्रबोधिनी एकादशी वाले दिन गढ़कालिका का पूजन, वागर्चन आदि कर प्रतीकात्मक कार्यक्रम कर परंपरा निभाई जाएगी।

विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण इस बार देव प्रबोधिनी एकादशी 23 नवंबर को अखिल भारतीय कालिदास समारोह शुरू नहीं हो सकेगा। अब बसंत पंचमी (14 फरवरी 2024) पर अखिल भारतीय कालिदास समारोह शुरू करने के समीकरण बन रहे हैं। भोपाल में विभागीय अधिकारियों से चर्चा के बाद अकादमी के निदेशक गोविंद गंधे ने समारोह को स्थगित करने का प्रस्ताव दिया है। सात दिनों तक होने वाले इस समारोह के दो दिन पहले महाकवि कालिदास की आराध्य देवी गढ़कालिका के मंदिर पर वागार्चन कार्यक्रम होता है। समारोह के एक दिन पहले कलश यात्रा निकाली जाती है। शाम को नांदी कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति होती है। इस बार विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण अभा कालिदास समारोह को लेकर कोई तैयारी नहीं की गई। अधिकारी निर्वाचन आयोग की अनुमति का बहाना बनाते रहे। जिला प्रशासन के माध्यम से संस्कृति विभाग, निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर समारोह के लिए अनुमति मांगी थी, निर्वाचन आयोग ने अनापत्ति पत्र दे दिया, लेकिन तब तक समय नहीं बचा।

पहले चुनाव और बाद में शपथ विधि की अड़चन

अभा कालिदास समारोह की तैयारियों के बीच पहले चुनाव की आचार संहिता और अब शपथ विधि आड़े आ रही है। ऐसे में समारोह को गीता जयंती (23 दिसंबर) को न करते हुए बसंत पंचमी (14 फरवरी ) को करने की योजना बनाई जा रही है क्योंकि 3 दिसंबर को मतगणना है। इसके बाद जिस दल की भी सरकार बनेगी, उसका शपथ ग्रहण समारोह होने, मंत्रिमंडल का गठन होने आदि में कुछ समय लगेगा। लिहाजा सरकार बनाने वाले दल से जुड़े जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप भी बढ़ेगा।