
#Independence day 2018 ऐसा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जिसे फांसी देने में तीसरी बार सफलता मिली अंग्रेजों को
उन्नाव. आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के दांत खट्टे करने में राजा राव रामबख्श सिंह का स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में प्रमुख था। जिनके नाम से अंग्रेज कांपते थे। जिन्हें पकड़ने के लिए चक्रव्यूह अंग्रेजों द्वारा चक्रव्यूह की रचना की जाती थी। लेकिन राजा राव रामबख्श सिंह को पकड़ना इतना आसान नहीं था। जनपद की शान राजा राव रामबख्श सिंह 1857 में हुई क्रांति के अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए। अंग्रेजों के द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले राजा राव रामबख्श सिंह के आगे अंग्रेजों के गोली बंदूक सब बेकार थे और उन्हें कई बार अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
क्रांतिकारियों को संगठित करने में अहम भूमिका
जनपद से सटे जिलों कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, फतेहपुर आदि जनपदों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सहयोग लेकर राजा राव रामबख्श सिंह अंग्रेजो के खिलाफ आक्रामक थे। राजा राव रामबख्श सिंह कि मदद करने के लिए आसपास के कई राजाओं ने भी अपने हाथ बढ़ाएं और उन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई में राजा राव रामबख्श सिंह का खुलकर साथ दिया। गद्दारों की मुखबिरी से अंग्रेजों ने राजा राव रामबख्श सिंह को पकड़ लिया और उन्हें नाटकीय ढंग से अदालती कार्रवाई पूरी कर फांसी पर लटका दिया। मां चंद्रिका देवी के अनन्य भक्त राजा राव रामबख्श सिंह को फांसी देने में भी अंग्रेजों को पसीने छूट गए। दो बार फांसी की रस्सी टूट गई। तीसरी बार में अंग्रेजों को फांसी देने में सफलता मिली। ऐसे वीर सपूत को याद कर जनपद वासियों की बाहें फड़कने लगती हैं।
गुरिल्ला युद्ध के माध्यम से अंग्रेजों के छक्के छुड़ाते थे
अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचार और जुल्म के खिलाफ राजा राव रामबख्श सिंह क्षेत्र के राजा जमीदार किसान युवाओं को संगठित करने का काम किया। राव साहब के संगठन के कारण लखनऊ में मीटिंग करने आ रहे अंग्रेज जनरल हैवलॉक को लखनऊ से ही वापस लौटना पड़ा। इस दौरान राजा राव रामबख्श सिंह के संगठन ने अंग्रेजों को बुरी तरह मात दी। राजा राव रामबख्श सिंह के संगठन को अंग्रेजो की छावनियों में हमला करने की योजना बनाई। लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सके। बताया जाता है कि नाना साहब के द्वारा कानपुर में मिली जीत के बाद वहां से भागे 13 अंग्रेज बक्सर में गंगा किनारे स्थित शिवालय में छिप गए। मौके पर खड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर यदुनाथ सिंह ने अंग्रेजों से शिवालय से बाहर निकलने को कहा। परंतु अंग्रेजों ने ठाकुर यदुनाथ सिंह को गोली मार दी। जिससे उनकी मौत हो गई। आक्रोशित लोगों ने मंदिर के चारों तरफ आग लगा दी। जिसमें जलकर 10 अंग्रेजों की मौत हो गई। वही तीन अंग्रेजों ने गंगा नदी में कूद कर अपनी जान बचाई। जान बचाकर भागे अंग्रेजों ने अपने अधिकारियों को घटना की जानकारी दी।
अंग्रेजों की मौत का बदला लेने पहुंची थी अंग्रेज पुलिस
एक साथ 10 अंग्रेजों की मौत से अंग्रेज अधिकारी बौखला गए। उन्होंने मई 1858 में होप ग्रांट के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना राजा राव रामबख्श सिंह और उनके साथियों को समाप्त करने के लिए भेजी। अंग्रेज सैनिकों की फौज ने लखनऊ होते हुए पुरवा, निहसत्था, बिहार, सेमरी जैसे रास्ते के गांव में अत्याचार करते हुए डोड़िया खेड़ा शिवालय पहुंचे। जहां अंग्रेज जिंदा जलाए गए थे। अंग्रेजों ने मंदिर को नष्ट कर दिया। वही 10 दिसंबर 1858 में राजा राव रामबख्श सिंह के डोड़िया खेडा किले की नाकेबंदी कर ली और गोला-बारूद से उसे काफी नुकसान पहुंचाया। परंतु यहां पर भी राजा राव रामबख्श सिंह से आमना सामना नहीं हुआ। राजा साहब के सामने न आने पर अंग्रेज अफसर सिमरी की तरफ रुख किया। जहां राजा राव रामबख्श सिंह ने डेरा डाला था। यहां पर राजा राव रामबख्श सिंह ने अपनी युद्ध नीति से अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए। राजा साहब और उनके स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गुरिल्ला युद्ध के द्वारा अंग्रेजों को सबक सिखाया। जिससे अंग्रेजों को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
गद्दारों की मुखबिरी से राजा राव रामबख्श सिंह को गिरफ्तार किया था अंग्रेजों ने
राजा राव रामबख्श सिंह अंग्रेजो के लिए चुनौती बन गए थे जिन्हें पकड़ने के लिए हर हथकंडे अपना रहे थे इसी दौरान 1861 में गद्दारों ने मुखबिरी कर राजा राव रामबख्श सिंह को बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में गिरफ्तार करवा दिया। नाटकीय ढंग से अंग्रेजों की अदालत ने झूठी गवाही को सही मानते हुए राजा राव रामबख्श सिंह को फांसी की सजा सुना दी। 28 दिसंबर 1861 में अंग्रेजों ने राजा राव रामबख्श सिंह को उसी स्थान पर फांसी पर लटकाने का निर्णय किया। जहां पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अंग्रेजों को जिंदा जलाया था। लेकिन यहां पर भी अंग्रेजों को फांसी देने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। चंद्रिका देवी के अनन्य भक्त राजा राव रामबख्श सिंह फांसी के फंदे की रस्सी दो बार टूट गई। लेकिन अंग्रेजों ने हार नहीं मानी और तीसरी बार में उन्हें फांसी पर लटका दिया गया। आजादी के परवाने राजा राव रामबख्श सिंह की अंग्रेजो के खिलाफ लड़ी गई लड़ाई को याद कर जनपद वासी गौरवान्वित महसूस करता है। राजा राव रामबख्श सिंह के किला डोड़िया खेडा में हर वर्ष उनकी याद में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है जिसमें दूर-दूर से लोग राजा राव रामबख्श सिंह को नमन करने के लिए आते हैं।
Published on:
14 Aug 2018 11:23 am
बड़ी खबरें
View Allउन्नाव
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
