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Mahakal Darshan – अब भस्म आरती में प्रत्येक व्यक्ति शामिल होगा, यह है दर्शन की नई व्यवस्था

पत्रिका ने उठाया था मुद्दा : भस्म आरती दर्शन व्यवस्था में किया बड़ा बदलाव, महाकाल भस्मारती में श्रद्धालु करेंगे चलित दर्शन, जिन्हें अनुमति नहीं, उन्हें भी मिल सकेगा प्रवेश...>

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उज्जैन. भगवान महाकाल की विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में अब हर श्रद्धालु शामिल हो सकेंगे। मंदिर में भस्म आरती के लिए चलित दर्शन व्यवस्था लागू होने जा रही है। इसके तहत जिन श्रद्धालुओं का ऑफलाइन या ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ, उन्हें आरती में नि:शुल्क प्रवेश दिया जाएगा। भस्म आरती को लेकर यह बड़ा बदलाव सोमवार से शुरू होगा। इसमें पहले सात दिन तक ट्रायल किया जाएगा और व्यवस्था सुचारू रहने पर नियमित करेंगे। चलित दर्शन की इस नई व्यवस्था से देश-विदेश से आने वाले भक्तों को बाबा की भस्म आरती में शामिल नहीं होने का मलाल नहीं रहेगा।

महाकाल मंदिर में भस्म आरती में चलित दर्शन व्यवस्था का फैसला बुधवार को मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में लिया गया। 'पत्रिका' ने भस्म आरती दर्शन व्यवस्था में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं मिलने और उन्हें निराश लौटने का मुद्दा उठाया था। मंदिर समिति अध्यक्ष कलेक्टर आशीष सिंह ने भस्म आरती दर्शन में आ रही परेशानी को दूर करने को चलित दर्शन की व्यवस्था शुरू करने की बात कही थी। इस पर बुधवार को कलेक्टर ने फैसला लेते हुए सोमवार से बतौर ट्रायल चलित भस्म आरती दर्शन व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया है। कलेक्टर ने बताया कि भस्म आरती के दौरान पंजीयनधारी श्रद्धालुओं के अलावा अन्य श्रद्धालुओं को सिंहस्थ 2016 की तर्ज पर कार्तिकेय मंडपम् की अंतिम दो पंक्तियों से दर्शन कराया जाएगा। श्रद्धालुओं के प्रवेश-निर्गम, आरती में सम्मिलित होने के समय व मार्ग आदि विषयों पर चर्चा कर प्रायोगिक रूप से चलित दर्शन व्यवस्था शुरू की जाएगी। बता दें, भस्म आरती में प्रवेश के लिए महज 1500 श्रद्धालुओं को अनुमति दी जा ही है। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन अनुमति लेना पड़ रही है। इसके लिए 200 रुपए शुल्क देना पड़ रहा है।

रथ पर निकलेंगे महाकाल, पालकी भी ऊंची होगी

सावन-भादौ में निकलने वाली सवारियों में इस बार बदलाव नजर आएगा। पालकी की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी, साथ ही सवारी रथ पर निकाले जाने की बात कही जा रही है। सवारी में बढ़ती भीड़ को देखते हुए पालकी की ऊंचाई बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। सभी को सुगमता से दर्शन हो सकें, इसके लिए पालकी को रथ पर रखे जाने पर भी मंथन हुआ। रथ पर कहार पालकी को सहारा देकर खड़े रहेंगे। आसपास पुजारी-पुरोहित रहेंगे। रथ पूरे मार्ग पर उसी तरह भ्रमण करेगा, जिस तरह पालकी निकलती है। सड़क के दोनों तरफ श्रद्धालुओं को बैरिकेड्स से ही बाबा के दर्शनों का लाभ मिलेगा। प्रबंध समिति की बैठक में और भी कई बिंदुओं पर चर्चा हुई। बता दें इस वर्ष सावन माह की शुरुआत 14 जुलाई से हो रही है। सावन-भादौ के प्रत्येक सोमवार को बाबा महाकाल की सवारी निकले जाने की परंपरा है। पहली सवारी 18 जुलाई को निकाली जाएगी।

मंदिर में बनेगी भौतिक स्मारिका

समिति द्वारा होने वाले समस्त क्रियाकलापों के संबंध में जानकारी एकत्रित की जाकर भौतिक स्मारिका प्रकाशित किए जाने पर सहमति व्यक्त की गई। इसमें धार्मिक सांस्कृतिक गतिविधियां, श्रद्धालुओं की संख्या, विशेष पर्व त्यौहार, पारंपरिक पूजन, पालकी के संबंध में जानकारी व अन्य मंदिर की ओर से होने वाली सामाजिक गतिविधियों का विवरण होगा। साथ ही एक पुस्तक का प्रकाशन भी किया जागा, जिसमें महाकाल का इतिहास परंपरा, विधिविधान के अतिरिक्त मनाए जाने वाले पर्व, के उल्लेख के संबंध में जानकारी होगी।

बजट: 81 करोड़ 65 लाख प्रस्तावित आय

प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ ने बैठक में 2022-23 के आय-व्यय का अनुमोदन किया, इसके बाद स्वीकृति के लिए आयुक्त उज्जैन संभाग, उज्जैन की ओर प्रेषित किया जाएगा। गत वर्ष के किए गए समस्त व्ययों का अनुमोदन किया गया। इस वर्ष 2022-23 बजट में प्रस्तावित आय 81 करोड़ 65 लाख रुपए, प्रस्तावित व्यय 81 करोड़ 10 लाख व प्रस्तावित लाभ/बचत 55 लाख प्रस्तावित की गई।

ऑनलाइन दर्शन की भी व्यवस्था

प्रशासन ने ज्योतिर्लिंग के ऑनलाइन दर्शन की भी व्यवस्था कर रखी है। हर दिन आनलाइन दर्शन किए जा सकते हैं। जो लोग उज्जैन तक नहीं आ सकते वे अपने घर बैठकर ही महाकाल के दर्शन कर सकते हैं। इसके लिए dic.mp.nic.in/ जिला प्रशासन की वेबसाइट पर क्लिक करना होगा। इसके अलावा अपने मोबाइल फोन पर भी हर दिन लाइव दर्शन किए जा सकते हैं।