
malnourished
उमरिया. प्रदेश के चुनिंदा जिलों में उमरिया शामिल है, जहां केन्द्र सरकार कुपोषण को हटाने के लिए प्रतिबद्ध है। स्नीप परियोजना के अन्तर्गत चयनित उमरिया जिले को चुनने का प्रमुख कारण आदिवासी बहुल होने के साथ एक समय प्रदेश में कुपोषण के मामले में अव्वल होना था। लेकिन इस योजना की मानिटरिंग ठीक से नहीं हो रही है, योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सरकार द्वारा अलग से कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, इसमें लगभग एक दर्जन कर्मचारी कार्यरत है। स्नीप परियोजना का प्रमुख लक्ष्य रियल टाईम मानिटरिंग के साथ जिले के दूर दराज क्षेत्रों में कुपोषण का कलंक झेल रहे बच्चों को जल्द से जल्द सहायता प्रदान कर विभिन्न प्रयासों के माध्यम से कुपोषण को मुक्त करना है, लेकिन जिला समन्वयक और ब्लॉक समन्वयक ग्रामीण अंचलों में नहीं पहुंच रहे हैं।विभाग द्वारा निर्धारित किया गया है कि माह के प्रथम सप्ताह में आंगनबाड़ी में दर्ज सभी बच्चों का वजन लेना है लेकिन देखने में यह आ रहा है कि 50 प्रतिशत से अधिक आगंनबाड़ी केन्द्रों पर समय से बच्चों का वजन दर्ज नहीं हो पा रहा है। कई केन्द्रों पर तो पिछले तीन माह से बच्चों का वजन मोबाइल एप पर दर्ज नहीं किया गया है। इस लापरवाही पूर्वक आचरण की वजह से सरकार द्वारा करोडों रुपये खर्च कर आंगनबाडी केन्द्रों को डिजिटल करने का मिशन फेल होता नजर आ रहा है। सरकार द्वारा स्नीप परियोजना के अंतर्गत जिले एवं और ब्लॉक स्तर पर समन्वयक एवं सहायकों की नियुक्ति की गई है। जिनका प्रमुख कार्य आंगनबाड़ी के मैदानी अमले को मोबाइल का निरंतर का उपयोग करने एवं मोबाइल के माध्यम से प्रतिदिन डाटा भेजने के लिए सक्रिय रखना है। समन्वयकों द्वारा दूर-दराज के आंगनबाड़ी केन्द्रों तक भ्रमण ना करके मुख्य मार्ग पर स्थित आंगनबाडिय़ों में जाकर निरीक्षण की खानापूर्ति की जा रही है। जिसकी वजह से दूर-दराज में स्थित आंगनबाड़ी केन्द्रों की कार्यकर्ताओं द्वारा समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं करवायी जा रही है। जिले की कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकार द्वारा प्रदत्त मोबाइल में विभिन्न प्रकार की तकनीकि समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा मोबाइल प्रदाता कंपनी के साथ एक वर्ष तक मुफ्त सर्विस देने का करार भी किया गया है, लेकिन जिले में कई मोबाइलों में समस्या आने के बाद भी स्नीप के जिला समन्वयक द्वारा कोई भी मोबाइल कंपनी के सर्विस सेंटर पर नहीं भेजा गया है। इस लापरवाही की वजह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को डाटा भेजने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास का कहना है कि मानिटरिंग व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। शीघ्र ही खराब मोबाइलों को सर्विस सेंटर पर भेजा जायेगा। कलेक्टर माल सिंह ने कुपोषण की समीक्षा करते हुए बताया कि जिले में लगभग 300 अति कुपोषित बच्चे चिन्हित किए गए है जिन्हें दिसंबर 2018 तक कुपोषण से मुक्त कराया जाएगा, इसके लिए जिला अस्पताल के पोषण पुर्नवास केंद्र में 20 बेड के स्थान पर 40 बेड लगाने , मानपुर, चंदिया एवं पाली में 10-10 बेड में अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कराकर उन्हें सामान्य श्रेणी के बच्चों की तरह लाना हम सबका दायित्व है।

Published on:
13 May 2018 05:07 pm
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