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क्षिप्रा में जल सत्याग्रह कर रही थीं कांग्रेस नेत्री, डूबने लगीं तो समर्थकों ने पानी में कूदकर बचाई जान

-क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए कांग्रेस का जल सत्याग्रह-नदी से निकालने प्रशासनिक टीम पहुंची-विरोध में कांग्रेसियों ने दी पानी में डूबने की धमकी-दो घंटे चला जल सत्याग्रह, बीमार हुए कांग्रेसी

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क्षिप्रा में जल सत्याग्रह कर रही थीं कांग्रेस नेत्री, डूबने लगीं तो समर्थक पानी में कूदकर बचाई जान

उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन की क्षिप्रा शुद्धिकरण की मांग को लेकर जल सत्याग्रह करने नदी में उतरी महिला कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष नूरी खान डूबते-डूबते बच गईं। नदी से बाहर निकालने के लिए पुलिस-प्रशासन की टीम घाट पर पहुंची थी, जिसे देखकर खान विरोध स्वरूप गहरे पानी की तरफ जाने लगीं, यहां अचानक उनका नियंत्रण बिगड़ गया और वो डूबने लगीं। ये देख कुछ तैराक और उनके समर्थक नदी में कुदे और किसी तरह डूबने से बचाया। इसके बाद खान को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

100 करोड़ रुपए की खान डायवर्जन योजना के बाद भी क्षिप्रा नदी में बार-बार खान का गंदा पानी मिलने को लेकर राजनीति फिर गरमा गई है। योजना के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए ठोस योजना की मांग को लेकर महिला कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष नूरी खान ने गुरुवार को जल सत्याग्रह शुरू किया।

यहां दत्त अखाड़ा घाट पर वो कंधे तक गहरे पानी में जाकर नदी में खड़ी हो गईं। कुछ घंटों बाद जल संसाधन विभाग के इ.इ कमल कुवाल और फिर एसडीएम जगदीश मेहरा के साथ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने खान को नदी से बाहर आने और बैठकर चर्चा करने की बात कही। लेकिन वो कांग्रेस नेत्री नहीं मानी। खान क्षिप्रा शुद्धिकरण को लेकर मुख्यमंत्री, सांसद-मंत्री या कलेक्टर से ही बात करने पर अड़ी रही और जल सत्याग्रह जारी रखा। समझाइश के बाद भी जब वो नहीं मानी तो उन्हें नदी से बाहर निकालने की तैयारी की गई। ये देख खान गहरे पानी की ओर बढ़ गई। उनके डूबने की आशंका में तैराक और समर्थकों ने भी नदी में गोता लगा दिया और खान को उठाकर बाहर ले आए।

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प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार

प्रदर्शन से एक दिन पूर्व ही खान ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दे दी थी। इसमें उन्होंने क्षिप्रा शुद्धिकरण के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मंगलवार तक दोषियों के नाम उजागर करने और नदी को साफ रखने की ठोस योजना प्रस्तुत करने की मांग की थी। ऐसा नहीं होने पर जल सत्याग्रह की चेतावनी दी थी। वहीं, प्रदर्शन के दौरान उन्हें कुछ होता है तो इसके लिए प्रशासन को जिम्मेदार मानने की बात कही थी। बता दें कि, नूरी खान इससे पूर्व भी क्षिप्रा शुद्धिकरण को लेकर वर्ष 2017 और 2019 में भी प्रदर्शन कर चुकी हैं।

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अस्पताल पहुंचे कांग्रेसी

करीब दो घंटे के जल सत्याग्रह के बाद ही खान को जिला अस्पताल ले आया गया था। इसके बाद शहर कांग्रेस के कई पदाधिकारी और नेता उनका स्वास्थ्य जानने अस्पताल पहुंचे।


इनका कहना

मामले को लेकर एसडीएम जगदीश मेहरा का कहना है कि, नूरी खान से चर्चा कर समझाने का प्रयास किया गया था। जब वो नहीं मानी तो उन्हें नदी से निकलवा कर एहतियातन अस्पताल पहुंचाया गया है।