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गोपाल वाजपेयी@उज्जैन. यह दुखद लेकिन हकीकत है। महाकालेश्वर मंदिर में नित नए विवाद हो रहे हैं। ताजा विवाद सभामंडप के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया व डिजाइन के साथ ही अति प्राचीन मंदिरों को हटाने को लेकर है। शुरू के दो-चार दिन मंदिर के पंडे-पुजारियों के अलावा प्रबंधन समिति के सदस्यों को तोडफ़ोड़ पर कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन जब सभामंडप स्थित अति प्राचीन छोटे मंदिरो को हटाना शुरू किया तो विवाद शुरू हो गया।
५०० साल पुराने मंगलनाथ मंदिर पर हथौड़े
तोडफ़ोड़ के दौरान ५०० साल पुराने मंगलनाथ मंदिर पर हथौड़े चलाने की तैयारी की तो इस मंदिर के पुजारी व महाकाल के भक्तों का विरोध शुरू हो गया। इसके बाद भी मंदिर प्रबंधन समिति व यूडीए ने विरोध को दरकिनार कर मंगलनाथ शिवलिंग को हटा दिया। अब सभामंडप स्थित हनुमान मंदिर को हटाने की तैयारी है। साथ ही श्रीराम मंदिर की दीवार को भी धराशाई किया जाएगा। इसके अलावा और मंदिर भी जद में आ रहे हैं। इससे शहरवासियों के साथ ही मंदिर समिति के सदस्य व पंडे-पुजारी व्यथित हैं। मंदिर के विकास के नाम पर प्राचीन मंदिर व मूर्तियों से खिलवाड़ किया जा रहा है। सभी का एकमत से कहना है कि अगर बहुत आवश्यक है तो तोडफ़ोड़ भी सहन की जा सकती है। लेकिन इन मूर्तियों को हटाने से पहले शास्त्रानुसार विधि-विधान से अनुष्ठान पूर्ण करना चाहिए। साथ ही शास्त्र सम्मत ही इन मूर्तियों को पुनसर््थापित किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मंदिर प्रबंध समिति ने दावा किया था कि निर्माण कार्य के दौरान किसी मंदिर व मूर्ति से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। जब दावे के विपरीत तोडफ़ोड़ हुई और विरोध बढ़ा तो मंदिर प्रबंध समिति अनजान बन रही है। समिति के सदस्यों का कहना है कि उन्हें अंधेरे में रखा गया है तो प्रशासक कह रहे हैं कि यह योजना उनके पदभार संभालने से पहले की है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक हैं। प्रबंध समिति ने सभी सदस्यों व पंडे-पुजारियों को सभामंडप निर्माण प्रक्रिया की जानकारी क्यों नहीं दी? नए सभामंडप का नक्शा किसने पास किया? क्या भूमिपूजन के दौरान मंदिर प्रबंध समिति ने झूठे दावे किए? अगर दावे सही हैं तो क्या निर्माण एजेंसी अपने अनुसार तोडफ़ोड़ कर रही है? निर्माण एजेंसी अपने मन से हथौड़े चला रही तो समिति के जिम्मेदार कहां हैं? उन्हें रोका क्यों नहीं? सभामंडप को दो मंजिला बनाने की क्या जरूरत है? इस बिंदु को ध्यान में क्यों नहीं रखा गया कि दोमंजिला बनाने से मंदिर की भव्यता प्रभावित होगी? इस पर विचार क्यों नहीं किया कि नया सभामंडप बनने से मंदिर का शिखर भी नाम-मात्र का दिखेगा? क्या जिम्मेदार लोग महाकाल मंदिर के शिखर दर्शन का महत्व नहीं जानते? इन सवालों के जवाब कौन देगा? दरअसल, महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की कार्यप्रणाली हमेशा सवालों के घेरे में रहती है। समिति के जिम्मेदार लोग महाकाल मंदिर को प्रयोगशाला बनाने पर जुटे हैं। व्यक्तिगत हित साधने के व मंदिर से जुड़े खास लोगों को खुश रखने के लिए समिति के सर्वेसर्वा बेमतलब के नए-नए प्रयोग करते हैं। ये हालत तब है, जब ऐसे ही बेमतलब के प्रयोग करने पर सुप्रीम कोर्ट फटकार लगा चुकी है। समिति के कर्ताधर्ताओं को यह बात समझनी पड़ेगी कि महाकालेश्वर मंदिर आप लोगों की निजी संपत्ति नहीं है। यह स्थान देश-विदेश के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। उज्जैन के हर व्यक्ति की हर धड़कन बाबा महाकाल के नाम पर चलती है। ऐसे दिव्य स्थान के विकास के लिए भोले का हर भक्त तन-मन-धन से तैयार है, लेकिन धार्मिक-पौराणिक व ऐतिहासिक धरोहरों से खिलवाड़ हरगिज बर्दाश्त नहीं करेंगे।
मंदिर परिसर में सभामंडप पुनर्निर्माण में रेत की जगह पत्थरों की चूरी
महाकाल मंदिर परिसर में सभामंडप पुनर्निर्माण में रेत की जगह पत्थरों की चूरी का उपयोग किया जा रहा है। फटकार पडऩे पर सामग्री बदली और निर्माण प्रारंभ किया। इस बीच सभामंडप में बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। सभा मंडप को निर्माण आरसीसी के स्थान पर पत्थरों से करने के सुझाव आए हैं। मंदिर प्रबंध की बैठक में यह मुद्दा उठ सकता है।
बेस का कार्य तेजी से किया जा रहा
महाशिवरात्रि के मद्देनजर महाकाल मंदिर परिसर में सभामंडप पुनर्निर्माण के क्रम में बेस का कार्य तेजी से किया जा रहा है। मंदिर समिति के सदस्य जगदीश शुक्ला अचानक ही निर्माण स्थल पर पहुंच गए थे, उन्होंने देखा कि बेस में मैटेरियल में काली मोटी रेत की बजाय पत्थरों की चूरी का उपयोग किया जा रहा है। इस पर सुपरवाइजर को फटकार लगाई। सुवरवाइजर द्वारा अन्य निर्माण कार्यों में चूरी के उपयोग का हवाला दिया। सदस्य शुक्ला ने कहा कि कहा किस सामग्री का उपयोग हो रहा है, उससे हमें मतलब नहीं मंदिर में तो सही मात्रा में उचित सामग्री का ही करने दिया जाएगा। इसके बाद निर्माण में पत्थर चूरी की बजाय रेत का उपयोग प्रारंभ किया गया।
gopal.bajpai@in.patrika.com
Published on:
23 Jan 2018 01:26 pm
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