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दोस्त हो तो ऐसे: दोस्त के जाने के बाद भी नहीं जाने दी दोस्ती…

फ्रेंडशिप-डे आज: शहर में हैं दोस्ती की कई मिसाल, कुछ ने साथ छूटने के बाद नहीं छोड़ा दोस्ती का हाथ,

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उज्जैन. दोस्ती के रिश्ते को उम्र और जीवन-मुत्यू के दायरे में बांधकर नहीं रखा जा सकता। यह एसा रिश्ता है जो न सिर्फ दोस्त के रहने के साथ, बल्कि उसके न होने के बाद भी कायम रहता है। तभी तो दोस्त के चले जाने के बाद भी दोस्ती के अफसाने नहीं जाते। इस पर भी बात जब उज्जैन जैसी उस पौराणिक नगरी में हो जो भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की दोस्ती का साक्षी रह चुकी है, इस नि:स्वार्थ रिश्ते के ढेरों अफसाने स्वत: ही बन जाते हैं।

दोस्ती के महत्व को समर्पित अगस्त का पहले रविवार

दोस्ती के महत्व को समर्पित अगस्त का पहले रविवार को फ्रेंडशिप-डे के रूप में मनाया जाता है। वैसे तो अमूमन हर व्यक्ति के जीवन में कुछ दोस्त एसे आते हैं जो न सिर्फ उनकी जिंदगी की दिशा बदलते बल्कि कभी न भूल पाने वाला रिश्ता भी देते हैं। लेकिन कुछ दोस्ती एसी भी बनती है जो दूसरों के लिए मिसाल कायम कर देती है। शहर में भी एसी दोस्ती की कई मिसाल हैं। इनमें कुछ दोस्त एसे हैं जिन्होंने जीवन-मृत्यू के शाश्वत सत्य के कारण भौतिक रूप से तो दोस्त को खोया लेकिन आत्मीय रूप से उसका साथ आज भी बना हुआ है। यह एसे दोस्त हैं जिन्होंने अपने दोस्त की मृत्यू के बाद भी उसके नाम को जिंदा रखा है। फ्रेंडशिप-डे पर एक रिपोर्ट-

दोनों ने हंसी को अभियान बनाया, साथ छूटने पर भी अभियान जिंदा

शैलेंद्र व्यास स्वामी मुस्कुराके और हास्य कवि ओम व्यास ओम। दो एसे नाम जो न शहरवासियों के लिए अनजान है और न इनकी दोस्ती किसी परिचय की के लिए आश्रित। समान स्वभाव, समान सोच और दूसरों को चेहरे पर हंसी देने का समान अभियान। यही खूबी वर्ष 1989 में मिले इन दोस्तों की दोस्ती को प्रगाड़ करती गई, सामंजस्य इतना कि शब्दों की जगह आंख और चेहरे के भावों ने ले ली। लेकिन एक एेसा समय आया जब हंसाने वाली एक शख्सीयत हमेशा के लिए मौन हो गई। सड़क हादसे में 8 जुलाई 2009 को ओम व्यास ओम का निधन हो गया।

भरे गले से शैलेन्द्र व्यास बताते हैं, उनकी (स्व. ओम व्यास ओम) दोस्ती गहरी अपील कर गई थी, उनकी दोस्ती में समर्पण, मोहब्बत थी। जब उन्हें चिता दी जा रही थी, तब मैंने तीन प्रण किए। पहला, शहर में पं. व्यास के नाम का स्मारक बने जो नगर निगम के सहयोग से पूरा हो सका। दूसरा प्रण, स्मारिका का प्रकाशन हो। आर्थिक तंगाई में भी वर्ष 2015 में हास्यमेव जयते नाम से स्मारिका प्रकाशित की। तीसरा प्रण, मां पर लिखी पं. व्यास की कविता पाठ्यक्रम में शामिल हो। यह प्रण अभी अधूरा है लेकिन प्रयास जारी हैं। वे कहते हैं, दोस्त चोर होता है जो आंखों से आंसू चेहरे से परेशानी और दिल से मायूसी, जिंदगी से दर्द और बस चले तो हाथों की लकीरों से मौत तक चुरा लेता है।

दोस्त की याद में हर वर्ष होती है म्युजिकल नाइट

दोस्त के नहीं होने पर भी उसके नाम, सपने और शोक को जिंदा रखने वाली दोस्ती की एसी ही एक कहानी गीतकार दिवंगत पराग कुलश्रेष्ठ और उनके दोस्तों की है। पराग, कपिल यार्दे व अन्य दोस्त वर्ष 1995 में म्यूजिक क्लास में आने के कारण दोस्त बने। गीत-संगीत के प्रति इन दोस्तों के प्रेम ने दोस्ती को भी मजबूत किया। गुरु के सानिन्ध्य में रिद्म ग्रुप के नाम से दोस्तों ने मिलकर शहर में म्यूजिकल प्रोग्राम्स किए लेकिन पूरे ग्रुप के वर्ष 1999 में पूरे ग्रुप के लिए एक एसा समाचार आया जिसने सभी को दहला दिया। कपिल यार्दे बताते हैं कि 31 मई को पता चला कि साहेबखेड़ी तालाब में डूबने से पराग की मृत्यू हो गई है। यह सभी के लिए अविश्सनीय था इसलिए भी था क्योंकि पराग सिर्फ अच्छे गायक नहीं अच्छे तैराक भी थे। पराग के हमेशा के लिए जाने से उनकी मधुर आवाज भी ग्रुप का साथ छोड़कर चली गई लेकिन कपिल यार्दे और ग्रुप ने उनके सपने, शोक व नाम को मिटने नहीं दिया। पराग की स्मृति में प्रतिवर्ष रिद्म ग्रुप द्वारा आरडी बरमन म्युजिकल नाइट का आयोजन किया जाता है। यह कार्यक्रम स्व. पराग और उनकी दोस्ती को पूरी तरह समप्रित रहता है।