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उज्जैन में गोविंदा ने लगाए ठुमके, कुछ यूं कही अपने मन की बात…

मैं फिल्म इंडस्ट्री में अपनी काबिलियत पर हीरो नं. 1 बना। ये बात सही है कि मुझे न अच्छे डायरेक्टर मिले और न ही राजनीति में मुकाम हासिल कर सका।

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ललित सक्सेना@उज्जैन. दूसरों में कमियां निकालकर हम आगे नहीं बढ़ सकते। हमें अपने लिए खुद ही संघर्ष करना होता है। मैं फिल्म इंडस्ट्री में अपनी काबिलियत पर हीरो नं. 1 बना। ये बात सही है कि मुझे न अच्छे डायरेक्टर मिले और न ही राजनीति में मुकाम हासिल कर सका।

ठहाका सम्मेलन में शामिल होने आए अभिनेता गोविंदा

यह बात ठहाका सम्मेलन में शामिल होने आए अभिनेता गोविंदा ने गुरुवार शाम इंदौर रोड स्थित होटल में खास चर्चा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आज मैं जो कुछ हूं अपने माता-पिता के आशीर्वाद से हूं। वर्तमान में चल रही फूहड़ कॉमेडी पर गोविंदा बोले कि पहले पारिवारिक और स्वस्थ मनोरंजक फिल्में बना करती थीं, वह दौर अब नहीं रहा। टीवी चैनलों पर वॉइस ऑफ इंडिया और डांस वाले प्रोग्राम में बच्चों की अदाकारी देखकर दंग रह जाता हूं, कमाल कर रहे हैं आज के बच्चे। हंसमुख मिजाजी गोविंदा बात-बात पर चुटकियां भी ले रहे थे। उन्होंने कहा मैं जो किरदार निभाता हूं, उसमें जो हरकतें लाता हूं, वह आम जनजीवन से प्रेरित होकर करता हूं। लोगों को देखकर जो कुछ सीखता हूं वह फिल्मों में इस्तेमाल करता हूं, वह दर्शकों को पसंद आती है।

पर्दे पर मैं जब भी रोया हूं, लोगों ने खूब ठहाके लगाए हैं
मैं जब भी पर्दे पर रोया हूं, लोगों ने ठहाके लगाए हैं। लोगों के प्यार और उनके ठहाके मेरे लिए उनका प्यार है। यह बात फिल्म अभिनेता गोविंदा ने विश्व हास्य दिवस पर गुरुवार रात कालिदास अकादमी के भरत विशाला मंच पर 18वें अंतरराष्ट्रीय ठहाका सम्मेलन के दौरान कही। हजारों लोगों की भीड़ को फिल्म अभिनेता गोविंदा ने अपने अनूठे अंदाज से ठहाका लगाने को मजबूर कर दिया। आते ही उन्होंने मैं आया तेरे लिए गाकर उज्जैनवासियों को झूमने पर मजबूर कर दिया, सरकाई लो तकिया जाड़ा लगे पर गोविंदा खुद झूमकर नाचे। सर्द रात में हजारों लोगों ने पाश्र्व गायिका सुजातासिंह, अभिनेत्री मोनिका और कोरियोग्राफर पूजा बिष्ट के साथ गोविंदा द्वारा दी गई अनूठी प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

यहां महाकाल स्वयं विराजमान हैं

कार्यक्रम के दौरान गोविंदा ने कहा कि यह उज्जैन नगरी है, यहां महाकाल स्वयं विराजमान हैं। वे यहां कई बार आए और पूजा पाठ भी किया है। यहां का आशीर्वाद और मेरे माता-पिता के आशीष के कारण मैं गोविंदा कब बन गया मुझे पता नहीं चला। मैंने जब खुद मैंने अपनी फिल्में देखी तो सोचता था कि यह मैंने किया, क्योंकि मेरे साथ मेरे माता-पिता का आशीर्वाद रहा। उन्होंने कहा कि लोग कुछ भी कहें, जिंदगी में कितनी ही मुश्किलें हो, बस मुस्कुराएं, ठहाके लगाएं और फिर देखी जिंदगी कितनी आसान हो जाएगी।

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गीतों पर झूमे, कविताओं पर की वाह-वाह

इसके पूर्व कार्यक्रम में पाश्र्व गायिका सुजातासिंह ने संगीतमयी प्रस्तुति सत्यम शिवम सुंदरम से प्रारंभ की। वहीं लैला ओ लैला गीत पर उपस्थित दर्शकों को नाचने और झूमने पर मजबूर कर दिया। अभिनेत्री मोनिका और कोरियोग्राफर पूजा बिष्ट के साथ प्रस्तुति दी।

हस्तियों को किया सम्मानित

साहित्य के लिए कवि कालिदास ठहाका सम्मान कवि डॉ. पवन जैन आईपीएस को प्रदान किया गया। डॉ. शिवमंगलसिंह सुमन समीक्षा सम्मान प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक सुनील मिश्र को प्रदान किया गया। ठहाका में ठहाका अदालत में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों से रोचक सवाल किए गए। ठहाका में लॉफ्टर फेम जय छनियारा राजकोट, शायर और मिमीक्री आर्टिस्ट जीनत अहसान कुरैशी मुंबई, मालवा के कवि जानी बैरागी, कवयित्री ज्योति त्रिपाठी प्रतापगढ़, गीतकार सूरज नागर उज्जैनी मुंबई, कवयित्री वैशाली शुक्ला इंदौर, कवि अशोक भाटी ने लोगों को अपनी कविताओं के माध्यम से गुदगुदाया। स्वागत गीत डॉ. हरीश पोद्दार ने प्रस्तुत किया। ठहाका सम्मेलन आयोजन समिति के डॉ. शिव शर्मा ने आशीर्वचन दिए।