
मित्रता दिवस आज: इनकी दोस्ती है दूसरों के लिए मिसाल, किसी की यारी में धर्म दीवार नहीं बना तो किसी ने छुड़ाई नशे की आदत
मैं एक ही वक्त में खुदा और दोस्त ढंूढने निकला। सोचा खुदा अगर पहले मिल गया तो उसके साथ मिलकर दोस्त को ढंूढ लूंगा!
हुआ ये कि दोस्त पहले मिल गया और खुदा को ढूंढने की जरूरत ही नहीं रही। (खलील-उर-रहमान)
उज्जैन. यह दोस्ती की नि:स्वार्थता की ताकत है, जो दोस्त को ऐसे ओहदे दिलाती है। इस बात को वे बखूबी समझते हैं, जिन्होंने जीवन में दोस्ती की दौलत पाई है। जब तक यह धन है, कोई दोस्त खुशी, मदद, भरोसा, रौनक और हिम्मत से गरीब नहीं हो सकता। रविवार को वल्र्ड फ्रेंडशिप डे है, जीवन में दोस्तों की अहमियत बताने वाला दिन। भगवान कृष्ण-सुदामा की दोस्ती की साक्षी इस धार्मिक नगरी के साथ आसपास के शहरों में ऐसे दोस्ती के ऐसे कई किस्से हैं जो दूसरों के मिसाल बन रहे हैं। किसी की दोस्ती धार्मिक अंतर से परे है तो किसी ने दोस्त को नशे से दूर किया। एक विशेष रिपोर्ट-
नारायणा: भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की दोस्ती को समर्पित स्थल
मित्रता का साक्षी है यह मंदिर। भागवत पुराण के दसवें स्कंद में इसका प्रमाण मिलता है। यहां भगवान श्रीकृष्ण की अनेक लीलाओं में से एक महत्वपूर्ण कहानी भी जुड़ी है। इस स्थान से एक किलोमीटर दूरी पर स्वर्ण गिरी पर्वत है। जहां कृष्ण-सुदामा ने गुरुमाता की आज्ञा से लकडिय़ां चुनी थीं। कृष्ण-सुदामा ने एक रात यहां विश्राम किया था। सुदामा की प्यास बुझाने के लिए श्रीकृष्ण ने भूमि से मिट्टी हटाई थी, वहां से जल निकला था, जिसे आज दामोदर कुंड के नाम से जाना जाता है। गुरु सांदीपनि ने भगवान कृष्ण को इसी स्थान पर नारायण की उपमा दी थी, इसी वजह से इस स्थान का नाम नारायणा पड़ा। यह स्थान ऊंच-नीच के भेदभाव से दूर होकर नर-नारायण की मित्रता का जीवंत प्रमाण है।
उज्जैन से 35 किमी दूर नारायणा ग्राम
उज्जैन से 35 किमी दूर आगर रोड पर जैथल से एक रास्ता नारायणा गांव की ओर जाता है, जहां दो दोस्तों का अनूठा मंदिर है, जिसे कृष्ण-सुदामा धाम के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर अतिप्राचीन है।
कृष्ण-सुदामा की दुर्लभ प्रतिमाएं
फ्रेंडशिप डे पर जहां लोग प्रिय मित्रों को फ्रेंडशिप बेल्ट बांधेंगे, उपहार देंगे या अन्य तरीके से इस दिन को सेलिब्रेट करेंगे। मंदिरों के शहर में एक मंदिर दो दोस्तों के नाम पर है, जहां कृष्ण-सुदामा की दुर्लभ प्रतिमाएं मौजूद हैं। यहां के पुजारी का कहना है, विश्वभर में इनके मंदिर कम ही है। यह मंदिर दोस्ती के नाम पर मिसाल है। सालभर में करीब दो लाख श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जन्माष्टमी उत्सव रक्षाबंधन से आरंभ हो जाता है।
ये है पौराणिक कहानी : सांदीपनि आश्रम से गए थे लकड़ी बीनने
पुजारी अंबाराम शर्मा के अनुसार महर्षि सांदीपनि का आश्रम उज्जैन के मंगलनाथ रोड पर है, जहां द्वापर युग में भगवान कृष्ण और सुदामा ने शिक्षा ग्रहण की। गुरुकुल में अध्ययनरत हर छात्र गुरुमाता की आज्ञा से बारी-बारी लकडिय़ां चुनने जंगल जाते थे। माता की आज्ञा से एक दिन कृष्ण-सुदामा भी लकडिय़ां बीनने जंगल गए। दोनों लकडिय़ां चुनते-चुनते दूर तक चले गए। रात हो गई, बारिश होने लगी। दोनों ने रात पेड़ पर चढ़कर गुजारी और चुनी हुई लकडिय़ों को अलग-अलग जगहों पर रख दिया। लकडिय़ों के ग_र पानी के कारण भारी हो गए, जिन्हें वे वहीं छोड़कर आश्रम लौट आए। कृष्ण-सुदामा द्वारा रखे गए वे लकडिय़ों के ग_र आज पेड़ों के झुरमुट के रूप में नजर आते हैं। इसी स्थान पर दामोदर कुंड भी है।
दोस्त की याद में... ग्रुप बना कर रहे जागरूक, कहते हैं वाहन धीमे चलाएं
उज्जैन. सड़क हादसे में जान गंवा युवक की याद को उसके दोस्त सोशल मीडिया पर ताजा रख रहे हैं। दोस्तों ने इंस्टाग्राम पर ग्रुप बनाकर दोस्त की याद में दंगल का आयोजन किया, सावन में सेवा कार्य तो 15 अगस्त को नगर में तिरंगा यात्रा निकालेंगे। बजरंग कॉलोनी तराना निवासी शुभम प्रजापति (28) की 12 अप्रेल 2023 को कानीपुरा-रुदाहेड़ा मार्ग पर सड़क हादसे में मौत हो गई थी। शुभम के दोस्त विनय सोलंकी ने बताया, शुभम नगर में सबका चहेता था और लोगों की मदद करता था। उसके होने का अहसास बना रहे, इसलिए इंस्टाग्राम पर 'संस्था शुभम एमपी 13' ग्रुप बनाकर उसकी याद में आयोजन कर ग्रुप में शेयर करते हैं। शुभम का एमपी 13 के नाम से कैफे था, इसलिए उस नाम से ग्रुप बनाया है। विनय ने बताया, 8 मई 2023 को दंगल का आयोजन किया था। सावन में हर सोमवार को बाबा की सवारी का स्वागत कर सेवा कर रहे हंै। 15 अगस्त को नगर में एक भव्य तिरंगा यात्रा निकालेंगे तो गणेश स्थापना कार्यक्रम पर उसकी याद में किया जाएगा। विनय ने बताया, दोस्तों में आकाश बोडाना, निक्की राठौर, अजीत जाट, कुणाल माली, शुभाष प्रजापत, हरीश परिहार, आकाश खंडेलवाल, आशीष देवड़ा, शुभम बंसल, अनिरुद्ध नागर, निमिश राठौर, अर्पित बेकरिया, अनुज बेकरिया, यश मूंडड़ा, सचिन पाटीदार, शिवम जायसवाल, विशाल राठौर, जतिन सोलंकी, समेत 25-30 से लोग जुड़े है हर आयोजन में हम सभी का सहयोग रहता है। विनय ने बताया, शुभम की मौत सड़क हादसे में हुई थी। ग्रुप की मदद से हम युवा पीढ़ी, वाहन चालकों को यह सीख देना चाहते थे कि आप किसी घर का चिराग है, इसलिए वाहन को धीरे चलाएं, हेलमेट पहनें, नियमों का पालन करें और जागरूक करें।
नौ दोस्तों का अनूठा दोस्ती क्लब
मिसाल...दोस्ती ऐसी कि 'काबिलÓ बन गए दोस्त
रुनीजा. ऐसा दोस्ती क्लब है जहां सभी बचपन के दोस्त हैं, जो बरसों से एक दूसरे के सुख दुख में साथ देते आ रहे हैं।
ऐसे ही 9 दोस्तों का एक क्लब है जो मित्रता की मिसाल है। इसमें जगदीश धाकड़ कावरिया किसान और शिक्षक हैं। प्रकाश खटोलिया, गोपाल कृष्ण दुबे सरस्वती स्कूल में सेवारत हैं। सुरेश पाटीदार व महेश पाटीदार सफल किसान हैं। सुनील पाटीदार रतलाम में वकालात कर रहे हैं। और नंदकिशोर धाकड़ खेल और युवा कल्याण विभाग में कार्यरत हैं। जो बचपन के दोस्त हैं। साथ ही इस क्लब में घनश्याम नाथ योगी, राजेंद्र नाथ योगी भी हैं। ये सारे दोस्त गांव में जरूरतमंदों की मदद करते हैं। ऐसे निभाई सभी ने दोस्ती...
दोस्तों की वजह से वकील हैं: इस क्लब के सदस्य सुनील पाटीदार की आर्थिक स्तिथि अच्छी नहीं थी। इसलिए 10वीं के बाद के बाद छोड़ दी। सभी मित्रो नें मिलकर पढ़ाई के लिए मजबूर किया तो पाटीदार ने फिर से पढ़ाई की और सबके सहयोग से आज वकील बन चुके हैं।
आत्मनिर्भर बनाया: गोपाल दुबे के पास 14,15 बीघा जमीन होने के बाद भी जमीन में पानी नहीं होने के कारण आर्थिक तंगी रहती थी तो सुनील पाटीदार नें दोस्ती निभाते हुए अपने यहां से गोपाल के खेत में फसलों नि:शुल्क पानी पिलाते है जिससे गोपाल की आत्म निर्भरता बढ़ी।
नशे की लत दूर करवाई: महेश पाटीदार नशा करने लगे थे, जिसके कारण आए दिन विवाद करते थे। तब सभी मित्रों ने महेश की नशा छुड़वाने का प्रण लिया। महेश को सीहोर नशा मुक्ति केंद्र मे छ: महीने के लिए भर्ती करवाया। परिणाम यह हुआ की महेश आज नशीली चीजों से दूर होकर दोस्ती क्लब मे शामिल हैं।
कबड्डी टीम बना गांव का नाम रोशन किया : सभी दोस्तों मजाक मजाक में कबड्डी की टीम बना कर संतोष स्पोर्ट्स कब्बडी दल बनाया, जिसमें निर्मलनाथ योगी कोच के मार्गदर्शन में राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय स्तर तक अपने गांव का नाम रोशन किया। जब नंदकिशोर धाकड़ के पिताजी का निधन हुआ तो सभी मित्रो नें कार्यक्रम में आर्थिक सहयोग दिया।
आज भी गरीब खिलाडिय़ों को जगदीश धाकड़ प्रकाश खटोलिया राजेंद्र नाथ सुरेश पाटीदार घनश्याम नाथ खिलाडिय़ों को किट किराया और अन्य सहयोग हर समय करते रहते हैं। शमशान मे दोस्ती क्लब नें वृक्षा रोपण किया तो जगदीश धाकड़ ने पौधों को पानी पिलाने देने के लिए ड्रीप भेंट की।
शाजापुर में मिसाल बने हुए हैं मनोज रिणवा और जहिर खान बिट्टा
दो दिल एक जान...धर्म जुदा लेकिन दोस्ती का कोई मजहब नहीं होता...
शाजापुर. आज दोस्ती दिवस है। ऐसे दोस्त जो हमेशा हर सुख-दु:ख में एक दूसरे के साथ खड़े रहे। धर्म अलग-अलग होने के बाद भी एक दूसरे से अपनों से ज्यादा जुड़े हुए हैं। शहर में आज भी जब दोस्ती की मिसाल दी जाती है, तो मनोज रिणवा (45) और जहिर खान बिट्टा (44) का नाम प्रमुख रूप से सामने आता है।
प्रॉपर्टी डीलर दिव्यांग जहिर खान बिट्टा एवं दस्तावेज लेखक का कार्य करने वाले मनोज रिणवा ने बताया कि वर्ष 1986 में कक्षा पहली में धानमंडी स्थित रामजी बा की पाठशाला तोड़ा क्रमांक-2 में हम दोनों की दोस्ती हुई। 35 वर्ष बाद ये दोस्ती आज भी बनी हुई है। दोनों ने बताया कि कई बार शहर में कई तरह के तनाव भी देखे, लेकिन हमारे बीच कभी विवाद या मनमुटाव की स्थिति नहीं बनी। दोनों दोस्तों ने स्कूल के समय का किस्सा याद करते हुए कहा कि कक्षा 5वीं में जब होमवर्क नहीं किया तो स्कूल में सजा मिलती थी। इसके डर से दोनों भागकर अपने पसंदीदा अभिनेता अमिताभ बच्चन की फिल्म देखने टॉकिज चले गए थे। वहां से जब घर पहुंचे तो दोनों की एक साथ परिजन ने पिटाई भी लगाई थी। कई बार लोगों ने हमारी दोस्ती के बीच दरार भी डालने का प्रयास किया, लेकिन कोई सफल नहीं हो पाया। किसी भी आयोजन में जाने पर दोनों एक ही थाली में भोजन करते हैं। शहर में इन्हें जय-वीरू की जोड़ी भी कहा जाता है।
Published on:
06 Aug 2023 06:55 pm
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