14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

30 ह्जार सैलरी पर दी चहेतो को जॉब, मामला खुलने पर हडकंप

महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विवि - नियुक्ति प्रक्रिया पर विवादों के चलते तीन दिन बाद फिर कार्यपरिषद की बैठक  

2 min read
Google source verification

उज्जैन. महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय में विभिन्न नियुक्तियों का विवाद गहराने लगा है। विवि में सोमवार को कार्यपरिषद की बैठक हुई। इसमें नियुक्ति के तीन प्रकरणों को सदस्यों ने समझने की कोशिश की। तो प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी उजागर होने लगी। सदस्यों ने आपत्ति ली और शासन को जानकारी भेजने की बात कही। इसके बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में तीन दिन बाद फिर कार्यपरिषद की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक के एजेंडे में तीन मुद्दे शामिल है। इसमें निदेशक नियुक्ति, आईटी प्रभारी की नियुक्ति व सलाहकार समिति की नियुक्ति का प्रकरण शामिल है। शुक्रवार की बैठक में यह मुद्दे ही एजेंडे में रहेंगे।

विवि में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस नेत्री नूरी खान ने प्रदर्शन किया और राज्यपाल को :ह्लद्व:ाापन भेजा। इसके बाद मामला कार्यपरिषद के सदस्यों के संज्ञान में आया। उन्होंने कार्यपरिषद की इन प्रकरणों की पूरी जानकारी निकाली। तो प्रक्रिया में कई खांमी निकली।

बैठक में होगा निर्णय

विवि में शुक्रवार को आयोजित कार्यपरिषद की बैठक में विवादित प्रकरण पर निर्णय होने की संभावना है। कार्यपरिषद सदस्यों ने प्रकरण पर शासन से अभिमत की बात कही है। एेसे में नियुक्ति प्रक्रिया को खारिज करने की प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही भुगतान पर तत्काल रोक लगाई जाएगी। वहीं सदस्यों के विरोध होने पर विभागीय जांच भी शुरू हो सकती है।

यह है प्रकरण

विवि में एक निदेशक पद पर नियुक्ति हुई। निदेशक का पद प्रोफेसर स्तर का होता है। विवि प्रशासन ने पद की योग्यता में बदलाव किया। साथ ही निदेशक पद पर नियुक्ति के लिए शासन से अनुमति नहीं ली। विवि प्रशासन ने आईटी प्रभारी पद पर ३० हजार रूपए पर एक कर्मचारी को नियुक्ति किया। कार्यपरिषद के सदस्यों का कहना था कि आईटी प्रभारी का पद पीजी डिप्लोमाधारी का है। स्थाई नियुक्ति नहीं होने तक १० से १५ हजार में ही योग्य कर्मचारी मिल सकता है। इसी के साथ तीन लोगों को सलाहकर के रूप में नियुक्त किया है। इन लोगों को ३० हजार रूपए का भुगतान प्रतिमाह किया जा रहा है। सदस्यों का कहना था कि विज्ञापन निकालते। कई लोग निशुल्क में सलाह देने के लिए तैयार हो जाते है। एेसे वित्तीय भार बढ़ाकर सलाह लेना उचित नहीं है।