
सहकारिता विभाग ने होटल शांति पैलेस को जमीन देने वाली तीन गृह निर्माण संस्थाओं के खिलाफ फिर शुरू की जांच
उज्जैन. सहकारिता विभाग ने होटल शांति पैलेस को जमीन देने वाली तीनों गृह निर्माण संस्थाओं के खिलाफ एक बार फिर से जांच शुरू कर दी है। तीनों संस्थाओं को नोटिस भेजकर संस्था भूखंड बेचने, डायवर्सन नहीं कराने सहित अन्य बिंदुओं की जानकारी दो सप्ताह में देने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने यह कार्रवाई हाइकोर्ट द्वारा दिए गए स्टे के हटने के बाद शुरू की है। दरअसल हाइकोर्ट से स्टे के चलते विभाग ने अपनी जांच रोक दी थी।
सहकारिता विभाग ने अंजलि गृह निर्माण संस्था, नमन गृह निर्माण संस्था व आदर्श विक्रम गृह निर्माण संस्था को सहकारिता अधिनियम की धारा ७६ (2) के तहत नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में संस्थाओं से कब कितनी जमीन खरीदी गई, कॉलोनी काटने का लाइसेंस, कॉलोनी के नक्शे में संशोधन, भूमि डायवर्सन, गैर सदस्यों को विक्रय की गई जमीन, वर्ष 2016-17 की सदस्यों की सूची तथा संस्था की ओर से खरीदी गई भूमि सहित अन्य जानकारी मांगी गई है। दरअसल इन संस्थाओं ने गृह निर्माण संस्था के नाम से कॉलोनी काटने की जमीन ली थी लेकिन बाद में होटल शांति पैलेस के संचालक को बेच दी। मामले में वर्ष 2012-13 में शिकायत भी हुई थी। उस समय विभाग ने तीनों संस्थाओं के खिलाफ जांच बैठा दी थी। मामले में तत्कालीन सहकारिता उपायुक्त ने संस्था पदाधिकारियों के खिलाफ एफआइआर की कार्रवाई के आदेश भी दिए थे। इसी बीच हाइकोर्ट द्वारा कार्रवाई पर स्टे दिए जाने के कारण संस्थाओं के खिलाफ आगे कार्रवाई नहीं बढ़ पाई। हाइकोर्ट ने जून 2019 में ही स्टे हटा दिया गया है। ऐसे में विभाग ने फिर से रुकी पड़ी जांच शुरू कर संस्थाओं को नोटिस भेजे हैं।
संस्था अध्यक्षों को पदमुक्त किया जा चुका
अंजलि गृह निर्माण संस्था के अध्यक्ष ब्रजमोहन पिता कृष्ण गोपाल, नमन गृह निर्माण संस्था के शैलेष पिता आरके मेहता व आदर्श विक्रम गृह निर्माण संस्था के योगेश पिता भगवती प्रसाद (चुन्नू भैय्या) हैं। सहकारिता विभाग ने पूर्व में इन तीनों अध्यक्षों पर कार्रवाई करते हुए तीन साल के लिए पद हटा दिया गया है।
संस्थाओं ने यह की थी धांधली
अंजलि, नमन और आदर्श विक्रम गृह निर्माण ने नानाखेड़ा क्षेत्र में पार्थ परिसर के नाम से कॉलोनी विकसित की थी। इसके लिए टीएडंसीपी, नगर निगम की कॉलोनी सेल से नक्शा, डायवर्सन व लैंड यूज बदलने जैसी कार्रवाई की थी। वर्ष 2005-06 में संस्थाओं ने 10 सदस्यों को कॉलोनी के भूखंड की रजिस्ट्री की थी। रजिस्ट्री में सड़क, नाली, इलेक्ट्रिक पोल व सीवरेज पाइप लाइन डलने के विकास कार्य बताया था। वर्ष २००६, २००७ में होटल शांति पैलेस के नाम से 3 प्लॉट तथा एक प्लॉट सीमा पति चंद्रश्ेाखर श्रीवास के नाम से विक्रय किया, जबकि सहकारी संस्था गैर सदस्यों को भूखंड नहीं बेच सकती। बाद में तीनों संस्थाओं ने विक्रय सहित अन्य जमीन का डायवर्सन निरस्त करने की कार्रवाई की। इसमें बताया गया कि कहीं कोई निर्माण नहीं हुआ। जबकि रजिस्ट्री में कॉलोनी में विकास कार्य होना दर्शाया गया था। वहीं तत्कालीन उपायुक्त सहकारिता ने संस्थाओं की जमीन बेचने के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन व लागत मूल्य पर बेचने के दिशा-निर्देश दिए थे। बावजूद इसका पालन नहीं किया गया।
(जैसा कि सहाकारिता विभाग से की गई शिकायत)
इनका कहना
अंजलि, नमन और आदर्श गृह निर्माण संस्था के खिलाफ हुई शिकायत की जांच हाइकोर्ट स्टे के कारण रुकी हुई थी। स्टे हटने के बाद तीनों संस्थाओं को धारा 76 (2) के तहत नोटिस जारी कर भूखंड, डायवर्सन, सहकारिता, कॉलोनी लाइसेंस सहित अन्य जानकारी दो सप्ताह में देने को कहा है।
- ओपी गुप्ता, उपायुक्त सहकारिता
Published on:
31 Jul 2019 07:00 am
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