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उज्जैन. उज्जैन प्राचीन धार्मिक शहर है और इसके विकास में शासन-प्रशासन को ब्राह्मणों की भूमिका तय हो। महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धर हो या अन्य धार्मिक स्थानों के कार्य। इनकी योजनाओं में ब्राह्मण, पुजारी-पुरोहितों से सलाह लेना चाहिए। शासन-प्रशासन की ओर से ब्राह्मण समाज की उपेक्षा हो रही है। यह बंद होना चाहिए। समाज के कई मुद्दे हंै, लेकिन सबसे बड़ा विषय आरक्षण है। आरक्षण और वोट बैंक की राजनीति ने पहले ही समाज को हाशिए पर डाल दिया है। हम किसी का हक नहीं छीनना चाहते, लेकिन आरक्षण आर्थिक आधार मिलना चाहिए। यह बात मंगलवार को पत्रिका के टॉक-शो में ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने कही। समाजजन बोले- शहर के विकास में ब्राह्मणों को नजरअंदाज किया जा रहा है। अब ब्राह्मणों से सुझाव लेना तो दूर प्राचीन महत्व की जानकारी तक नहीं ली जाती है।
पत्रिका हर मुद्दे पर साथ
टॉक-शो की शुरुआत में पत्रिका उज्जैन के स्थानीय संपादक गोपालस्वरूप वाजपेयी ने कहा कि वे ब्राह्मण समाज की हर गतिविधि, मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। पत्रिका एक अखबार नहीं मिशन है, जिसकी बुनियाद सच्चाई पर टिकी है। पत्रिका ऐसा अखबार है, जिसका खबरों के अलावा कोई व्यवसाय नहीं है। ब्राह्मण समाज के हर सामाजिक सरोकार में पत्रिका साथ है। विभिन्न समाजों के लिए उठाए गए मुद्दों और उनके परिणाम की जानकारी दी।
ब्राह्मण समाज के प्रबुद्धजनों ने पत्रिका मंच पर उठाई अपनी समस्याएं
सरकार के पास कोई योजना नहीं
यह सही है कि ब्राह्मणों सरकार के लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं है। हर मामलों में भेदभाव है। सरकार सिर्फ एससी-एसटी वर्ग को ध्यान में रखकर योजना बना रही है, जबकि सामान्य वर्ग के लिए कुछ नहीं है। हम सब इसकी बातें करते है, परिणाम कुछ नहीं है। बेहतर तो यह होगा कि हम सरकार की मदद का इंतजार नहींं करते हुए ब्राह्मण समाज की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के साथ रोजगारोन्मुखी योजनाओं का क्रियान्वयन समाज स्तर पर करें।
पं. यशवंत अग्निहोत्री
नजरअंदाज कर रहे ब्राह्मणों को
ब्राह्मणों का अपना इतिहास है। सनातन धर्म, संस्कृति के लिए अनेक कार्य किए हैं। इसके अनेक उदाहरण हैं। उज्जैन के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो सिंहस्थ का आयोजन हो या अन्य बड़े धार्मिक आयोजन हर बार ब्राह्मणों को नजरअंदाज किया जाता है। ब्राह्मणों को यथोचित महत्व, सम्मान और सुविधा मिलना चाहिए। आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए। समाज को जोडऩे की पत्रिका की अच्छी पहल।
पं.सुरेंद्र चतुर्वेदी, अध्यक्ष अभा ब्राह्मण समाज.
बेरोजगारी का प्रभाव है समाज पर
शहर में बेरोजगारी का सब से अधिक प्रभाव ब्राह्मणों पर हो रहा है। शिक्षा का स्तर बढ़ा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर रोजगार के विकल्प सीमित हो गए हैं। बेरोजगारी से शहर में परिवारों के विघटन में वृद्धि हो गई है। शहर में एक ज्योतिर्लिंग, दो शक्तिपीठ, १६ प्राचीन कुण्ड, ७ सागर, ८४ महादेव और अन्य प्राचीन धार्मिक स्थलों को ध्यान में रखकर धार्मिक पर्यटन शहर बनाया जाना चाहिए। इसमें ब्राह्मणों की भूमिका का निर्धारण योजना निर्माण हो।
-रामेश्वर दुबे, महासचिव अभा ब्राह्मण समाज.
चेतना के अभाव में पिछड़ रहे
ब्राह्मणजनों में चेतना के अभाव में दलीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व में ब्राह्मण समाज की स्थिति लगभग शून्य है। समाज को इसके लिए जागृत होना पड़ेगा। आज हालात यह है कि सरकार में ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व नहीं के बराबर है। आरक्षण के चलते समाज में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। हर घर में युवक-युवती के पास उच्च स्तर की डिग्री है, लेकिन नौकरी नहीं है। उद्योग-धंधे के लिए कोई आर्थिक योजना नहीं है।
-पं. अमित तिवारी, अध्यक्ष कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज.
ब्राह्मण समाज के प्रति भेदभाव होने लगा है
सरकार की नीतियों के कारण ब्राह्मण समाज के साथ हर जगह भेदभाव होने लगा है। सिर्फ आरक्षण या राष्ट्रीय-राज्य स्तर पर ही नहीं स्थानीय स्तर पर ब्राह्मणों के महत्व को नजरअंदाज किया जाता है। यह ठीक नहीं है। संविधान और नियम के नाम पर भी समाज के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। पत्रिका के प्रयास की सराहना करता हूं।
-पं. देवेंद्र पुरोहित.
समाज के युवा अपनी काबिलियत के दम पर हैं
आरक्षण का दंश समाज के युवा ही नहीं वे भी झेल रहे हैं, जो अपनी काबिलियत के बल पर नौकरी में हैं। पहले से ही आरक्षण के नौकरी के अवसर कम हैं, वहीं जो लोग नौकरी में हैं, उन्हें प्रमोशन नहीं मिल रहा है। यह दुर्भाग्य है कि ९० प्रतिशत की योग्यता वाले को ४० प्रतिशत अंक लाने वाले ज्ञान देे रहे हंै। सरकार पुजारी-पुरोहितों के लिए आरक्षण किया जा रहा है।
-पं.गिरीश पाठक.
समाज में हर व्यक्ति अमीर नहीं, गरीब हैं
ब्राह्मण समाज में हर व्यक्ति अमीर नहीं है। गरीब भी है। इन लोगों के लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं है। इससे ज्यादा शर्म की बात क्या होगी कि सामान्य निर्धन वर्ग की छात्रवृत्ति २०० रुपए मिल रही है। हम आरक्षण का दंश झेल रहे हैं। इससे निपटने के लिए ब्राह्मणों को आपसी राजनीति को खत्म कर साथ चलना होगा। एक के लिए सब और सब के लिए एक का लक्ष्य लेकर आगे बढऩा होगा।
पं.आशीष उपाध्याय
ब्राह्मणों को उचित स्थान नहीं मिला
इतिहास गवाह है कि राजनीतिक दलों के साथ सरकारों में ब्राह्मणों को पर्याप्त पद और महत्व मिलता रहा है। अब हालात बदल गए हैं। वर्षों से शहर से ब्राह्मणों का उचित स्थान नहीं मिला है। चुनावों में किसी भी दल से ब्राह्मण समाज का उम्मीदवार होने पर उसका न केवल समर्थन करें, वोट भी ब्राह्मण समाज के प्रत्याशी को दिया जाए।
-पं. प्रणव गर्ग.
आरक्षण के चलते समस्या बढ़ गई
आरक्षण के चलते ब्राह्मण समाज के युवाओं के सामने नौकरी तो ठीक अच्छे कॉलेजों में पढऩे तक की चुनौती है। ८५ फीसदी नंबर लाने वाले को कोर्स विशेष में प्रवेश तक नहीं मिल रहा है। समाज के पांच हजार युवाओं के पास कामकाज नहीं है। ब्राह्मण समाज अनेक समस्याओं से जूझ रहा। सामाजिक एकता के अभाव में समाज पलायन कर रहा है।
-डॉ. निर्दोष निर्भय.
आर्थिक आधार पर हो आरक्षण
हम आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए। हम यह नहीं भूले कि देश ही नहीं विश्व में ब्राह्मणों का एक इतिहास रहा है। जो देश दुनिया को हमने दिया ऐसा कहीं और नहीं है। आरक्षण वोट बैंक की राजनीति से नासूर बन गया है। यह असमानता का कानून है। हम इसमें बदलाव का इंतजार करने की बजाए खुद ही बदलने का प्रयास करें। अपने बच्चों को सक्षम बनाए।
- पं. राजेश व्यास.
ब्राह्मण समाज उपेक्षा का शिकार
शासन-प्रशासन द्वारा ब्राह्मणों की लगातार उपेक्षा की जा रहीं है। इससे निपटने के लिए सभी को एक मंच पर लाना होगा। ब्राह्मण समाज से साथ सरकार की योजनाओं में भी भेदभाव है। ब्राह्मण समाज में कई लोग गरीब वर्ग से हैं। कई लोग ऐसे हैं, जिनको सिर्फ इसलिए बीपीएल कार्ड नहीं बन रहे हैं कि वे ब्राह्मण है।
पं. राजेश शर्मा
Published on:
21 Feb 2018 12:35 pm
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