
हाउस वाइफ-डे आज: ये सीइओ से कम नहीं, इनका प्रबंधन ही मकान को घर बनाता है, सुबह से रात तक परिवार के हर सदस्य के लिए रहती हैं समर्पित, तब दूसरे कर पाते हैं ठीक से अपना काम
उज्जैन. गृहिणी या हाउस वाइफ... एक एेसा ओहदा जिसके अधीन पूरी गृहस्थी समाहित है... अंतहीन जिम्मेदारी और अपेक्षाओं से घिरी, बावजूद बिना शिकंज लिए असीम क्षमताओं से भरी वो महिला जिसका प्रबंधन ही ईंट-सीमेंट से बने किसी मकान को घर बनाता है। वास्तव में यह घर-गृहस्थी के असल सीइओ हैं जिनकी बदोलत ही परिवार के अन्य सदस्य अपने-अपने क्षेत्र का काम ठीक से कर पाते हैं।
वर्र्किंग वूमन के दौर में कई बार हाउस वाइफ की क्षमताओं को कमतर भी आंक लिया जाता है जबकि घर में रहकर पूरे परिवार को संभालना कई मायनों में अन्य लोगों के कार्य से काफी मुश्किल होता है। जो महिलाएं नौकरी या व्यवसाय पेशा हैं, वे तो असाधारण क्षमताओं की धनी हैं ही, लेकिन जो पूरी तरह घर-गृहस्थी संभालने में समर्पित हैं, उनका समर्पण भी किसी स्तर पर वर्र्किंग वुमन से कम नहीं हैं। परिवार में बच्चे, पति, सास-ससुर या अन्य सदस्यों के लिए वे नि:स्वार्थ भाव से सुबह से रात तक जुटी रहती हैं, तब जाकर परिवार के अन्य सदस्य उनका कार्य कर पाते हैं। रविवार को हाउस वाइफ-डे के अवसर पर अपने परिवार के लिए रोज मल्टी टास्क पूरे करने वाली एेसी ही गृहिणीयों को लेकर एक रिपोर्ट
उनके बिना गृहस्थी की कल्पना भी नहीं
निजी फर्म में कार्यरत रविंद्रनगर निवासी मुकेश शर्मा का विवाह करीब २९ वर्ष पूर्व मनीषा शर्मा से हुआ था। मुकेश कहते हैं, वे मनीषा के बिना घर-गृहस्थी की कल्पना ही नहीं कर सकता। शादी के बाद उन्हें एक नहीं पहचान, नई जीवनशैली मिली है जो मनीषा के त्याग-समर्पण से ही संभव हो पाया है। वह सुबह ५.३० बजे से उठकर अपने कामों में लग जाती है। मेरे साथ दोनों बेटे और मम्मी-पापा का भी बराबरी से ख्याल रखती है। मुझे तो परिवार के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। कई बार हम एक काम में ही परेशान हो जाते हैं लेकिन वह घर, परिवार और समाज के ढेरों कामों का पूरा प्रबंधन इतनी आसानी से कर लेती है, जिसे बयां नहीं किया जा सकता। उनका प्रबंधन इतना बेहतर है कि वे घर के सारे काम करने के बावजूद न सिर्फ परिवार के लिए बल्कि सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी तक के लिए भी समय निकाल लेती है।
वो है तो मैं निश्चिंत हूं
पेशे से ज्योतिषाचार्य व कर्मकांडी मारुतीगंज निवासी पं. चंदन व्यास और जया व्यास की शादी करीब ६ वर्ष पूर्व हुई थी। वे संयुक्त परिवार में रहते हैं। चंदन कहते हैं, जया के आने से जीवन में एक स्थायी निश्चिंतता आई है। आज मैं घर से कितने भी समय के लिए बाहर रहूं, इस बात को लेकर निश्चित रहता हूं कि घर व परिजनों का ध्यान रखने के लिए जया है, या यूं भी कह सकते हैं कि वो घर पर है, इसका मतलब मैं घर पर हूं। चंदन के अनुसार उनके पेशे में भी जया एक प्रकार से उनकी हीडन पार्टनर या हीडन असिस्टेंट की तरह है। वह फोन पर ही बता देते हैं कि उन्हें अपने जजमान के लिए कौनसी पूजा करना है, जया उस आधार पर पूजन की पूरी तैयारी कर लेती हैं। हम तो एक दिन में एक-दो प्रकार के कार्य ही करते हैं लेकिन वे एक दिन में कई भूमिकाएं और कई जिम्मेदारी बखुबी निभाती है।
Published on:
02 Nov 2019 10:03 pm
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