
उज्जैन. बैकुंठ चतुर्दशी के दिन महाकालेश्वर मंदिर से बाबा महाकाल की विशेष रूप से सवारी निकाली जाती है. महाकाल की यह विशेष सवारी रात को निकाली जाती है. महाकाल की यह सवारी अगहन महीने में निकलनेवाली चार सवारियों से अलग यानि पांचवीं सवारी होती है. बैकुंठ चतुर्दशी पर निकलने वाली यह सवारी इस बार 18 नवंबर को निकाली जाएगी.
महाकाल की इस सवारी को हरिहर मिलन सवारी के रूप में भी जाना जाता है. इस बार सवारी महाकाल मंदिर से रात 11 बजे रवाना होगी और रात को ही ठीक 12 बजे गोपाल मंदिर पहुंचेगी. यहां हरिहर मिलन होगा। इस मौके पर भगवान शिव की ओर से भगवान कृष्ण को बिल्वपत्र की माला अर्पित की जाएगी, जबकि भगवान कृष्ण की ओर से शिवजी को तुलसी की माला भेंट की जाएगी.
महाकाल मंदिर समिति सदस्यों के मुताबिक चातुर्मास से जागने के बाद भगवान शिव सभी अलौकिक व्यवस्थाएं भगवान विष्णु को सौंप देते हैं. सदस्यों ने बताया कि उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए यह सवारी निकाली जाती है. हरिहर मिलन सवारी के श्रद्धालुओं को दर्शन होते रहेंगे, लेकिन पिछले साल की तरह इस बार भी कोरोना प्रोटोकाल के तहत ही सवारी निकाली जाएगी.
Published on:
07 Nov 2021 02:50 pm
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