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video : कृष्ण भजन गाने वाले प्रसिद्ध कथाकार मृदुलकृष्ण महाराज को देखें महाकाल की नगरी में आकर कैसे शिवमय हो गए

भागवत का महत्व प्रतिपादित करने के पूर्व आचार्य ने कहा कि बाबा महाकाल चमत्कारी हैं। स्वयंभू हैं, जो भी देते हैं छप्पर फाड़ कर देते हैं।

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उज्जैन. विश्व प्रसिद्ध श्रीमद्भागवत कथा प्रवक्ता आचार्य मृदुलकृष्ण महाराज भी बाबा महाकाल की नगरी में शिवमय हो गए। भागवत का महत्व प्रतिपादित करने के पूर्व आचार्य ने कहा कि बाबा महाकाल चमत्कारी हैं। स्वयंभू हैं, जो भी देते हैं छप्पर फाड़ कर देते हैं। अपना वृत्तांत सुनाते हुए उन्होंने कहा कि सुबह जब महाकाल दर्शन करने गया तब सोचा भी नहीं था कि मुझे भागवत कथा के लिए न्योता मिल जाएगा।

बाबा के दर्शन के दौरान वहां उपस्थित शिव साधक सभी पुजारियों ने अनुरोध किया कि हमारे आमंत्रण पर आपको महाकाल की नगरी में पुन: श्रीमद्भागवत कथा करना है। आचार्यश्री ने कहा कि मैं भोपाल में श्रीमद् भागवत कथा श्रवण कराता रहता हूं। परन्तु इस बार अंतरात्मा कह रही थी कि बाबा महाकाल की दरबार में श्रीमद्भागवत कथा श्रवण कराऊं। भोपाल के हमारे भक्त अशोक चतुर्वेदी व राकेश अग्रवाल से कार्य योजना बनाने को कहा और यह कार्यक्रम आज साकार रूप ले रहा है।

आचार्यश्री ने बांके बिहारी के साथ बाबा महाकाल का भजन श्रवण कराया तो पांडाल में उपस्थित श्रोता भाव विभोर होकर झूमने लगे। आचार्यश्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा भवरोग को दूर करती है। व्यक्ति के दैहिक, दैनिक, भौतिक तीनों तापों को दूर करती है। भवरोग माया मोह से ग्रसित जीव यदि भागवत भगवान की शरण में आ जाता है तो वह इन रोगों से छुटकारा प्राप्त कर प्रभु की भक्ति में निश्चछल भाव से लीन हो जाता है। प्रथम दिवस आरती में सिंहस्थ केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष माखनसिंह चौहान, विधायक मोहन यादव, अनिलसिंह कालूहेड़ा, अजय गिरिया, ओमप्रकाश अग्रवाल, अशोक चतुर्वेदी, राकेश अग्रवाल ने आरती की। 26 दिसम्बर को नारद व्यास संवाद का आयोजन किया जाएगा।

उमड़ा भक्तों का सैलाब
कथा के प्रथम दिवस ही भक्तों का सैलाब उमड़ा। आचार्य के भजनों में लोग भाव विभोर होकर नृत्य भी कर रहे थे। छोटी-छोटी गईया, छोटे-छोटे ग्वाल, छोटो सो म्हारो मदन गोपाल, राधे-राधे जपो चले आएंगे बिहारी, वात्सल्य रस से परिपूर्ण भजनों के प्रणेता आचार्य की कथा के लिए प्रतिदिन दोपहर २ से ६ बजे तक आयोजित की जा रही है। कथा के लिए विशाल पंडाल का निर्माण कराया गया है, जिसमें करीब ३५ हजार भक्तगण उपस्थित हो कथा का लाभ ले सकते हैं। कथा से पूर्व दशहरा मैदान स्थित हनुमान मंदिर से कथा स्थल तक शोभायात्रा व कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में महिलाएं सिर पर कलश धारण कर चल रही थी। भजन मंडली भजन गाते व झूमते हुए चल रही थी। कथा स्थल पर पहुंचकर सर्वप्रथम पोथी का पूजन किया गया। इसके बाद आचार्य का स्वागत किया गया। इसके पश्चात आचार्य ने कथा प्रारंभ की।