कोरोना को खत्म करने के लिए यहां हुई विशेष पूजा, माता को चढ़ाई गई मदिरा

उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह और एसपी मनोज सिंह ने चौबीस खंबा माता मंदिर में माता महामाया व महालया को मदिरा अर्पित की।

By: Faiz

Published: 14 Jun 2020, 12:33 AM IST

उज्जैन/ कोरोना वायरस दुनियाभर में तेजी से अपने पाव पसार रहा है। एक तरफ जहां भारत समेत दुनियाभर में संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए इसका वैक्सीन बनाने पर शौध किया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ विशेष प्रार्थनाएं करके भी लोग इस संक्रमण से निजात पाने की भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। इसी के चलते मध्य प्रदेश के उज्जैन जिला कलेक्टर आशीष सिंह और एसपी मनोज सिंह ने चौबीस खंबा माता मंदिर में माता महामाया व महालया को मदिरा अर्पित की।

 

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इतिहास में पहली बार अन्य दिनों में हुई ये पूजा

इसके बाद कलेक्टर और एसपी के साथ चलने वाले दल ने नगर के विभिन्न कोनों पर स्थित 40 से अधिक देवी व भैरव मंदिरों में पूजा के लिए रवाना हुआ। शहर में 27 किलोमीटर लंबे मार्ग पर मंदिरा की धार लगाने का क्रम भी शुरू हुआ। रात 8 बजे गढ़कालिका क्षेत्र स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर में नगर पूजा का समापन होगा। बता दें कि, नगर की खुशहाली, सुख-समृद्धि और रोग निवारण के लिए हर साल शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर और 12 वर्ष में एक बार सिंहस्थ महापर्व के पहले नगर पूजा का विधान होता है। हालांकि, ये पहली बार है जब किसी महामारी से बचने के लिए अन्य दिनों में इस विशेष पूजा को किया गया है।

 

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नियमों का पालन, घंटियां उतारी

नगर पूजन के दौरान शारीरिक ‌दूरी आदि नियमों का पालन भी देखने को मिला। पूजन से पहले ही मंदिर में लगी सभी घंटियां उतरवा दी गई थीं, ताकि नियम के अनुसार संक्रमण से रोकथाम की जा सके। दल में शामिल सदस्य भी मास्क आदि लगाए नज़र आए।

 

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अतृप्तों को तृप्ति मिलती है

परंपरा अनुसार, नगर पूजा के दौरान 27 कि.मी रास्तों पर मदिरा की धार लगाई जाती है। कोटवारों का दल तांबे के पात्र में मदिरा भरकर धार लगाते हुए चलता है। रास्तेभर मदिरा के साथ पूड़ी, भजिए आदि सामग्री भी अर्पित की जाती है। इसे बड़बाकुल कहा जाता है। मान्यता है इससे अतृप्तों को तृप्ति मिलती है और वे प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि व आरोग्यता का आशीर्वाद देते हैं। हरसिद्धि मंदिर में दोपहर 12 बजे शासकीय पूजा शक्तिपीठ हरसिद्धि में देवी की सात्विक पूजा की जाती है। जब भी नगर पूजा होती है कलेक्टर दोपहर 12 बजे हरसिद्घि मंदिर में अलग से पूजन करने जाते हैं। माता हरसिद्धि को सौभाग्य सामग्री, चुनरी तथा नैवेद्य अर्पित किया जाता है।

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