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दो महीने के लिए लगाई धारा 144

सात जून को रात्रि बारह बजे तक रहेगी निषेधाज्ञा

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Section 144 imposed for two months

Section 144 imposed for two months

उमरिया. कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी माल सिंह द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये सम्पूर्ण जिले में प्रतिबंधात्मक निषेधाज्ञा लागू करने के आदेश जारी किये हैं। यह आदेश 7 अपै्रल अपरान्ह से 7 जून की रात्रि 12 बजे तक प्रभावशील रहेगा। जिले में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 प्रभावशील होने से जिले में कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थल पर आग्नेयास्त्र लेकर नहीं चलेगा, सार्वजनिक रूप से खतरनाक हथियार अथवा पदार्थ लेकर नहीं चलेगा, सार्वजनिक स्थल पर पटाखों का उपयोग नहीं करेगा, जुलूस-रैली अथवा आमसभा सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना आयोजित नहीं की जा सकेगी तथा कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग नहीं करेगा, उपरोक्त अवधि में सोडा वाटर व कांच की बोतलें, ईंटो के टुकड़े, पत्थर एवं एसिड का संग्रहण एवं साथ लेकर चलना वर्जित रहेगा।
यह आदेश मजिस्ट्रेट ड्यिूटी पर पुलिस अधिकारी, कर्मचारी ड्यिूटी पर अन्य लोक सेवक ड्यिूटी पर अन्य व्यक्ति जिनको कलेक्टर द्वारा अधिकृत प्राधिकारी द्वारा अनुमति पत्र दिया गया हो लागू नहीं होगा तथा मृत को श्मशान, कब्रस्तान ले जाने तथा वापसी संबंधी क्रियाकलाप पर, शादी विवाह संबंधी जुलूस या कार्यक्रम पर, निशक्त जनों एवं रोगी व्यक्तियों को चिकित्सा हेतु आने जाने पर, रेल्वे स्टेशन, बस स्टैण्ड, टैक्सी से आने जाने वाले सद्भाविक यात्रियों पर, केवल शैक्षणिक उद्देश्य से शिक्षण संस्थानो में छात्र-छात्राओ के एकत्रित होने व उन्हें लाने ले जाने वाले वाहनों पर लागू नहीं होगा।
कलेक्टर ने जारी आदेश में कहा है कि दो अपै्रल को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के संगठनों द्वारा अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के विरोध में बंद का आव्हान किया गया था। समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया से बंद के आव्हान के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसक घटनाओं की सूचना प्राप्त हुई हैं। हिंसक घटना के दौरान जानमाल की हानि होने की पुष्टि भी हुई है। साथ ही भविष्य में अन्य वर्ग के संगठनों द्वारा बंद के आव्हान के समाचार भी मीडिया के माध्यम से प्रसारित किये जा रहे हैं, जिससे भविष्य में ऐसे आंदोलनों के दौरान हिंसक घटनाओं की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।