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गोवर्धन सागर को संवारने बनाई थी यूडीए ने योजना..ऐसा हो गया हश्र

सागर की भूमि सर्वे क्र्रमांक 1181/1/1 सहित करीब 8 हेक्टयर भूमि का गजट नोटिफिकेशन जारी कर अधिग्रहण की थी तैयारी, कानूनी दांव-पेंच और अफसरों की ढीलपोल से योजना क्रियान्वित नहीं हो सकी

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UDA had made a plan to beautify Govardhan Sagar.. it became a fate.

सागर की भूमि सर्वे क्र्रमांक 1181/1/1 सहित करीब 8 हेक्टयर भूमि का गजट नोटिफिकेशन जारी कर अधिग्रहण की थी तैयारी, कानूनी दांव-पेंच और अफसरों की ढीलपोल से योजना क्रियान्वित नहीं हो सकी

उज्जैन। सप्त सागरों में से एक पवित्र गोवर्धन सागर की जमीन पर जिस तरह श्री भानुशील गृह निर्माण संस्था सहित अन्य लोग अपना दावा कर रहे हैं, वह ३५ साल पहले ही खत्म हो सकता था। यदि उस समय उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा बनाई गई गोवर्धन सागर विकास योजना आकार लेती। यूडीए ने वर्ष १९८८ में सागर की ८ हेक्टयर भूमि (सागर सहित ) अधिग्रहण को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। इसमें धारा धारा ५० (२), ५० (३), ५० (४) व ५० (७) के तहत कार्रवाई की जा चुकी थी। जमीन अधिग्रहण किया जाना था लेकिन जमीन को लेकर कानूनी विवाद व अफसरों की ढीलपोल के कारण योजना अमल में नहीं ला पाई। स्थिति यह थी कि उस समय प्राधिकरण ने श्री भानुशील गृह निर्माण संस्था की आपत्तियों को अमान्य कर दिया था और संस्था के कॉलोनी के भूमि परिवर्तन के लिए मांगे गए तत्कालीन एसडीएम के अभिमत को भी यह कहकर मना कर दिया था यह जमीन योजना की है भूमि व्यर्तन की अनुमति नहीं दी जाए। स्थिति यह रही कि प्राधिकरण को सागर की जमीन भू-अर्जन को लेकर प्रशासनिक अनुमतियां नहीं मिल पाई और योजना कागजों में ही खत्म हो गई।
कलेक्टर सिंघल ने दोबारा योजना बनाने के दिए थे निर्देश
गोवर्धन सागर विकास योजना को प्राधिकरण ने १९८८ में बनाया था लेकिन यह आगे नहीं बढ़ पाई और जमीन विवाद के चलते इसे डीनोटिफिकेशन की कवायद की गई थी। २० मई १९९० को तत्कालीन कलेक्टर जीपी सिंघल ने यूडीए के तत्कालीन सीइओ जेएन महाडिक को पत्र लिखकर योजना को दोबारा से शुरू करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था सूखे के दौरान सागर में पानी शेष है। पर्यावरण की दृष्टि से इसका सुधार किया जाना आवश्यक है। गोवर्धन सागर में आ रही समस्त भूमि का अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार कर सरोवर एवं उसके आसपास के स्थल सुंदर व मनोरंजक बनाए। इसके लिए एप्को की मदद भी ली जाए। इसी के बाद प्राधिकरण ने दोबारा से योजना बनाई थी लेकिन यह पूर्ण नहीं हो पाई।
इन सर्वे नंबर की जमीन होना थी अधिग्रहित
गोवर्धन सागर विकास योजना के तहत जारी नोटिफिकेशन में सागर की भूमि सर्वे क्रमांक १११६, १११७, ११३०, १२८०, ११३४/१/३ का भाग, १२७९ का भाग, १२८१/१/१ क, १२८१/१/१ ख, १२८१/१/१ ग, १२८१/१/१घ, १२८१/१/१ च, १२८१/१/१ छ, १२८१/१/२ , १३१२/१ का भाग व ११३० को शामिल किया था। बता दें कि हाल ही में कोर्ट में सर्वे नंबर १२८१ और उसके हिस्से को तालाब की भूमि मानकर सरकारी घोषित किया है।
८.५० लाख रुपए से चार चरणों में होना था सागर का विकास
प्राधिकरण द्वारा बनाई गई विकास योजना में सागर के चारो तरफ घाट का निर्माण, कम्युनिटी हॉल, शॉपिंग कॉम्पलेक्स, मोटेल तथा खाली जमीन पर आवासीय भूखंड निकाले जाने थे। इसके लिए प्राधिकरण ने एप्को (पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन) से ८.६३ लाख रुपए का प्रस्ताव भी स्वीकृत करवाया था। चार चरणों में सागर का विकास होना था। बाद में इस योजना में बदलाव करते हुए आवासीय योजना का ड्राप कर दिया था। यह भी स्पष्ट किया गया था कि सागर के धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसका विकास किया जाएगा।
इनका कहना
गोवर्धन सागर की विकास योजना तत्कालीन बोर्ड द्वारा बनाई गई थी। योजन में जमीन अधिग्रहण के लिए गजट नोटिफिकेशन तक हो गया था। जमीन विवाद व अन्य वजह से यह आकार नहीं ले पाई।
- शरद बर्वे, संपदा अधिकारी, यूडीए