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महाकाल बनेंगे दूल्हा : हल्दी, केसर, चंदन, उबटन, इत्र, औषधि व फलों के रसों से होगा प्रतिदिन स्नान

महोत्सव के पहले दिन से बाबा महाकाल को दूल्हा बनाया जाता है। बाबा नौ दिन तक दूल्हे के रूप में दर्शन देते हैं।

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उज्जैन. ज्योतिर्लिंग श्रीमहाकालेश्वर मंदिर में शिवरात्रि पर्व की तैयारी शुरू हो गई है। 24 फरवरी से शिव नवरात्रि पर्व शुरू होगा। देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में सिर्फ महाकाल में ही यह उत्सव मनाए जाने की परंपरा रही है। यह उत्सव नौ दिन तक मनाया जाता है। इन नौ दिनों में भगवान महाकाल दूल्हा स्वरूप में दर्शन देंगे। प्रतिदिन उन्हें हल्दी, केसर, चंदन, उबटन, इत्र, औषधि व अनेक प्रकार के फलों के रसों से स्नान कराया जाएगा।

महाकाल और माता पार्वती के विवाह का उत्सव
मंदिर के आशीष पुजारी ने बताया कि 24 फरवरी से 4 मार्च तक पूरे नौ दिन भूतभावन बाबा महाकाल और माता पार्वती के विवाह का उत्सव होता है। शिव नवरात्रि के नौ दिन महाकाल को हल्दी, केसर, चंदन, उबटन, इत्र, औषधि व फलों के रसों से स्नान कराया जाता है। महोत्सव के पहले दिन से बाबा महाकाल को दूल्हा बनाया जाता है। बाबा नौ दिन तक दूल्हे के रूप में दर्शन देते हैं। शृंगारित वस्त्र एवं आभूषण धारण कराने के बाद पूजन-अर्चन किया जाता है।

प्रतिदिन होंगे ये शृंगार
नौ दिनों तक शिव नवरात्रि के दौरान बाबा महाकाल के उन स्वरूपों के दर्शन होंगे, जो श्रावण-भादौ मास में सवारियों के दौरान नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इनमें शेषनाग शृंगार, घटाटोप शृंगार, छबीना शृंगार, होलकर शृंगार, मनमहेश शृंगार, उमा-मनमहेश शृंगार, शिवतांडव शृंगार, महाशिवरात्रि शृंगार, सप्तधान शृंगार आदि शामिल हैं। नौवें दिन शिवरात्रि की महापूजा होती है। महाशिवरात्रि के अगले दिन भगवान महाकाल का सवा क्विंटल फूलों से बना पुष्प मुकुट धारण कराया जाता है।

शिवरात्रि पर यहां से लगना होगा लाइन में
प्रशासक अवधेश शर्मा ने बताया कि शिवरात्रि पर्व की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। सभी प्रभारियों को व्यवस्था संबंधित निर्देश दिए हैं। पेयजल, स्वास्थ्य व सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहेगी। जूता स्टैंड, खोया-पाया केंद्र व लॉकर रूम के साथ ही प्रसाद व 251 की रसीद वाले काउंटर भी रहेंगे। सहा. प्रशासनिक अधिकारी मूलचंद जूनवाल ने बताया कि शिवरात्रि पर महाकाल दर्शन करने वाले आम दर्शनार्थियों को करीब दो घंटे बैरिकेड्स में बिताना होंगे। माधव सेवा न्यास परिसर में झिगझेग बैरिकेड्स लगाए जाएंगे। यहां से आम दर्शनार्थी लाइन में लगेंगे। इससे होते हुए वे मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से होकर फेसिलिटी सेंटर पहुंचेंगे, जहां फिर बैरिकेड्स से होते हुए मंदिर के अंदर परिसर तक पहुंचेंगे। यहां से वे नंदी हॉल के पीछे कार्तिकेय और गणेश मंडपम पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शनों का लाभ ले सकेंगे।

चार प्रहर पूजा, सतत खुले रहेंगे पट
सहायक प्रशासनिक अधिकारी दिलीप गरुड़ के अनुसार शिवरात्रि के दौरान मंदिर के पट सतत खुले रहेंगे, वहीं चार प्रहर पूजा-अर्चना का दौर चलेगा। 3 मार्च को रात 11 बजे शयन आरती के बाद पट बंद होंगे। इसके बाद 4 मार्च को सुबह भस्मार्ती से लगातार दिनभर जल चढ़ाया जाएगा, जो शाम तक चलेगा। शयन आरती के बाद पट बंद नहीं होंगे, बल्कि रात १२ बजे बाद सेहरे की तैयारी शुरू होगी। 5 मार्च को सुबह 10 बजे तक सेहरे के दर्शन होंगे। सेहरा उतरने के बाद दोपहर १२ बजे होने वाली भस्म आरती की तैयारी शुरू होगी। इस दौरान दर्शन व्यवस्था चलायमान रहेगी।