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देश के आईकॉन महाकाल मंदिर में अनहोनी : 24 घंटे में दो श्रद्धालुओं की मौत, स्ट्रेचर भी नहीं मिला…

श्रावण के पहले सोमवार को ही महाकाल मंदिर में अनहोनी हो गई। दर्शन करने आए बुजुर्ग दर्शनार्थी ने मंदिर परिसर में ही दम तोड़ दिया।

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उज्जैन. श्रावण मास के पहले सोमवार को ही महाकाल मंदिर में अनहोनी हो गई। मंदिर में दर्शन करने आए एक बुजुर्ग दर्शनार्थी ने मंदिर परिसर में ही दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि श्रावण के चलते मंदिर में ढाई घंटे में दर्शन हो रहे थे। मंदिर में भीड़ और लंबी कतार में घंटों चलने से संभवत: बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ गई। जैसे ही बुजुर्ग दर्शनार्थी मंदिर निर्गम द्वार पर पहुंचे तो गश खाकर गिर पड़े। उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में बुजुर्ग की हार्ट अटैक आने से मौत होना बताया जा रहा है। पूरे मामले में मंदिर समिति और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही होना भी सामने आया है।

महाकाल मंदिर परिसर में ठाणे निवासी द्वारका यादव (62) पिता चौथी यादव की मौत हुई। वे रविवार को अकेले ही महाकाल मंदिर दर्शन करने के लिए शहर पहुंचे थे। सोमवार सुबह वे भस्म आरती के बाद मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। बाबा के दर्शन कर वापस लौट रहे थे तभी निर्गम के द्वार के पास गश खाकर गिर पड़े। यहां खड़े मंदिर कर्मचारी व अन्य श्रद्धालुओं ने उन्हें उठाया और मंदिर की एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हालांकि मंदिर परिसर में हुई बुजुर्ग श्रद्धालु की मौत के पीछे दर्शन में लंबा वक्त से खड़े रहने और चलने से आई थकान बताई जा रही है। दरअसल श्रावण सोमवार के चलते श्रद्धालुओं की भीड़ होने से दर्शन में ढाई घंटे का वक्त लग रहा था। वहीं दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को बैरिकेड्स से मंदिर तक पहुंचने में दो किमी की दूरी तय करना पड़ रही थी। संभवत: 62 वर्षीय श्रद्धालु इतनी भीड़ और लंबी दूरी तय करना सहन नहीं कर पाए होंगे। इससे ही उनका स्वास्थ्य बिगड़ा और मौत हो गई।

मंदिर में बुजुर्ग दर्शनार्थी को कोई सुविधा नहीं

देश के आइकॉन महाकाल मंदिर में पिछले समय में दिव्यांगों की सुविधा के लिए व्यवस्था की गई, लेकिन बुजुर्ग यात्रियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। अमूमन सारे बुजुर्ग यत्रियों को आम श्रद्धालुओं की तरह मंदिर में दर्शन करने जाना पड़ता है। सिर्फ विशेष परिस्थिति और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की शारीरिक स्थिति को देखकर ही व्हील चेयर की सुविधा दी जाती है। ऐसे में वे भी युवाओं की तरह दर्शन के लिए लंबी कतारों में घंटों खड़े होकर धक्का खाते रहते हैं। बैरिकेड्स और पूरे मार्ग में कहीं भी श्रद्धालु और बुजुर्गों के बैठने की कोई सुविधा भी नहीं है।

मौत से पहले चेकअप कराया, दस मिनट बाद आई मौत

मंदिर परिसर में बुजुर्ग श्रद्धालु द्वारका यादव ने मौत से पहले मंदिर परिसर में ही जिला अस्पताल की ओर से बनाई गई अस्थायी डिस्पेंसरी में चेकअप कराया था। वे डिंस्पेंसरी में सुबह 9.16 मिनट पर पहुंचे थे। जांच कराने के बाद मंदिर से बाहर निकलने आगे बढ़े और निर्गम द्वार की रैंप पर करीब 9.26 मिनट पर पहुंचे थे कि गश खाकर गिर पड़े। सिर में चोट लगी तो उठ नहीं पाए। महज दस मिनट में उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जांच में उनका ब्लड प्रेशर ज्यादा होना पाया गया था। डिस्पेंसरी में मौजूद स्टॉफ ने उन्हें पर्याप्त इलाज या बैठने के लिए नहीं कहा और आगे बढ़ा दिया। यदि डिस्पेंसरी का स्टॉफ समय रहते उनका ख्याल रखता तो शायद उनकी मौत नहीं होती।

दर्शन के लिए चलना पड़ रहा दो किमी
मंदिर में श्रावण की भीड़ के चलते श्रद्धालुओं को दो किमी से ज्यादा चलना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं को प्रशासनिक कार्यालय के मुख्य गेट से प्रवेश करवाया जा रहा है। यहां से लंबे जिग़जेग बैरिकेड्स से गुजरना पड़ता है। इसके बाद फेसेलिटी सेंटर, कॉरिडोर फिर टनल और मंदिर प्रागंण तथा कार्तिकेय मंडपम से उतरकर गणेश मंडपम में जाना पड़ता है । यह पूरा रास्ता घुमावदार, चढ़ाव होकर दो किमी से ज्यादा है। इसके बाद नंदीहॉल से बाहर निकलने का रैंप न केवल लंबा है बल्की ऊंचा भी है। इतना चलने पर दर्शनार्थियों को दम फूल जाता है।

मंदिर में 24 घंटे में दूसरे बुजुर्ग श्रद्धालु की मौत
महाकाल मंदिर में 24 घंटे के भीतर दो बुजुर्ग दर्शनार्थियों की मौत हुई है। रविवार सुबह ऋषि नगर निवासी राजेंद्र श्रीवास्तव (73) की भी मंदिर मौत हो गई थी। श्रीवास्तव आम श्रद्धालुओं की कतार से मंदिर में प्रवेश के बाद भगवान के दर्शन कर करीब 10.30 बजे बाहर निकले थे। वे ओंकारेश्वर मंदिर तक पहुंचे और गश खाकर गिर पड़े। मंदिर समिति की एम्बुलेंस में उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


मंदिर में ऐसी लापरवाही...नहीं मिला स्ट्रेक्चर, हाथों में उठा कर ले गए

बुजुर्ग श्रद्धालु द्वारका यादव के गिरने के बाद मंदिर की स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी सवाल उठे हैं। यादव जब गिरे तो उन्हें एंबुलेंस तक ले जाने के लिए स्ट्रक्चर तक नहीं था। मंदिर के निर्गम द्वार पर खड़ी एंबुलेंस तक ले जाने के लिए समिति कर्मचारी और अन्य श्रद्धालु उन्हें हाथों में उठाकर ले गए। करीब 50 मीटर के इस रास्ते में बुर्जुग श्रद्धालु को पांच दफे नीचे भी रखा गया। ऐसी ही अव्यवस्था रविवार को ऋषिनगर (उज्जैन) निवासी राजेंद्र श्रीवास्तव के साथ भी हुई। श्रीवास्तव के बेहोश होने की खबर पर मंदिर के स्वास्थ्य केंद्र को दी गई। उस वक्तडॉक्टर मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है डॉक्टर माधव सेवा न्यास में किसी का परीक्षण करने गए थे। बाद में माधव सेवा न्यास से डॉक्टर मंदिर पहुंचे तब तक श्रीवास्तव को एम्बुलेंस में जिला अस्पतला पहुंचा दिया गया था।

इधर, दर्शन करने आए बुजुर्ग होटल व्यवसायी भी घायल

महाकाल मंदिर में सोमवार सुबह दर्शन करने पहुंचे ज्ञाननगर देवास रोड निवासी होटल व्यवसायी रूपचंद सुखवानी (60) भी गिरने से घायल हो गए। वे मुख्य द्वार से नीचे उतरते समय सीढ़ी से फिसल गए। उनके पीठ में गंभीर चोट लगी। वे करीब 20 मिनट तक उठ नहीं पाए। उन्हें भी स्ट्रक्चर नहीं मिला। मंदिर में अन्य श्रद्धालुओं ने उन्हें जैसे-तैसे उठाकर अस्पताल के लिए रवाना किया।