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ये गांव की आंगनवाड़ी, किसी प्ले स्कूल से कम नहीं

अफसरों ने आंगनवाड़ियों को गोद लेकर बदली सूरत, बच्चों को बैठने के लिए कुर्सी, खेल उपकरण व टीवी भी लगाया

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Anganwadi

उज्जैन. तस्वीर देखकर प्ले स्कूल जैसी लग रही यह बिल्डिग आंगनवाड़ी की है। इसे देखकर आपके मन में भी आंगनवाड़ियों के लिए बनी छवि बदल गई होगी। जीं हां यह आंगनवाड़ी उज्जैन जिले के एक गांव की है जिसे अधिकारियों ने गोद लेकर इसकी सूरत बदल दी है। इसमें बच्चों के बैठने के लिए चेयर हैं दीवालों पर रंग रोगन के साथ बच्चों को सिखाने खेल उपकरण व टीवी भी लगाया गया है।

कहते हैं कि सरकारी स्कूलों में यदि अफसरों के बच्चे भर्ती होने लगे तो वह स्कूल किसी निजी स्कूल से कमतर नहीं होंगे। कुछ ऐसा ही उज्जैन ग्रामीण क्षेत्र की आंगनवाड़ियों के साथ हुआ है। सरकारी अफसरों द्वारा आंगनवाड़ियों को गोद लेने की योजना शुरू हुई तो इनकी कायापलट ही हो गई। इन आंगनवाडियों में अफसरों ने अपने प्रयास और जनता से सहयोग लेकर वह तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवा दी, जो किसी निजी स्कूलों में हुआ करती है। वर्तमान में यह आंगनवाड़ियां ऐसी दिखाई दे रही है मानो कोई प्ले स्कूल है।

जिले में आंगनवाड़ियों को दशा सुधारने के लिए पिछले एक साल से सरकारी प्रयास शुरू किए गए हैं। आंगनवाड़ियां अफसरों को गोद दी गई है। ताकि यहां कि व्यवस्था बेहतर हो सके। लिहाजा अफसर इन आंगनवाड़ियों का दौरा कर रहे हैं, यहां जो कमियां हैं, उन्हें ठीक कराने के जतन कर रहे हैं। इसके लिए आम लोगों से भी सहयोग प्राप्त कर रहे हैं। यही वजह रही कि उज्जैन ग्रामीण अनुभाग की 184 में से करीब 90 आंगनवाड़ियों की दशा ही सुधर गई है। सबसे पहले आंगनवाड़ी भवनों को रंगाई-पुताई कर इन्हें बच्चों के माहौल के अनुरूप तैयार किया। इसके बाद पढ़ने के लिए कुर्सियां, किताबें, खेलने के उपकरण उपलब्ध करवाए गए। वहीं बच्चों के भोजन के लिए बर्तन, इन्हें रखने के लिए रेक तथा अलमारी तक उपलब्ध करवाई गई है। कुछ जगह तो एलइडी टीवी भी लगाए गए हैं। लिहाजा अब यह आंगनवाड़ी न होकर किसी निजी स्कूल की प्री-नर्सरी या प्ले स्कूल की तरह दिखाई दे रही हैं।

उज्जैन ग्रामीण तहसील की आंगनवाड़ियों में अफसरों ने करीब 5.27 लाख रुपए खर्च कर 36 से अधिक सामान उपलब्ध करवाए हैं। इसमें 2.13 लाख की 1067 छोटी कुर्सियां, 34960 रुपए के 184 स्टेडीयोमीटर, 65 हजार से रंगाई पुताई के अलावा साल्टर मशीन, बर्तन, कारपेट, जूता व बर्तन स्टैंड, ड्राइंग बुक, पेंसिल, टीवी, पर्दे सहित 36 से अधिक सामान दिए जा चुके हैं। आंगनवाड़ियों के लिए यह राशि अधिकारियों ने अपने खर्च के अलावा अन्य लोगों से भी मदद के रूप में ली है।

उज्जैन ग्रामीण एसडीएम, गोविंद दुबे ने बताया कि तहसील की 184 आंगनवाड़ियों को गोद लेकर उनमें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे हैं। 90 के करीब आंगनवाड़ियों में सभी सुविधाएं उपलब्ध करवा दी हैं। यहां पर बच्चों के बैठने के लिए कुर्सी, खेल उपकरण, किताबे, टीवी, बर्तन उपलब्ध करवा दिए हैं। आंगनवाड़ियों का रंग-रोगन के बाद यह किसी प्ले स्कूल की तरह भी दिखाई दे रही है। आम लोग भी इन्हें सुधारने में मदद कर सकते हैं।

आंगनवाड़ियों की दशा सुधारने के लिए जिलेभर की आंगनवाड़ियों को गोद ली गई है। इनकी जिम्मेदारी कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को दे रखी है। वहीं जनप्रतिनिधि भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। आंगनवाड़ियों को बेहतर करने के लिए आम लोग भी सहयोग कर सकते हैं। जन्मदिन, पुण्यतिथि या अन्य किसी आयोजन पर बच्चों के लिए सामग्री गिफ्ट कर सकते हैं।