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सपने में माता ने खुद बताया स्थान, खुदाई की तो निकली सुंदर ​मूर्ति

उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील में छठी शताब्दी का ऐतिहासिक मंदिर है। रुनीजा के पास माता चामुंडा का यह गुप्तकालीन मंदिर चमत्कारी माना जाता है। भक्तों का कहना है कि इस मंदिर में आने पर आनंद की अनुभूति होती है और कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। यहां अर्जरे परिवार की कुल देवी सती माता का मंदिर भी है। खास बात यह है कि माता ने सपने में आकर खुद मंदिर का स्थान बताया था।

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रुनीजा के पास माता चामुंडा का यह गुप्तकालीन मंदिर चमत्कारी माना जाता

नवरात्रि में हम आपको एमपी के एक अनूठे माता मंदिर के बारे में बता रहे हैं। उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील में छठी शताब्दी का ऐतिहासिक मंदिर है। रुनीजा के पास माता चामुंडा का यह गुप्तकालीन मंदिर चमत्कारी माना जाता है। भक्तों का कहना है कि इस मंदिर में आने पर आनंद की अनुभूति होती है और कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। यहां अर्जरे परिवार की कुल देवी सती माता का मंदिर भी है। खास बात यह है कि माता ने सपने में आकर खुद मंदिर का स्थान बताया था।

प्राचीन मान्यताओं और ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार माता चामुंडा का मंदिर छठी शताब्दी का गुप्तकालीन मंदिर है जिसे मुस्लिम शासकों ने ढहा दिया था। बाद में इसे दोबारा बनाया गया। यहां गर्भगृह में माता चामुंडा की दिव्य प्रतिमा विराजमान हैं। एक तरफ स्कंदमाता की मूर्ति तो दूसरी तरफ शेषशायी गणेशजी की मूर्ति विराजमान हैं।

प्रसिद्ध पुरातत्वविद वीएस वाकणकर के अनुसार इस प्रकार की मूर्ति देशभर में अनूठी व इकलौती है। मंदिर के आंगन में दो छतरियां, एक पवित्र कुंड और गिरी गोस्वामी पुजारी परिवारों की समाधियां भी हैं।

यहां निमाड़ क्षेत्र के लाड़ व अर्जरे परिवार की कुल देवी सती माता का मंदिर भी स्थित है। बताते हैं कि कुछ वर्ष पूर्व यह मूर्ति सपने में दिखाई दी थी। जब सपने में दिखे स्थान पर खुदाई की तो माता की सुंदर मूर्ति का प्राकट्य हुआ। बाद में अर्जरे परिवार ने यहां मंदिर का निर्माण किया।

तीन रूप में दर्शन देती है माता रानी
माता का स्वरूप सुबह बालिका, दोपहर में युवावस्था और संध्या समय वृद्धावस्था का दिखाई देता है। इसलिए माता को त्रिरूपधारिणी भी कहते हैं। क्षेत्र में मान्यता है कि मंदिर परिसर में मौजूद पवित्र कुंड के जल के उपयोग से अनेक बीमारियां खत्म हो जाती हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही विशेष सुखद अहसास होता है।

मंदिर के विकास के लिए 20 वर्षों से संस्था बनी है जिसके संयोजक अशोक वैष्णव है। संयोजक अशोक वैष्णव ने बताया कि यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन होने से स्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता है। यात्रियों के रहने के लिए एक हाल, एक टीन शेड का विशाल डोम, सुलभ काम्प्लेक्स, भोजन शाला, पार्किंग, बर्तन, शुद्ध पेयजल आदि की व्यवस्था संस्था ने की है।

उज्जैन-रतलाम मार्ग पर 20 लाख की लागत से एक भव्य द्वार का निर्माण भी किया जा रहा हैं। महाष्टमी को यहां 2100 कन्याओं के महाभोज होता है। मंदिर में प्रात:कालीन आरती सुबह 6 बजे व सांध्यकालीन आरती रात्रि 8 बजे होती हैं।

कैसे जाएं मंदिर
गजनीखेड़ी गांव में है माता चामुंडा का धाम
जिला मुख्यालय उज्जैन से 65 किमी
तहसील मुख्यालय बड़नगर से 17 किमी

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