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सेमेस्टर परीक्षा में बड़ी गड़बड़ी: एक दिन पूर्व ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया पेपर

८५ में से ७५ अंक का पेपर विद्यार्थियों के पास पहुंचा, रविवार को इसकी जानकारी जिम्मेदारों तक पहुंचने के बाद भी नहीं की कार्रवाई
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उज्जैन

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Gopal Swaroop Bajpai

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Updated: 5 Dec 2017, 12:41 PM IST

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ऋषिराज शर्मा@उज्जैन. विक्रम विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षा में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। परीक्षा से पूर्व ही प्रश्नपत्रों के प्रश्न लीक हो रहे हैं और सोशल मीडिया से सभी विद्यार्थियों तक पहुंच भी रहे हैं। खास बात यह है कि वायरल हो रहे प्रश्न मॉडल पेपर की तरह नहीं है। विद्यार्थियों को दिए जा रहे प्रश्न जस की तस परीक्षा में आ रहे हैं।

परीक्षा का कुल पूर्णाक ८५ अंक है, वहीं वायरल हो रहे प्रश्नों के अंक ७० से ७५ है। एेसा ही पूरा प्रकरण सोमवार को बीएससी पंचम सेमेस्टर के फिजिक्स के प्रश्नपत्र के दौरान हुआ। पत्रिका ने सोमवार के अंक में ही सोशल मीडिया पर १० प्रश्न, प्रश्न पत्र में होने का दावा शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर दिया था। इसके बावजूद विवि प्रशासन ने मामले पर गंभीरता नहीं दिखाई। सोमवार को परीक्षा पूर्ण हो गई। इसके बाद भी विवि के जिम्मेदार प्रश्न पत्र लीक होने की घटना से इनकार करते हुए अब जांच की बात कर रहे हैं।

इतने अंकों के इतने प्रश्न
बीएससी की परीक्षा के प्रश्नपत्र में तीन खंड में ११ प्रश्न होते हैं। पहले खंड में १ प्रश्न होता है। इसके २ अंक के ५ भाग, दूसरे खंड में ५ अंक के ५ प्रश्न और तीसरे खंड में १० के ५ प्रश्न परीक्षा में पूछे जाते हैं। विद्यार्थियों को कुल १० प्रश्न दिए गए। यह सभी आ गए। इसमें १ प्रश्न के तीन भाग, ५ अंक ३ प्रश्न, १० अंक के ४ प्रश्न परीक्षा में आए। सबसे बड़ी बात यह है वायरल हो रहे प्रश्न साइंस विषय के हैं।

'पत्रिका' ने भेजी थी अफसरों को कॉपी
सोशल मीडिया पर परीक्षा प्रश्नों के वायरल होने की सूचना रविवार रात को ही 'पत्रिका' ने ही विवि अधिकारियों को दे दी थी। वायरल प्रश्नों की प्रति कुलानुशासक शैलेंद्र कुमार शर्मा को रविवार रात ८.५० बजे भेजी थी। प्रश्नपत्र लीक होने की खबर भी पत्रिका ने प्राथमिकता से प्रकाशित की थी। बावजूद विवि के जिम्मेदारों ने कोई रुचि नहीं ली। सुबह ७ बजे परीक्षा हुई और वही प्रश्न परीक्षा में पूछ लिए गए।

इन वायरल प्रश्नों से छात्रों को मिला लाभ
१. श्रोडिंगर समीकरण और काल- अनाश्रित। (प्रश्न क्रमांक २)
२. द्रव्य तरंग समझाइए। (प्रश्न क्रमांक १ का पहला भाग)
३. सरल आवर्ती दौलित्र व ऊर्जा स्तर (प्रश्न क्रमांक ८ )
४. ऊर्जा स्तर (प्रश्न १ का २ भाग )
५. एल-एस युग्मन और जे-जे युग्मन (प्रश्न क्रमांक ९)
६. हुण्ड और डुऑन नियम (प्रश्न क्रमांक ४)
७. रमन प्रभाव की सैद्धांतिक व्याख्या (प्रश्न क्रमांक १०)
८. मोर्स विभव (प्रश्न क्रमांक १ का ४ भाग)
९. गइगर - नटल (प्रश्न क्रमांक ६ )
१०. द्रव-बूंद मॉडल की अभिकल्पनाएं व सफलता, विफलता (प्रश्न क्रमांक ११ )

ऐसे बनते हैं प्रश्नपत्र
प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए गोपनीय विभाग अपनी फाइल संचालित करती है। इसमें 3 लोगों का पैनल होता है। इसमें से कुलपति किसी एक नाम पर टिक कर देते हैं और प्रशासन प्रश्न पत्र बनाने की सूचना भेज देता है। प्रश्न पत्र बनने के बाद आवश्यकतानुसार प्रिंट हो जाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया गोपनीय होती है और इसके जिम्मेदारी कुलसचिव के पास होती है। पेपर प्रिंट होने के बाद एक लिफाफे में परीक्षा केंद्रों पर भेज दिए जाते हैं और यह लिफाफा परीक्षा शुरू होने से 10 मिनट पूर्व शिक्षक और विद्यार्थियों की मौजूदगी में खोला जाता है।

सीधी बात.... डॉ. परीक्षित सिंह, कुलसचिव विवि
Q परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं।
A एेसा नहीं हो सकता है।

Q लीक प्रश्न और मूल प्रश्नपत्र एक जैसे हैं
A दिखवाना पड़ेगा। एेसा कैसे हो सकता है।

Q वायरल प्रश्न १०० प्रतिशत पेपर का हिस्सा है और इनका पूर्णांक ६५ से ७० अंक है।
A हम पहले हमारे यहां दिखवाते हैं। अगर यहां सब कुछ ठीक है तो देखना पड़ेगा। एेसा कैसे हो रहा है। प्रश्न लीक है या फिर कुछ और।

जांच करवाएंगे
" उपकुलसचिव को मामले में वस्तुस्थिति पता करने को कहा है। प्रारंभिक रूप से यहीं पता लगा है कि उक्त वायरल पेज में लिखे प्रश्न महत्वपूर्ण प्रश्न सूची जैसे हैं। फिर भी एक्सपर्ट की सलाह लेकर नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।"
- एसएस पांडे, कुलपति, विक्रम विवि