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अब गोवंशों की ऐसी दुर्दशा मुझ से नहीं देखी जाती, उठाया, खौफनाक कदम

गौशाला में गायों की दुर्दशा से दुखी हनुमंत जीव आश्रय के संचालक अखिलेश अवस्थी ने कलेक्ट्रेट में किया आत्मदाह का प्रयास किया। आग की लपटें देख सक्रिय हुई पुलिस ने तत्काल काबू पाया। एसएचओ की गाड़ी से जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां से जिला उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।  

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अब गोवंशों की ऐसी दुर्दशा मुझ से नहीं देखी जाती, उठाया, खौफनाक कदम

अब गोवंशों की ऐसी दुर्दशा मुझ से नहीं देखी जाती, उठाया, खौफनाक कदम

जिले में गोवंश के पशुओं की स्थिति से व्याकुल हनुमंत जीव आश्रय के संचालक अखिलेश अवस्थी ने आत्मदाह का प्रयास किया। कलेक्ट्रेट के पास हुए इस घटनाक्रम के बाद मौके पर खड़ी पुलिस में हड़कंप मच गया। आज कलेक्ट्रेट में नामांकन हो रहा था। इस दौरान हुई इस घटना के बाद पुलिस के हाथ पैर फूल गए। आनन-फानन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पाया और अखिलेश अवस्थी को कंबल में लपेट कर कोतवाली प्रभारी सदर अपनी गाड़ी में जिला अस्पताल ले गए। जहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए कानपुर रिफर कर दिया गया। लेकिन घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। देर शाम जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने चमरौली स्थित गौशाला का निरीक्षण किया। इधर अखिलेश अवस्थी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जिले में लगातार गाय की मरने की सूचना आ रही थी। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से भी बातचीत हुई। लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

विधायक सांसदों के प्रति आक्रोश

अखिलेश अवस्थी को जिले के विधायक और सांसदों के प्रति भी आक्रोश था। उन्होंने विधायक व सांसद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पैसे और वोट के लिए यह किस हद तक जा सकते हैं इसका जीता जागता प्रमाण है गो वर्षीय पशुओं की यह हालत। उन्होंने कहा कि सांसद विधायक वोट की राजनीति के लिए जानवरों को गांव से पकड़कर भूसे की तरह एक गौशाला में होते जा रहे हैं। जहां ना तो उनके रहने की व्यवस्था है और ना ही खाने पीने की।

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नगर पालिका के गौशाला में भी हो चुकी है मौत

इसके पूर्व नगरपालिका क्षेत्र अंतर्गत बाईपास पर स्थित गौशाला में विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई थी पूर्णविराम जहां पर लगभग आधा दर्जन गोवंश पशुओं की मौत हो गई थी। यहां पर भी हनुमंत जीव आश्रय के अखिलेश अवस्थी ने जिला प्रशासन पर सवालिया निशान लगाते हुए धरने पर बैठ गए थे। इस पर एसडीएम ने मौके पर जाकर वादा किया था कि अब यह स्थिति कहीं नहीं आएगी। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशों को अधिनस्थ कितना गंभीर होते हैं इसका नजारा लगातार देखने को मिल रहा था पूर्णविराम जिसके बाद आध्या स्थिति सामने आई है।


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