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बनारस की बेटी बदल रही पीरियड्स को लेकर सोच, अबतक हजारों महिलाओं तक पहुंचा ‘पीरियड मंत्रा’

बनारस की बेटी स्वाति ने 'पीरियड मंत्रा' कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसके जरिए वह समाज की रूढ़िवादी सोच को बदलने का प्रयास करते हुए महिलाओं को पीरियड्स के दौरान हाईजीन का कैसे ध्यान रखा है यह भी बताती हैं...

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स्वाति pc-patrika

International women's day वाराणसी: आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है, ऐसे में आज उन नारी शक्तियों की चर्चा होती है, जिन्होंने समाज में न सिर्फ महिलाओं को सशक्त करने में अपना अहम योगदान दिया, बल्कि महिलाओं को स्वाभिमान के साथ जीना भी सीखा रही हैं। कुछ ऐसी एक कहानी बनारस के स्वाति की है। स्वाति ने समाज की रूढ़िवादी सोच को तोड़ते हुए महिलाओं की हाइजीन को लेकर के काम करना शुरू किया और 'पीरियड मंत्रा' कार्यक्रम के जरिए आज वह महिलाओं को जागरुक कर उनके अधिकारों के बारे में भी उन्हें बता रही हैं। खास बात यह है कि स्वाति के इस काम के लिए उन्हें सरकार की ओर से सराहा भी गया है।

5000 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी

स्वाति ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की और इसके बाद वह महिलाओं की जागरूकता में जुट गईं। वह महिलाओं के हाइजीन को लेकर काम करती हैं, जहां वह पीरियड से जुड़ी बातों को बताती हैं। साथ ही अपने उन दिनों में कैसे अपना ख्याल रखने की जरूरत है, इसको लेकर क्या क्या भ्रम है, यह भी समझाती हैं। स्वाति ने अपने इस मुहिम से अब तक 5000 से ज्यादा महिलाओं को जोड़ा है और अब वह उन्हें आगे बढ़ने का हुनर दे रही हैं।

2016 में शुरू हुई मुहीम

स्वाति ने बताया कि 2016 में उन्होंने अपने इस मुहिम की शुरुआत की और एक कार्यक्रम तैयार किया जिसका नाम उन्होंने 'पीरियड मंत्रा' रखा। इस कार्यक्रम में वह महिलाओं के बीच में जाकर उन्हें बताती है कि कैसे पीरियड्स के दौरान अपना ध्यान रखना चाहिए, किन बातों का पालन करना चाहिए और वह कौन-कौन सी बातें या काम है, जिन्हें नहीं करना चाहिए ताकि वह स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें। स्वाति ने बताया कि उनकी शुरुआत आसान नहीं थी। जब वह अपनी पढ़ाई कर रही थीं। तब उनकी एक सहपाठी ने कहा कि जो महिलाएं पीरियड पर बात करती हैं उनका चरित्र ठीक नहीं होता। यही बात स्वाति की जिंदगी में टर्निंग प्वाइंट साबित हुई और उसके बाद यह मुहिम उनका जुनून बन गया। उन्होंने बताया कि वह महिलाओं को सेनेटरी पैड भी बनाना सिखाती हैं।

70 से ज्यादा लोगों की टीम

उन्होंने बताया कि गांव की महिलाएं पैड के साथ बहुत फ्रेंडली नहीं थीं। इसलिए उन्होंने सुई धागा की शुरुआत की, जिसके तहत वह गांव की महिलाओं को खुद का पैड बनाना सिखाती है। इसमें महिलाएं कॉटन के कपड़े के जरिए खुद का पैड बनाती हैं और उसे यूज भी करती हैं। उनकी इस मुहिम में हजारों की संख्या में महिलाएं और बेटियां शामिल हैं। स्वाति ने अब पैड एटीएम भी शुरू किया है, जो बेटियां और महिलाएं खुद के बने हुए पैड से सुरक्षित नहीं महसूस करती, वह महज 2 रुपये देकर के पैड एटीएम से पैड लेती हैं। बिक्री के बाद जो भी पैसे मिलते हैं उसके जरिए स्वाति एटीएम को फिर से भर देती हैं. स्वाति के मुताबिक दो लोगों से उन्होंने इस कारवां की शुरुआत की थी और आज उनके पास 70 से ज्यादा लोगों की टीम है। वह बनारस ही नहीं बल्कि भदोही और मिर्जापुर में भी महिलाओं के साथ जुड़कर उन्हें उनके हाइजीन के बारे में बताती हैं।

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