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उज्जैन में जलसंकट की आहट..गंभीर डैम में 100 दिन का पानी शेष

19 मार्च 2022को गंभीर डैम का लेवल 1183.46 एमसीएफटी है। इसमें 150 एमसीएफटी डेड स्टोरेेज छोड़ दें तो महज 100 दिनों का पानी शेष है। यदि बारिश समय पर नहीं होती है तो जलसंकट की नौबत बन सकती है।

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Water crisis in Ujjain.. 100 days of water left in Gambhir Dam

19 मार्च 2022को गंभीर डैम का लेवल 1183.46 एमसीएफटी है। इसमें 150 एमसीएफटी डेड स्टोरेेज छोड़ दें तो महज 100 दिनों का पानी शेष है। यदि बारिश समय पर नहीं होती है तो जलसंकट की नौबत बन सकती है।

उज्जैन। तेजी से बढ़ते शहर के लिए अब हर वर्ष जलसंकट की आहट होने लगी है। पिछले सालों में ऐसा कोई वर्ष नहीं बीता कि गंभीर डैम सूखा नहीं हो और बारिश के इंतजार में उसके भराने के लेकर हफ्तों तक धुकधुकी न बनी हो। पिछले वर्ष भी गंभीर डैम बमुश्किल से भरा पाया था और जलसंकट की आशंका गहराने लगी थी। एनवक्त पर बारिश होने से गहराते जलसंकट से निजात मिल गई थी। इस वर्ष भी गंभीर डैम में पानी तेजी से कम हो रहा है। वर्तमान में गंभीर का लेवर ११८३.४६ एससीएफटी है। अभी प्रतिदिन १० से १२ एमसीएफटी पानी की खपत हो रही है। इस पानी से अप्रैल, मई और जून मध्य तक पेयजल आपूर्ति हो सकते है लेकिन जुलाई आते-आते स्थिति बिगड़ सकती है। चूंकि इस वर्ष गर्मी ज्यादा पडऩा है ऐसे में पानी का वाष्पीकरण और ज्यादा खपत के चलते डैम से पानी तेजी से खत्म होगा। अगर यही स्थिति रही और बारिश देर से हुई तो शहर में एक दिन छोड़कर जलप्रदाय की नौबत भी बन सकती है। लिहाजा अभी समय है कि पेजयल मितव्ययिता के साथ अन्य विकल्पों पर ध्यान दें।
पांच दिनों में गभीर का जलस्तर
दिनंाक लेवल
१५ मार्च १२२६.९४
१६ मार्च १२१६.५९
१७ मार्च १२०७.४९
१८ मार्च ११९५.४७
१९ मार्च ११८३.४६

पेयजल के इन विकल्पों पर नहीं ध्यान
विकल्प एक- सेंवरखेड़ी डैम पर नहीं लग पाई मुहर
क्षिप्रा नदी पर सेंवरखेड़ी डैम बनाने की योजना ९ वर्ष से अटकी पड़ी है। पिछले वर्ष ही सेंवरखेड़ी डैम को बनाने को लेकर फिर से कवायद शुरू हुई। सांसद अनिल फिरोजिया ने इसके लिए प्रस्ताव बनाने को कहा था। जलसंसाधन विभाग की और से सेंवरखेड़ी डैम बनाने के लिए सर्वे किया करीब ४५० करोड़ रुपए से डैम बनाने का प्रस्ताव तैयार कर भोपाल भेजा है । लेकिन लागत अधिक होने के कारण इस पर अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। यह डैम बनने से ११०० एमसीएफटी पानी की अतिरिक्त व्यवस्था हो जाएगी।
डैम बनने से यह होगा फायदा
- क्षिप्रा का हर वर्ष व्यर्थ बहने वाले पानी संग्रहित हो सकेगा।
- डैम बनने से क्षिप्रा में सालभर पानी छोड़ा जा सकेगा। नदी के रास्ते पानी आने से किसी तरह के संसाधन या बिजली का उपयोग नहीं होगा।
- डैम में ११०० एमसीएफटी पानी संग्रहि होने से साल के आठ महीने तक जलप्रदाय किया जा सकेगा।
- डैम बनने से क्षेत्र में सिंचाई का रकबा बढ़ेगा।
- डैम बनने से इंदौर रोड व विक्रम उद्योग पुरी के लिए भी अतिरिक्त पानी का इंतजाम हो सकेगा।

विकल्प दो- नर्मदा पाइप लाइन को गंभीर से नहीं जोड़ पाए
शहर में जलप्रदाय का मुख्य स्रोत गंभीर डैम है। हर वर्ष गर्मी आते-आते इसमें पानी कम हो जाता है। यदि गंभीर डैम तक नर्मदा का पानी पहुंचाने की व्यवस्था होती तो इस परेशानी से निपटा जा सकता है। चूंकि नर्मदा की पाइप लाइन शनि मंदिर तक आई है। इस पाइप लाइन को १८-२० किमी बढ़ाकर गंभीर डैम से जोड़ा जा सकता है। इससे जब भी गंभीर के सूखने पर पानी की आवश्यकता रहेगी, पाइप लाइन के माध्यम से नर्मदा जल से आपूर्ति की जा सकेगी। इसको लेकर सर्वे शुरू होने की कवायद भी हुई थी लेकिन परिणाम सामने नहीं आया।
यह होगा फायदा
- गंभीर डैम के सूखने की स्थिति में पानी की वैकल्पिक व्यवस्था का स्थाई समाधान हो सकेगा।
- गंभीर डैम में पानी छोड़े जाने से स्टोरेज किया जा सकेगा। वर्तमान में क्षिप्रा में पानी छोडऩे से आगे बह जाता है।
- गंभीर डैम में नर्मदा का पानी होने से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति होगी। जबकि क्षिप्रा में गंदगी होने के कारण पानी पूरी तरह साफ नहीं होता है।
- गंभीर डैम में अतिरिक्त पानी होने की सुविधा से शहर के विभिन्न क्षेत्रों तक जलप्रदाय में आसानी होगी।
- गंभीर डैम में नर्मदा जल का सदुपयोग हो सकेगा।

बढ़ती आबादी और उद्योगों के लिए चाहिए भरपूर पानी
शहर में पानी की व्यवस्था महज पेजयल ही नहीं बल्की विकास के मायने के लिए भी महत्वपूर्ण है। स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे शहर में प्रतिदिन जलप्रदाय होना है, इसके लिए घरों में फिर से पानी की मीटर लगने की योजना है। वहीं अब शहर में उद्योगों की आमद हो रही है। ऐसे में पानी की आवश्यकता पहले से ज्यादा होना है। यदि क्षिप्रा नदी पर डैम जैसे प्र्रोजेक्ट आकार लेते हैं तो बढ़ती आबादी के मान से न केवल पेयजल की समस्या खत्म होगी बल्की उद्योगों के लिए भी पानी मिलेगा। वहीं सेंवरखेड़ी डैम बनने से सिंहस्थ के दौरान व अन्य त्योहार पर क्षिप्रा नदी को प्रवाहमान किया जा सकता है। क्षिप्रा में पानी होने से भूजल स्तर में सुधार होगा और इससे सिंचाई के रकबे में भी बढ़ोतरी होगी।
उज्जैन शहर एक नजर में
गंभीर डैम क्षमता- २२५० एमसीएफटी
शहर आबादी- ७.५० लाख
पेयजल स्त्रोत- ०२
औद्योगिक क्षेत्र- ०३
प्रतिदिन खपत- १० से १२ एमसीएफटी

इनका कहना
शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए बड़े अन्य विकल्प पर विचार जरुरी है। इससे पहले हमें शहर में मौजूद जलसंरचना सप्तसागर, कुएं, बावड़ी को संरक्षित करने की आवश्यकता है। इनमें इतना पानी है कि इससे भूजल स्तर बेहतर रहता है और गर्मी में भी पानी की आपूर्ति हो सकती है। व्यक्तिगत स्तर पर भी हमें घरों पर हार्वेस्टिंग, पानी की व्यर्थ बर्बादी पर रोक लगाना चाहिए। इन बिंदुओं पर काम कर लिया तो काफी हद तक हम जलसंकट की समस्या से निजात पा सकते हैं।
- राजीव पाहवा, पर्यावरणवीद