
Do not Stop Shops, Bus Stops
उमरिया/बिरसिंहपुर पाली. 50 हजार की जनसंख्या वाला विश्व प्रसिद्ध माता बिरासिनी का धार्मिक स्थल व विद्युत उत्पादक पाली नगर आज भी सुनियोजित विकास की बाट जोह रहा है। यहां अतिक्रमण के कारण बाजार क्षेत्र व बस्तियों की ओर आने जाने के लिए चौड़ी सडक़ों का अभाव तो है ही आज तक एक बस स्टैण्ड की व्यवस्था नहीं की जा सकी। पांच दशकों से यहां हाइवे मेन रोड पर अघोषित बस स्टैण्ड संचालित हो रहा है। सडक़ों के चौड़ीकरण के लिए जनवरी माह में प्रशासन ने नापजोख कर प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन वह इसके बाद आगे नहीं बढ़ी संभवत: वह ठंडे बस्ते में डाल दी गई। नए बस स्टैण्ड का कार्य भी बंद पड़ा है। मेन रोड पर बसे खड़ी कर सवारियां उतारी चढ़ाई जातीं हैं, जहां कई बार जाम लग जाता है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बाजार क्षेत्र में भी आवाजाही में परेशानी होती है। दुकानदारों ने निर्धारित जमीन से अधिक पर कब्जा कर दुकाने आगे बढ़ा लीं हैं। व्यवस्था के सम्बध में कई बार प्रशासन से मांग की गई थी।
स्थलों का हुआ था चिन्हांकन
नगर की आवागमन व्यवस्था सुधारने प्रशासन ने जनवरी माह में एसडीएम के नेतृत्व में सर्वप्रथम अघोषित बस स्टैंड से सरस्वती शिशु मंदिर तक तथा प्रकाश चौराहा माता के दरबार से नगरपालिका तक सर्वाधिक अतिक्रमण वाले तीन सौ स्थल चयनित किये थे, यहां तहसीलदार, आरआई, पटवारी आदि के अमले ने शासकीय रिकार्ड के आधार पर दुकानों व आवासों की जगह की नाप जोख कर अतिरिक्त भूमि का नक्सा तैयार किया था। इन जमीनों को अतिक्रमण से खाली कराना था। इसके लिये न केवल नोटिस दी गयी, बल्कि लोगों को समझाया भी गया था कि नगर विकास व आवागमन सुरक्षा में सहयोग करें। लेकिन न तो नागरिकों ने स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाये और न प्रशासन ने कार्रवाई की। माना जाता है कि यह कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गयी।
बस स्टैण्ड व्यवस्था में गतिरोध
बताया गया कि बस स्टैण्ड के लिए नगर में कहीं जगह नहीं मिल रही है। पूर्व नगरपालिका परिषद ने जिला कलेक्टर के सहयोग साईं मंदिर के समीप कालरी का भू-खण्ड बस स्टैण्ड के लिए अधिग्रहीत कराया था। जिला प्रशासन के प्रयास से कालरी ने जमीन को जनहित में दान कर दिया था। उस जमीन पर बस स्टैण्ड विकसित करने भूमि का समतलीकरण कराया गया, लेकिन बाद में किन्ही कारणों से कार्य बंद कर दिया गया। वहां की स्थिति भी ज्यों की त्यों है।
नगरपालिका का कार्यकाल समाप्त हो जाने के कारण भी कार्य में विराम लग गया। इस स्थल पर आधुनातन सुविधाओं का बस स्टैण्ड बनाए जाने की योजना थी। जिसमें यात्री प्रतीक्षालय, पेयजल सुविधा, सुलभ कांप्लेक्स, बसों के खड़े होने के खांचे व दूकानों का निर्माण व यात्रियों के लिए कुर्सियों का निर्माण कराया जाना था। पानी निकासी के लिए सीवेज सिस्टम बनवाना था, लेकिन कार्य रुक गया।
मंदिर तक पहुंचना कठिन
बस स्टैण्ड से माता के धाम तक जाने में पूरा बाजार एरिया लगता है। यहां बारहो महीने काफी संख्या में भक्तों की आवाजाही बनी रहती है। लेकिन सडक़ों के दोनों ओर ग्राहकों द्वारा बाइक व अन्य वाहन खड़े कर दिये जाते हैं। जिससे निकलने मेंं परेशानी होती है।
स्थिति यह है कि यहां सडक़ कम अतिक्रमण अधिक दिखलाई पड़ता है। नवरात्र मेले के समय जबकि हजारों की संख्या में रोजाना दर्शनार्थी यहां पहुंचते हैं, तब स्थिति और बिगड़ जाती है। आवाजाही सुविधा के लिए पुलिस तैनात करनी पड़ती है। यहां दुर्घटना का सदैव भय बना रहता है। मेले के समय समाजसेवी नागरिक भी यहां सेवा देते हैं।
इनका कहना है
अतिक्रमण हटाने के लिए पूर्व में उच्च अधिकारियों से चर्चा की जा चुकी है। जिसमें दुकानदारों को नोटिस भी दी गयी थी। जैसा निर्देश होगा उस अनुरूप कदम उठाया जाएगा। आवागमन की सहूलियत के लिए अतिक्रमण हटाना आवश्यक है।
आभा त्रिपाठी, सीएमओ, बिरङ्क्षसहपुर पाली।

Published on:
12 May 2018 05:45 pm
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