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15 हफ्ते के पशु बाजार में 40 लाख की उगाही

25 की रसीद देकर 150 की वसूली

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40 lakh collections in 15-week cattle market

40 lakh collections in 15-week cattle market

उमरिया. जिले के जनपद पंचायत मानपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत टिकुरी के ग्राम खेरवा में लगने वाले पशु बाजार में पंचायती टैक्स के नाम पर मनमानी उगाही किये जाने का मामला सामने आया है। जिला ही नही अपितु पूरे संभाग के इकलौते पशु बाजार में खरीददारों से पंचायत के नुमाइंदे जबरन वसूली कर रहे है। बताया जाता है कि संभाग के इस इकलौते विशाल पशु बाजार में दूरदराज के पशु विक्रेता व खरीददार पशुओं को खरीदने-बेचने आते हैं। जहां ग्राम पंचायत टिकुरी के द्वारा कमीशन के रूप में रखे गए कथित कर्मचारी प्रति मवेशी 100 रुपये तो किसी से 150 रुपये की वसूली करते हैं और रसीद के तौर पर मात्र 25 रुपये की रसीद दी जाती है और प्रति पशु के हिसाब से 100 रुपए अपने जेब में रखते है। विदित हो कि संभाग के इस इकलौते पशु बाजार में एक दिन में करीब साढ़े तीन हजार से भी ज्यादा पशुओं की बिक्री की जाती है। जहां एक दिन में ही करीब साढ़े तीन लाख की आमदनी पंचायत को होती है। प्रति वर्ष अप्रैल महीने के अंतिम सप्ताह से लेकर मई जून जुलाई मिलाकर करीब 15 हफ्ते बाजार लगती है। जहां करीब तकरीबन 40 लाख की वसूली की जाती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़ी रकम की उगाही होने के बावजूद भी पंचायत के पास को ठोस लिखापढ़ी के रिकार्ड मौजूद नही हैं। इधर सूत्रों पर यकीन करें तो इस विशाल पशु बाजार में चोरी के कई मवेशियों की खरीद फरोख्त की जाती है। इस संबंध ग्रामीणजन सुरेन्द्र कुमार चतुर्वेदी, तुलसी दास चतुर्वेदी, चिंतामणि विश्वकर्मा व बेड़ी लाल कोल सहित कई लोगों ने पिछले जनसुनवाई के माध्यम से कलेक्टर को शिकायत की थी, जिस पर कलेक्टर के निर्देश पर मामले की जांच के तहसीलदार मानपुर को आदेशित किया गया था। जहां जांच के लिए चिल्हारी वृत्त के नायब तहसीलदार को जांच के लिए भेजा गया था। जहां मामले की शिकायत सही पाए जाने पर कार्यवाही की जानी थी, लेकिन सांठ गांठ से मामले को दबा दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत का सरपंच तो एकमात्र मोहरा है, पंचायत से लेकर अन्य संदिग्ध कार्यों में गांव के ही कथित शिक्षक की भूमिका रहती है अब यह कितना सच है ये तो पुलिसिया जांच में ही सामने आ पायेगा। इधर कृषि कार्य के नाम पर की जा रही पशुओं की बिक्री पर एक खरीददार 100 नग से लेकर 200 नग तक खरीददारी करना भी सवालों के घेरे में है। कहीं ऐसा तो नही कि कृषि कार्य के नाम पर खरीदे जाने वाले पशुओं की कहीं गौमांस के लिए तस्करी तो नही। इस ओर तथाकथित पशु संरक्षकों व संगठनों का ध्यान भी नही है इसकी जांच करा सके। ग्राम खेरवा टिकुरी में लगने वाले इस विशाल पशु बाजार से महज दो किलोमीटर की दूरी पर पुलिस चौकी अमरपुर है, लेकिन पशु बाजार में चल रहे अवैध वसूली और खरीद फरोख्त सहित आपराधिक तत्वों के जमावड़े की बखूबी जानकारी होने के बाद भी कोई कार्यवाही नही की जाती। जनचर्चा है कि पुलिस चौकी के प्रभारी से पशु बाजार संचालकों की गहरी पैठ है। लिहाजा साप्ताहिक पशु बाजार में एक मोटी रकम बतौर संरक्षण के तौर पर वसूली जाती है। सूत्रों ने बताया कि कुछ पुलिस से लेकर जनपद के कुछ अधिकारियों व पदाधिकारियों की मिलीभगत से अवैध वसूली का यह गोरख धंधा बीते कई सालों से जारी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अपेक्षा की है कि मामले की जांच कर दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाए।
अपराधिक तत्वों का जमावड़ा
जनचर्चा है कि इस पशु बाजार में अवैध वसूली जैसे कृत्यों को अंजाम देने में एक शिक्षक की भूमिका प्रमुख तौर पर संदिग्ध रहती है। जिसके इशारों पर बाजार में तकरीबन 15-20 की संख्या में आपराधिक छवि के लोग मौजूद रहते हैं, जो इस अवैध वसूली में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। पशु बाजार में बड़े ठाठ बाठ से दर्जनों की संख्या में बैठे आपराधिक तत्वों और साहबजादो को बखूबी देखा जा सकता है। जो सिर्फ पूरे दिन बैठे रहते है और शाम होते ही अपना हिसाब लेकर चले जाते हैं, मगर उनकी दहशत व्यापारियों में हमेशा बनी रहती है।