
भैरवगढ़ प्रिंट की मांग जरूर, उत्पादन कम, हस्तकला के क्षेत्र में आज भी इसकी अलग पहचान है,,भैरवगढ़ प्रिंट की मांग जरूर, उत्पादन कम, हस्तकला के क्षेत्र में आज भी इसकी अलग पहचान है,
उज्जैन. शहर की भैरवगढ़ प्रिंट कला सौ वर्ष से ज्यादा पुरानी है। हस्तकला के क्षेत्र में आज भी इसकी अलग पहचान है, लेकिन इसे जिंदा रखना कलाकार और इससे जुड़े व्यापारियों के लिए मुश्किल हो रहा है। एक ओर नई पीढ़ी का रुझान कम होने से कारीगरों की संख्या कम होती जा रही है, वहीं ब्रांड युग में रोज फैशन बदलने के कारण बाजार में टिके रहना मुश्किल हो रहा है। हालांकि हैंडलूम का चलन बढऩे से देशभर में भैरवगढ़ प्रिंट की मांग जरूर है, लेकिन उत्पादन कम हो रहा है। शनिवार २१ दिसंबर से हैंडलूम सप्ताह शुरू हो रहा है। पत्रिका की एक रिपोर्ट....
पहले 15-20 दिन में मिलते थे रुपए
कारखानों में से साडिय़ां, चादर व अन्य सामान हस्तशिल्प निगम उज्जैन खरीदती है। पहले व्यापरियों को 15 से 20 दिन में अपने सामान की कीमत मिल जाती है, लेकिन अब 6 माह बाद ही रुपए दिए जाते हैं, जिससे इन्हें व्यापार चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। महीने में अच्छा माल हो तो कम से कम 100 नग हस्तशिल्प निगम खरीदती है। सरकार की ओर से भी इन व्यापारियों के लिए कोई अलग से योजना नहीं है ताकि इनको उस योजना का लाभ मिल सकें ।।
रुझान कम, बंद होने लगे कारखाने
भैरवगढ़ क्षेत्र में पहले 40 कारखाने थे। नई पीढ़ी का इस रुझान कम होने से से कारीगरों की संख्या कम होती जा रही है, जिसके कारण धीरे-धीरे कारखाने बंद होते जा रहे हैं। अब तक 10 कारखाने बंद हो चुके हैं।
पर्यटक होने लगे जागरूक
शहर में बाहर से आने वाले पर्यटक धीरे-धीरे जागरूक होने लगे हैं। पर्यटक शहर से कपड़े लेने की बजाय करखानों में कपड़ा लेना पसंद करता है। शहर में पूछते-पूछते पर्यटक कारखाने तक पहुंच जाता है और कारखाने में कार्य और मेहनत देखकर आकर्षित हो जाता है।
पेनवर्क से बनती है खूबसूरत डिजाइन
पेनवर्क से कपड़े पर खूबसूरत डिजाइन बनती है। पेनवर्क साइकिल की ताड़ी और जूट से बनाया जाता है। पेनवर्क को गर्म करके कलर भरकर कपड़ों पर डिजाइनिंग बनाई जाती है।
भैरवगढ़ के कारखानों की खासियत
चंदेरी जिला अशोक नगर और महेश्वर से कपड़ा खरीदकर लाते हैं और प्रिंटिंग भैरवगढ़ के कारखानों में होती है। पिं्रट अच्छी होने के कारण यहां के कपड़ों की अच्छी डिमांड होती है। यहां के व्यापारियों का कहना है प्रिंटेड में खपत अधिक होती है। ज्यादा देख-रेख और मेहनत भी ज्यादा लगती है। यहां पर बनी साडिय़ां और अन्य चीजों की इंदौर, बैंगलुरू, दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद में अच्छी बिक्री होती है।
वॉल पेंटिंग का भी करने लगे कार्य
&समय के साथ कार्य में बदलाव करने लग गए है। 20 साल पहले वॉल पेंटिंग का कार्य बंद कर दिया था। वर्तमान में इंटीरियल डिजाइनिंग होने के कारण अब वॉल पेंटिंग फिर शुरू कर दी है। ग्राहक कम्प्यूटर से डिजाइन बनाकर देता है और फिर हम उसे कपड़ों में डिजाइन करके देते है। इन डिजाइन कपड़ों का उपयोग अधिकतर कुर्सी, दीवारों, खिड़कियों पर होता है।
सैय्यद अब्दुल माजिद, व्यवसायी
कारोबार पर पड़ी जीएसटी की मार
जीएसटी लगने के कारण व्यापारियों का खर्च और भी ज्यादा बढ़ गया है। हैंडलूम पर 5 प्रतिशत टैक्स, केमिकल पर 28 प्रतिशत टैक्स और भाड़े में 2 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। कुल मिलाकर व्यापारियों को 35 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। कारीगरों की भी संख्या कम होती जा रही है। कुछ व्यापारी परिवार सहित कार्य में लग जाते हैं, जिसमें उन्हें लागत का पता नहीं चल पाता है।
सैय्यद रसीद हारुन, व्यवसायी
Published on:
21 Dec 2019 12:29 am
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