
दत्त अखाड़ा में दुर्लभ शिवलिंग की स्थापना भी की थी, जिसे गौरी-शंकर शिवलिंग के रूप में आज भी पूजा जाता है। एक ही जलाधारी में दो शिवलिंग हैं।
आदिगुरु शंकराचार्य की जयंती
- चारधाम मंदिर में भव्य रूप से मनाई सनातन धर्म के संवाहक की जयंती
उज्जैन. आदि गुरु शंकराचार्य जी का जयंती पर्व मंगलवार 25 अप्रेल को मनाया गया। करीब ढाई हजार साल पहले उनका उज्जैन आगमन हुआ था। तब उन्होंने यहां दत्त अखाड़ा में दुर्लभ शिवलिंग की स्थापना भी की थी, जिसे गौरी-शंकर शिवलिंग के रूप में आज भी पूजा जाता है। एक ही जलाधारी में दो शिवलिंग हैं। इन्हें गौरी-शंकर शिवलिंग कहा जाता है। अखाड़े के साधु-संतों का दावा है कि स्फटिक के इस दुर्लभ शिवलिंग की स्थापना आद्य शंकराचार्य ने ढाई हजार साल पहले उज्जैन यात्रा के समय की थी।
ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया कि आदिगुरु शंकराचार्य देशभर में व्याप्त ज्योतिर्लिंगों की यात्रा करने निकले थे, तब उज्जैन भी आए थे। उस दौरान उन्होंने यहां दुर्लभ शिवलिंग की स्थापना की थी। पूर्व में हर वर्ष उनकी जयंती पर शोभायात्रा निकाली जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह क्रम बंद हो गया। जयंती पर्व के अवसर पर सभी सनातन धर्मावलंबी संत जन एवं विप्र ब्राह्मण जन वैशाख शुक्ल पंचमी 25 अप्रेल को सुबह 9 बजे आद्य जगदगुरु शंकराचार्य जी की जयंती चार धाम आश्रम मंदिर में मनाई गई। संस्थापक महामंडलेश्वर निरंजनी अखाड़ा स्वामी शांतिस्वरूपानंद सरस्वती की अध्यक्षता में यह आयोजन हुआ। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पं. सुरेंद्र चतुर्वेदी, महामंत्री तरुण उपाध्याय, सचिव शैलेंद्र द्विवेदी व चार धाम मंदिर ट्रस्ट परिवार के कोषाध्यक्ष अशोक प्रजापत, कमलेश पंचोली, पुरुषोत्तम व्यास ने बताया कि संतों के प्रवचन एवं आद्य जगतगुरु शंकराचार्य के चित्र पर पूजन कर तथा संतों के सम्मान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
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आज होगी प्रांतीय बैठक व काव्य गोष्ठी
राष्ट्रीय कवि संगम (मालवा प्रान्त) द्वारा शंकराचार्य जयंती के उपलक्ष्य में प्रांतीय बैठक एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन 25 अप्रेल को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कार्यालय ऋषिनगर में किया जाएगा। इस द्विसत्रीय कार्यक्रम में पहले बैठक फिर काव्य गोष्ठी होगी। राष्ट्रीय मंत्री व मध्यप्रदेश प्रभारी सुमित ओरछा, जन अभियान परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष प्रदीप पांडे, वरिष्ठ कवि एवं सलाहकार देवकृष्ण व्यास व पूर्व निगम सभापति प्रकाश चित्तौड़ा के विशेष आतिथ्य में एवं प्रान्त अध्यक्ष अशोक भाटी, प्रान्त महामंत्री समर्थ भावसार व उज्जैन संभाग प्रमुख राहुल शर्मा के संयोजन में कार्यक्रम आयोजित होगा। जिसमें मालवा प्रान्त की कार्यकारिणी सदस्य, प्रान्त के सोलह जिले के अध्यक्ष व महामंत्री एवं विशेष आमंत्रित सदस्य आमंत्रित हैं। बैठक में काव्यात्मक कार्यक्रम के आयोजन पर चर्चाएं होगी। यह जानकारी उज्जैन जिला इकाई के अध्यक्ष शुभम शर्मा ने दी।
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शंकराचार्य से जुड़ी खास बातें...
धर्माधिकारी पं. नारायण उपाध्याय ने बताया कि गुरु शंकराचार्य ने मात्र 12 वर्ष की उम्र में शास्त्रों का अध्ययन कर लिया था। 16 वर्ष की उम्र में 100 से अधिक ग्रंथों की रचना की थी। अपनी मां की आज्ञा पाकर वैराग्य धारण कर लिया था। हिंदू धर्म को प्रसारित और प्रचारित करने के लिए देश के चारों कौनों में मठों की स्थापना की थी, जिसे वर्तमान में शंकराचार्य पीठ के रूप में जाना जाता है। गुरु शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की अवस्था में केदारनाथ में समाधि ले ली थी।
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महाकाल मंदिर में है आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा
महाकाल मंदिर में 84 महादेव में से एक चंद्र आदित्येश्वर महादेव सभा मंडप में स्थित है। इस मंदिर के भीतर आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा भी है। पुजारी संजय गुरु के अनुसार 1980 में यह प्रतिमा कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयंत सरस्वती ने स्थापित की थी। उनका मानना था कि आद्य शंकराचार्य ढाई हजार साल पहले जब उज्जैन आए थे तब महाकाल दर्शन के बाद इसी मंदिर में आराधना की थी। इसलिए मंदिर में आद्य शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित की गई।
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उज्जैन में कापालिकों से किया था शास्त्रार्थ
विक्रमादित्य शोध पीठ के पूर्व निदेशक डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित के अनुसार आद्य शंकराचार्य ने ओंकारेश्वर में दीक्षा ली और महेश्वर आए, यहां मंडन मिश्र और उनकी पत्नी भारती के साथ उनका शास्त्रार्थ हुआ। जिसमें शंकराचार्य ने विजय हासिल की। इसके बाद वे उज्जैन आए थे। यहां महाकालेश्वर के दर्शन किए थे। तब उज्जैन में कापालिकों का वर्चस्व था। कापालिकों के साथ उनका शास्त्रार्थ हुआ और उन्होंने कापालिकों को भी परास्त किया था। प्राचीन शास्त्र शंकर दिग्विजय में उज्जैन की इन घटनाओं का विस्तृत उल्लेख मिलता है।
Published on:
25 Apr 2023 05:27 pm
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