
महिला जननांग विकृति के लिए जीरो टॉलरेंस का अंतर्राष्ट्रीय दिवस
उज्जैन। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2003 में महिला जननांग विकृति के लिए जीरो टॉलरेंस को लेकर 6 फरवरी को इसका अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया है। पत्रिका ने शहर में भी इस तरह के विकृति के लोगों के बारे में जानकारी ली, जिसमें सामने आया कि यह कुप्रथा कुछ समुदाय के लोगों में है। जो प्रथा के चलते बालिकाओं व अपने बच्चों के जननांग की चमड़ी को काट देते हैं। हालांकि अब लोगों में जागरुकता के चलते यह प्रथा समाप्त हो गई। जो आदिवासी व ग्रामीण समाजों में चलती थी। हालांकि अब एक समाज में जरूर यह कुप्रथा चल रही है, जिससे बच्चों में इनफेक्शन व कईं तरह के एडीशंस सामने आते हैं। जननांग की बीमारियों से पीडि़त 20 से 25 मरीज महीने में जिला अस्पताल पहुंचते हैं।
कुप्रथा के चलते होती है बीमारियां
जननांगों को लेकर दुनियाभर के देशो में कई तरह की कुप्रथाएं हैं। इस प्रथा के चलते सबसे ज्यादा शिकार छोटे बच्चे विशेषकर लड़कियां होती है। इन कुप्रथा के कारण जननांग से जुड़ी बीमारियां होती है और आगे चलकर गंभीर रोग में बदल जाती है । इसमें कई बार मरीज लंबे समय तक दर्द झेलता है और आखिर में उसकी मौत भी हो जाती है।
समाज में नहीं होती ज्यादा चर्चा
जननांग से जुड़ी बीमारियों को लेकर समाज में ज्यादा चर्चा नहीं होती है। इससे जुड़े रोग को अधिकतर इलाज नहीं किया जाता या शर्म के कारण बताया नहीं जाता। वहीं घरेलू उपचार से इस रोग का निदान किया जाता है। ऐसे में सही उपचार नहीं मिलने से रोग बढ़ जाता है और गंभीर रूप ले लेता है। डॉक्टर बता रहे हैं कि इस मामले में लड़कियों को ज्यादा परेशान होती है। हालांकि मां को ही आगे रहकर लड़कियों के जननांगों से जुड़ी विभिन्न बातें साझा कर उन्हें स्वस्थ्य रखने का काम करना चाहिए।
टीटनेस होने से हो सकती है मौत
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू राठी के अनुसार इस कुप्रथा के चलते जननांग में गंभीर दर्द, अत्यधिक रक्तस्राव (रक्तस्राव), झटका, जननांग ऊतक की सूजन, संक्रमण, इम्यूनोडिफीसिअन्सी वायरस (एचआइवी), पेशाब की समस्याओं, और असामान्य निशान यहां तक की टीटनस होने के कारण मौत हो सकती है। इसके साथ ही यह बच्चों के अधिकारों का हनन है।
Published on:
06 Feb 2020 05:39 pm
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