
Municipal Corporation,sick cow,
उज्जैन. नगर निगम की कपिला गोशाला में पशु आहर के नाम भी छलावा होने लगा है। गायों के भूख से मरने की घटनाओं के बाद निगम ने सुकले (पशु आहार) की व्यवस्था की, लेकिन ये इतना दोयम दर्जे का है कि इससे गाय और दुर्बल व बीमार होने लगी।
गायों को डाले गए सुकले में कचरा, धूल, सुतली ही नजर आ रही है। खरीदी के दौरान सामग्री की मॉनिटरिंग नहीं होने से ये हालात बन रहे हैं। वहीं गोशाला के शेड के नीचे अब भी कीचड़-गोबर में गायें फर्श पर पड़ी हुई है। बीमार गायों को अलग रखने व समुचित इलाज के बंदोबस्त भी गोशाला में नहीं है। शहर को मवेशी मुक्त बनाने व इनकी समुचित देखभाल के दावें के साथ शुरू हुई गोशाला में अव्यवस्थाओं की भरमार है।
इधर जिम्मेदारों का अजीब जवाब...
जैसा मिल रहा, वैसा ले रहे हैं, क्या करें ...
दोयम दर्जे का सुकला खरीदने के मामले में सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पुरुषोत्तम दुबे का जवाब भी कुछ एेसा ही है। उनका कहना है कि पहले स्टाक नहीं कर पाए। अब जैसा उपलब्ध हो रहा है, खरीदना पड़ रहा है, क्या कर सकते हैं। पूछने पर कि क्या भाव सुकला खरीदते हो, जवाब मिला ७०० से ८०० रुपए क्विंटल। हालांकि बाद में दुबे ने कहा कि अब पौष्टिक आहार के टेंडर कर दिया है। प्रक्रिया पूरी होते ही एक ही सप्लायर से गुणवत्तायुक्त सामग्री खरीदेंगे। इसके बाद ये समस्या दूर हो जाएगी।
निर्देश तो दिए जाते, लेकिन पालन नहीं
पिछले दिनों में बारिश के दौर में गायें खुले में ही रही और कुछ गायें मरने के बाद ७ दिन तक पड़ी रही। कारण बताया गया कि शेड के नीचे इतनी जगह नहीं तो खुले में रखना पड़ रहा है। अभी भी हालात यही है। गोशाला में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर निर्देश तो दिए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इनका उतना पालन नहीं होने से सैकड़ों गाय काल का शिकार बन रही है।
Published on:
07 Aug 2018 08:06 am
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