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इस बार रूठ गए प्रवासी पंछी, यहां हर साल आते हैं कई प्रजातियों के पक्षी

उज्जैन और उसके आसपास बड़ी संख्या में आने वाले पंछी इस बार नहीं आए...।

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उज्जैन। पक्षी विशेषज्ञ और वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शहर और इसके आसपास निर्मित उंडासा, साहिबखेड़ी, गंभीर डेम आदि क्षेत्रों में 300 से अधिक प्रवासी-अप्रवासी पक्षी का आगमन नवंबर के पहले सप्ताह से होता है, लेकिन इस बार प्रवासी पंछियों का आगमन नहीं होने से चहचहाट नहीं सुनाई दे रही, लेकिन शहर के परिंदों की मेजबानी करने के लिए हम संकल्प लें, पत्रिका आह्वान का हिस्सा बनें और अपने घरों के आसपास फुदकने-चहकने वाले परिंदों के लिए दाना-पानी जरूर रखें।

शीतकाल में हर साल उज्जैन के बाहरी क्षेत्रों में विभिन्न प्रजातियों के अप्रवासी पक्षी आते हैं। यह पक्षी आमतौर पर सिलारखेड़ी और उंडासा तालाब के पास अपना डेरा जमाते हैं, लेकिन इस वर्ष देशी- विदेशी पक्षियों का आगमन नहीं हुआ। हालांकि इसके लिए शहर से दूर वन विभाग का नौलखी ईको टूरिज्म पार्क नया आशियाना बन गया है। विविध तरह के पक्षियों को करीब से निहारने के टूरिज्म पार्क में बर्ड वॉचिंग पाइंट विकसित किया गया था। मौसम और में बदलाव आने के कारण ही प्रवासी पक्षी नहीं आ रहे। बर्ड एक्सपर्ट अनुराग छजलानी के अनुसार पक्षी हमेशा शोर से दूर भागते हैं, एकांत प्रिय रहते हैं। तेजी बढ़ रहे शहरों और कटते जा रहे जंगलों के कारण प्रवासी पक्षियों की संख्या नहीं के समान है।

ये परिंदे आते थे मेहमान बनकर

छजलानी ने बताया कि विगत वर्षों में हमारे शहर में रूडीशैल डक, काम्ब डक, पिन टेल डक, स्पॉट बिल डक, बारहेडेड गीज, स्पून बिल, पेंटेड स्टोर्क, कॉमन स्नाइप, रफ, ब्लैक टेल गोडविट, रिवर टर्न, बी ईटर, वरडीटर फ्लाईकेचर, वेग टेल, सैंडपाईपर जैसी कुछ 50 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आसपास के तालाबों में आते थे।

मार्च के दौरान रवानगी होने लगती

मार्च के दौरान प्रवासी पक्षियों की रवानगी होने लगती है। मालवा क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रजातियों के पक्षी और साइबेरिया, यूरोप दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका के प्रवासी पक्षियों को डेरा इन तालाबों में रहता है। तालाब बड़े होने की वजह से बगैर बायनोक्यूलर की मदद से इन्हें निहारा नहीं जा सकता है। इसे ध्यान में रखकर नौलखी ईको टूरिज्म पार्क बर्ड वॉचिंग पाइंट विकसित किया है।