
प्रतीकात्मक तस्वीर (symbolic Photo-Freepik)
प्रदेश में 31 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस, एमडी-एमएस की फीस निर्धारित कर दी गई है। इसमें अल्पसंख्यक मेडिकल कॉलेज शामिल नहीं हैं। फीस बढ़ोतरी के पीछे संबंधित कॉलेजों में संसाधन बढ़ाने का तर्क दिया गया है।
खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी डेढ़ से पांच लाख रुपये तक की गई है। अब निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस 12 से 19 लाख के बीच हो गई है। यहां नॉन एसी हॉस्टल की फीस पहले जहां 1.65 लाख थी, उसे बढ़ाकर 1.73 लाख रुपये प्रतिवर्ष कर दिया गया है। वहीं एसी हॉस्टल की फीस 1.92 लाख से बढ़ाकर 2.02 लाख रुपये कर दिया गया है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश में फीस नियमन के लिए गठित समिति की बैठकों का हवाला देकर कहा गया है कि एसी और नॉन एसी छात्रावास शुल्क भी बढ़ाया गया है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से सख्त निर्देश दिया गया है कि शैक्षणिक शुल्क किसी भी कीमत पर एकमुश्त जमा नहीं कराया जाएगा। हर मेडिकल कॉलेज में यह शुल्क प्रतिवर्ष जमा किया जाएगा।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस एक लाख से कम है। केजीएमयू में करीब 54 हजार प्रतिवर्ष है। इसी तरह अन्य राजकीय मेडिकल कॉलेजों की फीस भी 30 से 50 हजार के बीच है। वहीं हास्टल फीस करीब 40 से 50 हजार के बीच है। सिक्योरिटी राशि पूर्व की तरह तीन लाख और विधिक शुल्क 94160 रुपये रखा गया है।
Updated on:
27 Jul 2025 10:07 am
Published on:
27 Jul 2025 10:02 am
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