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इंजेक्शन लगने के बाद चली गई किशोरी की जान

मना करने पर भी नस में लगाया इंजेक्शन

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The teenager's life after injection

The teenager's life after injection

उमरिया. जिला अस्पताल से चंद कदम की दूरी पर अप्रशिक्षित द्वारा इंजेक्शन लगाने के चंद मिनटों में ही एक किशोरी की जान चली गयी। लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है, बल्कि इसके पहले भी कई ऐसे मरीज इन अप्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों के चक्कर में पडक़र अपनी जान गवां चुके हैं। ऐसा नहीं है कि ऐसे गम्भीर मामलों में प्रशासन ने कार्यवाही नहीं की है। सवाल यह उठता है कि आखिर जिले में प्रशासनिक कार्यवाही के बावजूद कब तक अप्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों के हाथों मरीजों के मौतों का सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा। बताया जाता है कि किशोरी रुचि रैदास पिता सोहन रैदास उम्र 16 वर्ष निवासी लालपुर किसी हृदय सम्बन्धी बीमारी से ग्रसित थी, जिसका उपचार गुजरात के अहमदाबाद में किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से हो रहा था। उसकी माता दुर्गा रैदास ने बताया कि हृदय सम्बन्धी बीमारी के लिए हर 21 दिनों में बेटी को इंजेक्शन लगता था, जो चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार कमर में लगाना होता है। सोमवार की शाम 6.30 बजे बीते 21 दिनों के बाद बेटी को लेकर मुख्यालय के सगरा मार्ग स्थित पैथालॉजिस्ट के पास पहुंची तो वह युवक नहीं था, जो पिछले कई बार इंजेक्शन लगाता था। लोगों के कहने पर बगल में मौजूद दूसरे फार्मासिस्ट के पास गयी और उन्हें उक्त इंजेक्शन लगाने की बात कही। हृदय सम्बन्धी उक्त इंजेक्शन को युवक ने कमर में न लगाकर हाथ की नस में लगाने का प्रयास किया। जिसके विरोध स्वरूप हमने कई बार मना किया और कहा कि यह इंजेक्शन कमर में लगता है, पर युवक ने बात नहीं मानी और कुछ न होने की बात कहकर बेटी के हाथ की नस में ही इंजेक्शन लगा दिया। माता दुर्गा ने बताया कि इंजेक्शन लगते ही उनकी बेटी तत्काल अचेत हो गयी और वही नीचे गिर गयी। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो घटना के बाद आनन फानन में किशोरी को जिला अस्पताल लाया गया, जहां ड्यूटी पर तैनात डॉ. प्रमोद द्विवेदी ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल में मचा कोहराम
घटना के बाद से ही अस्पताल में भारी गहमागहमी रही। मृत किशोरी के पिता सोहन रैदास के आंखों से बह रहे अविरल आंसू फर्जी तरीके से जिले में चल रहे फार्मासिस्ट दुकानों को स्वास्थ्य विभाग की स्वीकारोक्ति एवं लापरवाह रवैये को बयान कर रहे थे। घटना के कई घण्टे बाद भी मृत किशोरी की माता को बेटी के मृत्यु होने की जानकारी नहीं थी। जिस वजह से वह कभी जिला अस्पताल जाती थी, तो कभी उस फार्मासिस्ट की दुकान जाती थी। हृदय विदारक घटना को जिसने भी देखा, वह विभाग के इस लापरवाह रवैय्ये को कोसता दिखा। देखना होगा इस पूरे अतिसंवेदनशील मामले में फार्मासिस्ट के खिलाफ प्रशासन क्या एक्शन लेता है, हालांकि इस पूरे मामले में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा जिला अध्यक्ष रामाधार चौधरी ने प्रशासन से न्यायिक जांच की मांग की है। थाना प्रभारी आरबी सोनी ने भी तत्काल घटना स्थल पहुंचकर मामले को संभाला।