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भावांतर योजना में किसानों की मुसीबत

भावांतर योजना में किसानों की मुसीबत सोसायटी की ओर से किए गए पंजीयन से शुरू हुई है। इमसें किसानों के सही नाम दर्ज नहीं है तो बैंक की जानकारी पूरी नहीं

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जितेंद्र सिंह चौहान@उज्जैन. भावांतर योजना में किसानों की मुसीबत सोसायटी की ओर से किए गए पंजीयन से शुरू हुई है। इमसें किसानों के सही नाम दर्ज नहीं है तो बैंक की जानकारी पूरी नहीं भरी है। वहीं फसल बेचने के बाद मंडी प्रशासन दस्तावेजों की सोसायटी स्तर पर से दोबारा जांच करवा रहा है। इधर, बैंक में किसानों की जो रिपोर्ट जा रही है उसमें भी खामियां होने से बैंक भुगतान के प्रकरण लौटा रही है। स्थिति यह है कि किसानों के भुगतान के दस्तावेज दो से तीन जगह घूम रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से भी भावांतर की राशि अब तक जारी नहीं की गई है।

भावांतर में फसल बेचकर फंसे
भावांतर योजना में फसल बेचने पर किसान खुद का ठगा महसूस कर रहे है। योजना के तहत उन्होंने सस्ते दामों में फसल यह सोचकर बेची कि बाकी राशि जल्द मिल जाएगी। डेढ़ महीने में भी यह राशि नहीं मिल पाई। वर्तमान में सोयाबीन की भाव ३२०० से ३००० के बीच चल रहे हैं। किसानों के मुताबिक सीधे उपज बेच देते तो पूरी राशि मिल जाती। न बैंक के चक्कर लगाने पड़ते और न ही दस्तावेज देने पड़ते।

१५ नवंबर को फसल बेची थी, अब तक नहीं मिली राशि
घट्टिया तहसील के ग्राम खलाना (भैरुगढ़) के किसान मनोहरसिंह ने १५ नंवबर को ४.१६ क्विंटल सोयाबीन बेची थी। उन्हें २६१६ रुपए प्रति क्विंटल का दाम मिला। उन्हें अंतर ४३४ रुपए के हिसाब से करीब १८ हजार रुपए की राशि चाहिए। किसान मनोहरसिंह के मुताबिक उन्हें अभी तक यह राशि नहीं मिली है। वहीं बैंक भी बताने को तैयार नहीं है कब तक राशि मिलेगी। इनके गांव के आसपास के ३५० किसान रोजान भैरवगढ़ बैंक के चक्कर लगा रहे हैं।

भुगतान का एसएमएस आ रहा, लेकिन बैंक में राशि नहीं
ग्राम बदरखां के रफीक पटेल ने १३ नवंबर को १५.५० क्विंटल सोयाबीन २६२० रुपए के भाव में भावांतर में बेची थी। उन्हें अंतर के ५७९७ रुपए मिलने का एसएमएस १३ दिसंबर को मिला। जब वे इस एसएमएस को लेकर बैंक पहुंचे तो पता चला कि अभी खाते में राशि ही नहीं आई। वे एसएमएस के बाद दो बार बैंक जा चुके हैं हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी। किसान रफीक के मुताबिक उनके परिवार के तीन-चार खातों में अब तक अंतर की राशि नहीं आई।

भावांतर योजना किसानों के लिए मुसीबत साबित हुई है। डेढ़ महीने बाद भी किसानों को उनकी उपज के दाम नहीं मिले। सरकार को राशि देना थी तो समर्थन मूल्य तय करके देते। शासन एक ओर एकात्म यात्रा में करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है वहीं किसानों को देने के लिए राशि नहीं है।
भरत पोरवाल, उपाध्यक्ष, जिला पंचायत

जिन किसानों ने १ नवंबर के बाद से भावांतर में उपज बेची है उनका भुगतान नहीं हुआ है। अभी भोपाल से ही राशि नहीं आई है। सोसायटी से पंजीयन में खामी, आईएफसी कोड व अन्य दिक्कतों के चलते दस्तावेजों की जांच करवा रहे हैं। करीब ५० हजार किसानों को राशि देना बाकी है। हम कोशिश कर रहे हैं जल्द से जल्द किसानों का बकाया दे दें।
बहादुरसिंह बोरमुंडला, अध्यक्ष, कृषि उपज मंडी

भावांतर योजना के अंतर की राशि भोपाल से मिलना है। जल्द ही राशि जारी हो जाएगी।
संकेत भोंडवे, कलेक्टर