उज्जैन. गर्मी के दिनों में जहां नदियों में पानी कम हो जाता है या सूख जाता है, वहीं विलुप्त हो चुकी चंद्रभागा नदी में फिर से जल प्रवाहित हुआ है। नदी में घुटनों तक पानी एकत्र हो गया है। नदी में यह पानी धरमबड़ला से सदावल की ओर तीन-चार जगह पानी निकला है। ऐसे में उम्मीद बनी है कि अगले सालों में नदी में स्टॉप डैम व गहरीकरण पूरे होने से नदी पुन: प्रवाहमान हो सकेगी।
आश्चर्य..20 फीट गहराई में ही पानी
चंद्रभागा नदी में निकला पानी इसके जीवित नदी होने का प्रमाण बता रहा है। आश्चर्य है कि यहां 20 फीट गहरी खुदाई में ही नदी में पानी निकल गया, जबकि आसपास के बोरिंगों में 100 फीट खुदाई पर पानी निकलता है। खुदाई के दौरान नदी में मिट्टी की परत हटाई तो चूना, रेत निकली है। जो बता रहे हैं कि प्राचीन समय में नदी प्रवाहमान थी और रेत थी।
जलधारा प्रकट होने पर होगा श्रमदान
चंद्रभागा नदी में जलधारा प्रकट होने पर रविवार को नदी पूजन एवं चुनरी अर्पण का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।शिप्रा नदी संरक्षण अभियान के पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि रविवार सुबह ७ से ९ बजे तक मुरलीपुरा बडनग़र रोड से अंबोदिया मार्ग पर होने वाले कार्यक्रम में श्रमदान भी होगा।
पुण्य सलिला शिप्रा की सहायक चंद्रभागा 10 किमी क्षेत्र में प्रवाहमान थी।
5 किमी क्षेत्र में चंद्रभागा को पुनर्जीवित करने का कार्य हो चुका है।
महज 20 फीट पर पानी निकला और रेत के अवशेष भी मिल रहे हैं।
10 किमी लंबी नदी में 5 किमी खुदाई
चंद्रभागा नदी करीब 10 किमी लंबी है। यह धरमबड़ला से मुरलीपुरा और सदावल होती हुई सोमवती कुंड के यहां मिलती है। चंद्रभागा नदी के पुन: उद्धार के लिए शिप्रा नदी संरक्षण अभियान के तहत पिछले दो वर्ष से गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। पिछले वर्ष 5 किमी तक काम किया जा चुका था। इस वर्ष 5 किमी आगे गहरीकरण किया जा रहा है।
नदी में २० फीट पर पानी निकल आया
&चंद्रभागा नदी गहरीकरण में महज 20 फीट में ही पानी निकल आया है। नदी में कुछ जगह घुटनों तक पानी जमा है। अगले रविवार को श्रमदान के दौरान गांववालों के साथ नदी पूजा-अर्चना कर चुनरी औढ़ाई जाएगी।
सोनू गेहलोत, सदस्य, शिप्रा नदी संरक्षण अभियान