
सीकर/फतेहपुर। कुवैत में रोजगार पाने की हमारे कामगारों की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है। कुवैत में अप्रवासी कोटा विधेयक लागू हो सकता है। ऐसा हुआ तो देश के 8 लाख कामगारों को कोरोना कहर के बीच बेरोजगारी झेलनी पड़ेगी।
विधेयक के मसौदे को कुवैत की नेशनल असेंबली की कानूनी और विधायी समिति ने संवैधानिक करार दे दिया है। अन्य समिति द्वारा वीटो करना बाकी है। इससे राजस्थान के भी 80 हजार कामगारों की परेशानी बढ़ सकती है। कुवैत में राजस्थान, यूपी, बिहार, एमपी आदि के लाखों कामगार रहते हैं। शेखावाटी के 15 हजार से अधिक कामगार वहां हैं।
फरवानिया व जलिन्द में रह रहे कामगार रामेश्वरलाल व श्यामसुंदर ने पत्रिका से फोन पर कहा, भारत में काम नहीं मिला तो यहां आए। अब यहां से भेज देंगे तो क्या करेंगे?
क्या है विधेयक
कुवैत में विदेशी कामगारों को लेकर अप्रवासी कोटा विधेयक लाने की इन दिनों चर्चा जोरों पर है। इससे इस खाड़ी देश में विदेशी कामगारों की संख्या बहुत कम हो जाएगी। इसमें वहां रहने वाले कुल भारतीयों में से 15 फीसदी को ही रखने का प्रस्ताव है।
ये हैं 3 कारण
वहां की सरकार का मानना है कि कोरोना का ग्राफ बढ़ा तो दूसरे देशों के लोगों के स्वास्थ्य और अन्य सम्बन्धित इंतजाम उसे करने होंगे।
कुवैत के नागरिक अपने ही देश में अल्पसंख्यक हो गए हैं। कुवैत की आबादी लगभग 43 लाख है। इसमें अकेले प्रवासियों की संख्या 30 लाख है। इनमें से 10 लाख से ज्यादा भारतीय हैं।
कुवैत विदेशी कामगारों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।
एक्सपर्ट व्यू...
असर कई देशों पर
फिलहाल यह प्रस्ताव है। इसका असर कई देशों पर होगा। भारत पर ज्यादा इसलिए कि यहां के कामगार 10 लाख से अधिक हैं। इसमें अन्य विदेशी नागरिकों को भी शामिल किया गया है। विधेयक में मिस्र के लोगों की आबादी को भी कुल आबादी का 10 फीसदी करने का प्रावधान है। कुवैत में प्रवासी कामगारों की दूसरी बड़ी तादाद मिस्र के लोगों की है।
Published on:
07 Jul 2020 03:24 pm
बड़ी खबरें
View Allसीकर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
