
Temple,Mangalnath temple,shipra river ujjain,navagraha,Skanda Puran,
उज्जैन. मंदिरों की राजधानी उज्जैन में एक मंदिर है भगवान मंगलनाथ का। यह मंगल ग्रह का जन्म स्थल भी माना जाता है, यहां प्रतिदिन और खासकर मंगलवार तथा भौम प्रदोष पर भातपूजा व गुलाल पूजा का विशेष महत्व है। इस मंदिर के प्रांगण में भूमि माता की प्रतिमा भी स्थापित है। कहा जाता है कि मंगल देव की माता भूमि ही हैं। यह मंदिर शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर शिप्रा नदी के किनारे स्थित है।
स्कंध पुराण में मिलता है वर्णन
स्कंध पुराण के अनुसार नवग्रहों में से एक मंगल ग्रह का जन्म स्थान अवंतिका उज्जैन है, जो कि वर्तमान समय में मंगलनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। पुराण के अनुसार उज्जैन में अंधकासुर नामक दैत्य ने भगवान शिव की तपस्या से वरदान प्राप्त किया था कि मेरा रक्त भूमि पर गिरे तो मेरे जैसे अनेक राक्षस उत्पन्न हों। भगवान शिव से अंधकासुर ने वरदान प्राप्त कर पृथ्वी पर त्राहि-त्राहि मचा दी..सभी देवता, ऋषियों, मुनियों और मनुष्यों का वध करना शुरू कर दिया। सभी देवगण, ऋषि-मुनि आदि शिव के पास गए और प्रार्थना की कि आपने अंधकासुर को जो वरदान दिया है, उसका निवारण करें। शिव ने स्वयं अंधकासुर से युद्ध करने का निर्णय लिया। शिव और अंधकासुर के बीच भीषण युद्ध कई वर्षों तक चला।
शिव के पसीने की बूंद पृथ्वी पर गिरी, तो प्रकटे मंगलनाथ
युद्ध करते समय शिव के पसीने की बून्द भूमि के गर्भ पर गिरी, उससे मंगलनाथ की शिव पिंडी रूप में उत्पत्ति हुई। युद्ध के समय शिव का शस्त्र अंधकासुर को लगा, तब जो रक्त की बूंदें आकाश से भूमि के गर्भ पर शिव पुत्र भगवान मंगल पर गिरने लगीं, तो मंगल अंगार (लाल) स्वरूप के हो गए। अंगार स्वरूप होने से रक्त की बूंदें भस्म हो गईं और शिव द्वारा अंधकासुर का वध हो गया। शिव मंगलनाथ से प्रसन्न होकर 21 भागों के अधिपति एवं नवग्रहों में से एक ग्रह की उपाधि प्रदान की।
इसलिए होती है यहां गुलाल और भात पूजा
शिव पुत्र मंगल उग्र अंगारक स्वभाव के हो गए। तब ब्रम्हाजी, ऋषियों, मुनियों, देवताओं एवं मनुष्यों ने सर्वप्रथम मंगल की उग्रता की शांति के लिए दही और भात का लेपन किया, उससे मंगल ग्रह की उग्रता की शान्ति हुई।
जीवन में ग्रहों का विशेष महत्व
जीवन में ग्रहों का बहुत महत्व है। जन्म से ही मनुष्य ग्रहों के अधीन रहता है। ग्रहों के आधार पर ही मनुष्य अपने कार्य करता है। मंगल ग्रह अंगारक एवं कुंजनाम से भी जाने जाते हैं, मेष एवं वृश्चिक राशि के स्वामी हैं। मंगल ग्रह का वर्ण लाल है। इनके इष्ट देव भगवान शिव हैं। नवग्रह में मंगल ग्रह सेनापति के पद पर विद्यमान है। मंगल का वाहन मेंढ़ा (भेड़) है।
Published on:
10 Apr 2018 12:56 pm
बड़ी खबरें
View Allउज्जैन
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
