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रक्षाबंधन 2022 पर रहेगा भद्रा का साया, जानें किन बातों का रखें खास ध्यान

11-12 अगस्त 2 दिन मनाई जाएगी राखी

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उज्जैन। रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा का साया रहेगा। 11 और 12 अगस्त दो दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। बहनों को अच्छा मुहूर्त देखकर भाइयों की कलाई पर अपना स्नेह रूपी बंधन सजाना होगा।

ज्योतिर्विद पं. आनंद शंकर व्यास ने बताया कि इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व गुरुवार 11 अगस्त को मनाया जाएगा। उदय की पूर्णिमा शुक्रवार की सुबह 7 बजकर 16 मिनट तक अर्थात एक घंटा 9 मिनट ही है। संध्या समय पूर्णिमा प्राप्त नहीं है।

गुरुवार को चतुर्दशी सुबह 3 घंटे 31 मिनट की होने से प्रात: 9 बजकर 37 मिनट से पूर्णिमा शुक्रवार 12 अगस्त को सुबह 7 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। गुरुवार संध्या समय पूर्णिमा प्राप्त है, इस तरह व्रत की पूर्णिमा ऋग्वेद, यजुर्वेदियों के उपाकर्म व रक्षाबंधन इसी दिन (11 अगस्त) को ही है। बता दें कि कोरोना के कारण दो साल बाद इस बार लोगों में राखी को लेकर उत्साह ज्यादा है। ऐसे में भद्रा को लेकर लोगों में थोड़ी मायूसी भी है।

उपाकर्म किया जा सकता है
पं. व्यास ने बताया इस दिन भद्राकरण प्रात: 9 बजकर 37 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक रहने से रक्षाबंधन पर्व रात 9 बजकर 27 मिनट बाद होगा। उपाकर्म में भद्रा दोष मान्य नहीं है, अत: उपाकर्म भद्रा में किया जा सकेगा।

अलग -अलग पंचांगों में भद्राकाल के समय को लेकर मतभेद की स्थिति : पंडित सुनील शर्मा

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस साल रक्षाबंधन के त्योहार पर भद्राकाल का साया रहेगा। पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 38 मिनट से शुरू हो जाएगी जो अगले दिन यानी 12 अगस्त को सुबह 7 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। इस दौरान भद्रा काल भी शुरू हो जाएगी। भद्रा काल की समाप्ति रात 08 बजकर 51 मिनट पर होगी। हालांकि अलग -अलग पंचांगों में भद्राकाल के समय को लेकर मतभेद की स्थिति बनी हुई है।

कुछ पंचांग में भद्रा काल का समय 11 अगस्त,गुरुवार के दिन दोपहर 2 बजकर 38 मिनट तक ही है। ऐसे में भद्राकाल की समाप्ति पर ही राखी बांधनी चाहिए। लेकिन बहुत जरूरी होने पर प्रदोषकाल में शुभ, लाभ, अमृत में से कोई एक चौघड़िया देखकर राखी बांधी जा सकती है। इसके अलावा भद्राकाल के अशुभ योग के दौरान कुछ शुभ योग का भी निर्माण होगा। इस दिन आयुष्मान, सौभाग्य, रवि और शोभन जैसे शुभ योगों का संयोग भी रहेगा जिसके चलते भद्रा का अशुभ प्रभाव कम रहेगा।

रक्षाबंधन 2022 भद्रा काल का समय
- रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल की समाप्ति- रात 08 बजकर 51 मिनट पर
- रक्षाबंधन के दिन भद्रा पूंछ- 11 अगस्त को शाम 05 बजकर 17 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट तक
- रक्षाबंधन भद्रा मुख - शाम 06 बजकर 18 मिनट से लेकर रात 8 बजे तक

रक्षाबंधन पर इस बार चार शुभ योग
1- इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया तो रहेगा, लेकिन इस दौरान चार तरह के शुभ योग भी बनेगा। 11 अगस्त को सूर्योदय से लेकर दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक आयुष्मान योग रहेगा।
2- इसके अलावा सुबह 5 बजकर 30 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 53 मिनट तक रवि योग रहेगा।
3- तीसरा शुभ योग सौभाग्य योग 11 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।
4- चौथा और आखिरी शुभ योग रक्षाबंधन के दिन धनिष्ठा नक्षत्र में शोभन योग रहेगा।

वहीं पंडित शर्मा के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार हिंदू कैलेंडर के श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। पूर्णिमा के दौरान अपराह्ण काल में भद्रा हो तो रक्षाबन्धन नहीं मनाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार भद्राकाल होने पर रक्षाबंधन मनाने का पूरी तरह वर्जित होता है। इसके अलावा ग्रहणकाल, सूतककाल और संक्रांति की स्थिति होने पर भी यह त्योहार निषेध माना गया है। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 11 अगस्त को सुबह 09 बजकर 28 मिनट से रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। लेकिन भद्रा काल के समय को ध्यान में रखते हुए उस समय राखी न बांधें।

रक्षाबंधन तिथि- 11 अगस्त 2022, गुरुवार
पूर्णिमा तिथि आरंभ- 11 अगस्त, सुबह 10 बजकर 38 मिनट से
पूर्णिमा तिथि की समाप्ति- 12 अगस्त. सुबह 7 बजकर 5 मिनट पर
शुभ मुहूर्त- 11 अगस्त को सुबह 9 बजकर 28 मिनट से रात 9 बजकर 14 मिनट
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक
अमृत काल- शाम 6 बजकर 55 मिनट से रात 8 बजकर 20 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 17 मिनट तक