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अनुपयोगी साबित हो रहे शौचालय

2012 से 2018 तक शौचालय की राशि का नहीं हुआ भुगतान

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Latrine proven toilets

Latrine proven toilets

उमरिया. जिले को खुले में शौच मुक्त करने के लिए अभियान चला कर नगरीय निकायों और पंचायतों तक राशि का आबंटन देकर प्राथमिकता पर शुरूआत तो हो गई है, लेकिन हर क्षेत्र में बैठे अधिकारी अभियान को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं रख रहे हैं। जिले की जमीनी हकीकत जानने गांवो का दौरा की तो सच्चाई कुछ और नजर आई। सबसे पहले तो जिले के कलेक्टर के पास जन सुनवाई में आये लोगों से मिले। मानपुर जनपद के ग्राम नौगंवा से आये अमित पटेल बताया कि उसने तीन बार आवेदन दिया, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई 2012 से लेकर 2018 तक शौचालय की राशि भुगतान नहीं हो पाई है। जिस मजदूर से काम करवाया है, वो लोग परेशान कर रहे हैं। अब उनका कहां से उनका भुगतान करे। पूरे पंचायत के लोगों को आज तक 1 रुपये भी नहीं मिला। जो शौचालय खुद बनवाए हैं, उसका उपयोग तो कर रहे हैं लेकिन जो पंचायत द्वारा बनवाए गए हैं। उसकी स्थिति बद से बदतर है। आज भी सब लोग बाहर जा रहे हैं। कागज में शौचालय बन गया है, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। वहीं ग्राम महरोई से आये 65 वर्षीय हरिजन बुजुर्ग लखन लाल चौधरी ने बताया कि जो शौचालय बनवाए गए हैं वो गिर रहे हैं, शौचालय में बिरले ईंटे जुड़वा कर बनवाए गए हैं। जाली वाला बना है अभी तक हम लोग उपयोग नहीं कर पाए हैं बाहर जाते हैं। ग्राम महरोई के ही पंचायतों में मेशन का काम करने वाले मिठाई लाल चौधरी ने बताया कि जो शौचालय बने हैं मात्र तीन फुट के गड्ढेे में बने हैं। इसके अलावा जमीनी हकीकत देखने गांव की तरफ चले, वहां क्या स्थिति है सबसे पहले आकाश कोट के ग्राम बाजाकुंड में देखने को मिला है। यहां तो वैसे भी लोग पांच किलो मीटर दूर से पानी लाकर पीते हैं, लेकिन यहां कुछ शौचालय तो बने हैं और कुछ की स्थिति बद से बदतर है। जब यहां की जिम्मेदार आशा कार्यकर्ता इन्द्रा बाई से बात किये तो पता चला कि कुछ शौचालय बने हैं, लेकिन पीने को पानी ही नहीं है। ऐसे में कैसे शौचालय का उपयोग होगा।
इस मामले में कलेक्टर माल सिंह का कहना है कि हमने हर पंचायत के लिए एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, 234 पंचायते हैं 234 पंचायतों के लिए नियुत किया है। इनका हमने ट्रेनिंग लिया है। एक बाहर का जो फीडबैक फाउन्डेशन है। उसके माध्यम से ट्रेनिंग करवा दिया है। हम डेली फालो अप कर रहे हैं। सुबह यहां से अधिकारी जाते है, जन अभियान परिषद् के लोग जाते हैं, हम पूरा प्रयास कर रहे हैं कि जो बनाने के बाद उपयोग नहीं कर रहे हैं अनुपयोगी है उसमें छोटी मोटी कमी है उसको पूरा करके उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ओडीएफ करवाने का लक्ष्य दो अक्टूबर तक का है। शासन स्तर से निर्देश है तो हम भी प्रयास में लगे हैं कि उस अवधि में करवा देंगे। साथ में नगर पालिका भी उसी समय ओडीएफ करवा देंगे।