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स्वाइल हेल्थ कार्ड से वंचित 13 हजार किसान

मिट्टी परीक्षण में हो रही लापरवाही

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13 thousand farmers deprived of swine health card

13 thousand farmers deprived of swine health card

उमरिया. मिट्टी परीक्षण के लिए जिले मे एकमात्र प्रयोग शाला है। उसका भी समुचित रूप से संचालन नहीं होता है। उसमें अक्सर ताला बंद रहता है। प्रयोगशाला के कर्मचारी नदारद रहते हैं। बताया जाता है कि कर्मचारी संविदा वाले हैं और वह हड़ताल पर हैं। यही नहीं यहां इससे पहले भी अक्सर यही स्थिति देखी जाती रही है। किसान कोसों दूर से नमूना लेकर आता है और इधर-उधर भटक कर लौट जाता है।
जिले में किसानों की संख्या 88 हजार से भी अधिक है, इनके स्वायल हेल्थ कार्ड निर्माण के लिए वर्ष 2017-18 के लिए 45590 का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन अभी तक कुल 32946 कार्ड ही बन पाए हैं। 12654 किसान अभी भी शेष हैं। जबकि मार्च माह भी समाप्त है और अप्रैल माह चल रहा है। मिट्टी परीक्षण की स्थिति यह है कि जिले में अभी तक केवल जिला मुख्यालय कृषि मण्डी में ही परीक्षण होता है। जहां जिले भर के किसान अपनी मिट्टी के नमूने लाते हैं। जबकि ब्लाक स्तर पर यह सुविधा गत वर्ष से चालू होनी थी। यह सुविधा अभी तक शुरू नहीं हुई है। गौरतलब है कि जिले में कृषि उत्पादन बढ़ाने शासन द्वारा शुरू किया गया मिट्टी परीक्षण व स्वायल हेल्थ कार्ड निर्माण का कार्य मंथर गति से चल रहा है। यह अभियान इसलिए चालू किया गया था कि जिससे किसानों को उनकी भूमि मेें पोषक तत्वों की कमी का पता चल सके और वे उस अनुरूप खाद का उपयोग कर सकें। स्वायल कार्डों में मिट्टी परीक्षण के पश्चात डिटेल दर्ज किया जाता है।
जिले के तीन विकास खण्डों में मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं बनवाई जानी थीं, इनमें मशीनें स्थापित कर मिट्टी नमूनों के पोषक तत्वों की जांच की जानी थी, लेकिन मानपुर, पाली में यह भवन बनकर तैयार हैं उन्हे हैण्डओव्हर नहीं किया गया। इसके अलावा प्रयोगशाला के लिए न तो अमला दिया गया और न मशीने भेजी गईं हैं। केवल भवन बनकर खड़े हैं।
करकेली के लिए कहा गया कि इस विकास खण्ड के किसानों का मिट्टी परीक्षण जिला मुख्यालय में होगा। इसलिए अब यहां 50-60 किलोमीटर दूर से किसान मिट्टी लेकर यहां आने को विवश रहेगा। वर्तमान में तो जिले भर के किसान ही मुख्यालय आते हैं। सिंचाई का साधन नहीं केवल खाद का भरोसा रबी फसल का कुल रकबा जिले में एक लाख 38 हजार हेक्टयर है। इसमें से सिंचित भूमि मात्र 35 हजार हेक्टयर है। इस पर भी नहरों से मात्र 2 हजार हेक्टयर ही सिंचाई होती है। शेष तालाबों, नलकूपों, स्टापडेम व कुंओ आदि से सिंचाई की जाती है। पौधों की वृद्धि और पोषकता के लिए अधिकांश कृषि वर्षा पर ही आधारित है। ऐसे में किसान पैदावार बढ़ाने के लिए केवल खाद को ही सहारा मानता है। किसानों के मध्य खेत पाठशालाएं भी पर्याप्त मात्रा में संचालित नहंी होतीं। जो उन्हे उन्नत खेती के तरीके समझाए।
जिले में कम है जिंक सल्फर
अब तक जांचे गए लगभग 33 हजार नमूनों में से यह तथ्य सामने आया है कि यहां कि जमीन में जिंक सल्फर व पोटास जैसे पोषक तत्वों की कमी है। जिससे पौधों के अंदर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है व उनकी वृद्धि प्रभावित होती है। इसके निदान के लिए पोटासयुक्त खाद का उपयोग किया जाना चाहिए, लेकिन जानकारी के अभाव मेें किसान मनमानी खाद का उपयोग करते हैं। इससे उनका व्यय भी होता है और पर्याप्त लाभ भी नहीं मिल पाता है।
इनका कहना है
मिट्टी के नमूने हर माह औसतन 3 सौ से 4 सौ तक आते हैं। स्वायल हेल्थ निर्माण का कार्य चल रहा है। जल्दी ही किसानों को मिट्टी परीक्षण की सारी सुविधाएं मिलेंगी। विकासखण्डों में सुविधाएं शुरू होंगी।
पवन कुमार कौरव, सहायक संचालक, कृषि, उमरिया।