
Ujjain Khade Hanumanji idol: खड़े हनुमानजी' की मूर्ति की IIT इंदौर ने की जांच (फोटो सोर्स- Patrika)
Ujjain Khade Hanumanji Mandir IIT Indore: एमपी की धार्मिक नगरी उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए खड़े हनुमानजी के मंदिर का ढांचा तोड़े जाने के बाद प्रतिमा को लेकर उठे विवाद में अब प्रशासन ने अपना रुख स्पष्ट किया है। मंदिर विस्थापन के मामले में बड़ी संख्या में आमजन के सामने आने के बाद प्रशासन ने कहा है कि सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना कोई निर्णय या कदम नहीं उठाया जाएगा।
प्रशासन ने आइआइटी इंदौर की टीम को बुलाकर वैज्ञानिक परीक्षण कराया। टीम ने मंगलवार को विशेष उपकरणों से प्रतिमा की जमीन में गहराई और आसपास की संरचना की जानकारी जुटाई। अब विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिमा करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है। वहीं, श्रद्धालु इसे आस्था का विषय मानते हुए यथास्थान संरक्षण की मांग कर रहे हैं। संत समाज, कांग्रेस तथा विश्व हिंदू परिषद-बजरंग दल ने भी प्रशासन से प्रतिमा और प्राचीन स्थान को सुरक्षित रखने की मांग की है।
आइआइटी इंदौर (IIT Indore) की टीम ने मंगलवार को करीब दो घंटे तक मंदिर परिसर में जांच की। विशेष उपकरणों से प्रतिमा की जमीन में गहराई, आसपास की संरचना और संभावित आधार की जानकारी जुटाई गई। प्रशासन यह पता लगा रहा है कि प्रतिमा के नीचे क्या है और उसे बिना नुकसान पहुंचाए हटाना संभव है या नहीं। नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के अनुसार रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया और तारीख तय होगी। विशेषज्ञों की राय आने तक आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. रमण सोलंकी के अनुसार खड़े हनुमान की प्रतिमा करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है। उन्होंने बताया कि पुराने समय में बड़ी प्रतिमाओं को इंटरलॉक तकनीक से स्थापित किया जाता था। इस प्रतिमा के भी इसी तकनीक से स्थापित होने की संभावना है। उनके अनुसार प्रतिमा मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर की है। परमार वंश और राजा भोज के समय इस तरह के पत्थरों पर कलाकृतियां बनाने की परंपरा रही है। लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने के कारण इसकी मूल बनावट और भाव-भंगिमा स्पष्ट दिखाई नहीं देती।
खड़े हनुमान मंदिर को लेकर संत समाज ने भी प्रशासन से प्रतिमा के संरक्षण की मांग की है। बुधवार शाम संत समाज के प्रतिनिधि गोपाल मंदिर से पैदल मार्च करते हुए मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने हनुमानजी की आरती-पूजन किया और समाजजनों से चर्चा की। संतों ने कहा कि यह स्थान लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। इसलिए प्रतिमा को हटाने से पहले उसके धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखा जाना चाहिए। संत समाज ने प्रशासन से प्राचीन स्थान को सुरक्षित रखने तथा श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करने का आह़्वान किया है।
सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रतिमा हटाने की योजना के विरोध में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। विधायक महेश परमार, पूर्व विधायक दिलीप गुर्जर और शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी सहित सैकड़ों नेता व कार्यकर्ता राम धुन गाते हुए मंदिर पहुंचे। कांग्रेस कार्यालय से कंठाल होते हुए निकले मार्च में भगवा ध्वज और ढोल-धमाके भी शामिल रहे। मंदिर पहुंचकर नेताओं ने पूजन किया, श्रीफल भेंट किया और सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया। विधायक ने प्रशासन से जनभावना के अनुरूप निर्णय लेने का आग्रह किया। श्रद्धालुओं ने भी प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग दोहराई।
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता महाकाल नीलकंठ द्वार पर एकत्रित हुए और पैदल यात्रा करते हुए खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे। मालवा प्रांत संगठन मंत्री खगेंद्र भार्गव, प्रांत मंत्री विनोद शर्मा, प्रांत संयोजक नितिन पाटीदार और जिला अध्यक्ष राजेश आंजना सहित पदाधिकारियों ने दर्शन कर प्रशासन के सामने अपनी मांग रखी। संगठन ने कहा कि खड़े हनुमान का प्राचीन स्थान वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसे नए तीर्थ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। संत समाज से भी संरक्षण के लिए सहयोग और मार्गदर्शन का आह्वान किया गया।
बुधवार को दिनभर में हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। शाम 7 बजे संत समाज की उपस्थिति में भव्य महाआरती हुई उसके बाद सभी को हनुमान अंश फिल्म भी दिखाई गई। इसके अलावा आचार्य शेखर महाराज ने बताया आगामी तीन चार दिनों के कार्यक्रम भी तय कर लिए गए है जनमें भजन संध्या, महाआरती और भंडारे का आयोजन शामिल है। उन्होंने मंदिर को विराजित रखने की मांग भी दोहराई।
मंदिर विस्थापन के मामले में बड़ी संख्या में आमजन के सामने आने के बाद प्रशासन भी अब एक तरफा कदम नहीं उठाएगा। कुछ दिनों से इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बचा जा रहा था। बुधवार को एसडीएम एलएन गर्ग ने प्रशासन का रूख स्पष्ठ करते हुआ कहा कि सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना कोई भी निर्णय या कदम नहीं उठाया जाएगा।
एसडीएम गर्ग ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के विकास कार्य भी आवश्यक हैं और उज्जैन की धार्मिक आस्था भी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विशेषज्ञों, संत समाज और श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ समाधान निकाला जाएगा। यह श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ा विषय है। साथ ही प्रतिमा की संरचनात्मक स्थिति का वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक है। खड़े हनुमानजी की प्रतिमा से जुड़ा विषय उज्जैनवासियों और श्रद्धालुओं की आस्था से संबंधित है।
प्रशासन के लिए श्रद्धालुओं की भावना, प्रतिमा की सुरक्षा व उज्जैन की धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत सर्वोपरि है। खड़े हनुमानजी से संबंधित विषय में प्रशासन सभी श्रद्धालुओं एवं नागरिकों की भावनाओं और आस्था का पूर्ण सम्मान करता है। विशेषज्ञों की वैज्ञानिक, तकनीकी राय प्राप्त किए बिना प्रतिमा के विस्थापन के लिए आगे की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा प्रतिमा की संरचना का परीक्षण किया जाएगा। सिंहस्थ 2028 के विकास कार्य महत्वपूर्ण हैं, साथ ही उज्जैन की आस्था और विरासत का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
एसडीएम गर्ग ने प्रतिमा विस्थापन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। गर्ग ने बताया, सोशल मीडिया पर खबर प्रसारित की जा रही है कि प्रशासन द्वारा श्री खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को विस्थापित करने के कई प्रयास किए जा चुके है। यह भ्रामक जानकारी है क्योंकि अभी तक प्रतिमा को विस्थापित या हटाने संबंधी कोई भी प्रयास किसी भी मशीन अथवा मानवीय युक्तियों से नहीं किया गया है।
खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन का मामला अब उज्जैन की सीमाओं से बाहर निकलकर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर लगातार प्रसारित हो रही रील्स, वीडियो और पोस्ट के माध्यम से मंदिर से जुड़ा घटनाक्रम देश के कोने-कोने तक पहुंच रहा है। भजन गायक कन्हैया मित्तल और पुण्डरीक गोस्वामी सहित देश के कई चर्चित सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी यह मामला उठाया जा चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियो और पोस्ट की कुल पहुंच अब तक करीब 5 करोड़ (50 मिलियन) तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। इससे खड़े हनुमान मंदिर का मामला स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
मंगलवार को आइआइटी इंदौर की टीम को बुलाया गया था। टीम ने विशेष उपकरणों से प्रतिमा की गहराई और आसपास की संरचना की जांच की है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया और तारीख तय होगी। प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने की संभावना भी रिपोर्ट के आधार पर देखी जाएगी। - अभिलाष मिश्रा, नगर निगम आयुक्त
जनता की धार्मिक भावना का सम्मान हो और बाबा का मंदिर यहीं रहे। निगम आयुक्त, एसपी, कलेक्टर और संभाग आयुक्त सहित सभी नौसिखिया अधिकारी कम से कम एक बार हनुमान अंश फिल्म देखें। जब जब धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है वहां नाश हुआ है। बुद्धिमानी रख जनता की चाह अनुसार ही आगे की कार्रवाई हो।-महेश परमार, विधायक
Updated on:
10 Sept 2026 12:26 pm
Published on:
10 Sept 2026 12:26 pm
