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Lal Bahadur Shastri Jayanti: पैतृक आवास में संजोई गई है शास्त्री जी की यादें, आज भी मौजूद है वो खास अटैची

Lal Bahadur Shastri Jayanti: भारत गणराज्य के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की यादें उनेक पैतृक आवास पर सजोई गई हैं। इसमें एक खास अटैची भी है जिसे सुरक्षित रखा गया है। आखिर किसने दी थी उन्हें ये अटैची ?

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Lal Bahadur Shastri Jayant memories preserved ancestral house special briefcase present today

Lal Bahadur Shastri Jayant

Lal Bahadur Shastri Jayanti: गुदड़ी के लाल और देश के दूसरे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री की आज पूरा देश 119वीं जयंती मना रहा है। उनका जन्म उनके नाना के घर मुगलसराय में साल 1904 में 2 अक्टूबर को हुआ था। काशी के रामनगर के रहने वाले शास्त्री जी का पैतृक आवास अब सरकार लगातार रेनोवेट करवा रही है। यहां पिक्चर गैलेरी में लाल बहादुर शास्त्री की तस्वीरें उनके जीवन का उद्देश्य बयां कर रही हैं, तो उनके प्रधानमंत्री रहने के दौरान उन्हें मैले कई खास तोहफे भी संजोकर रखे गए हैं। उनमे से एक अटैची भी इस संग्रहालय में संजोई गई है।

पिता थे अध्यायक

लाल बहादुर शास्त्री का पैतृक आवास जो रामनगर में है वहां के केयर टेकर महेंद्र नारायण लाल ने बताया कि लाल बहादुर शास्त्री के साथ ही साथ उनके दादा जी और उनके माता-पिता की यादें यहां जुड़ी हुई हैं। उनके पिता प्रयागराज (तब इलाहबाद) में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थे। वो शनिवार को यहां आते थे और रविवार रहकर वापस चले जाते थे। उन्होंने बताया कि इनके नाना हजारी प्रसाद श्रीवास्तव जी मिर्जापुर के रहने वाले थे। वो भी एक विद्यालय में मुगलसराय (दीन दयाल नगर ) में प्रिंसिपल हुआ करते थे और वहीं रहते थे।

संजोई गई है स्मृतियां

शास्त्री जी की स्मृतियों के रूप में उनके कमरे को यहां संजोकर रखा गया है, जिसमें वह स्वयं रहते थे। यहां उनका बेडरूम, रसोई जो उनके पिता के जमाने की है उन्हें आज भी वैसे ही पक्के मकान में कच्चे हिस्से को संजोया गया है, जिसकी गोबर से लिपाई की जाती है। इस संग्रहालय और आवास के केयर टेकर महेंद्र नारायण लाल ने बताया कि यहां शास्त्री जी से जुडी कई स्मृतियां संजोई गई है। उन्ही में से एक उनकी अटैची भी है जो उन्हें तोहफे में मिली थी।

एयर इंडिया ने दी थी अटैची गिफ्ट

केयर टेकर महेंद्र नारायण लाल ने बताया कि लाल बहादुर शास्त्री जब प्रधानमंत्री थे तब भी बहुत सादगी से जीवन व्यतीत करते थे। वो किसी से जल्दी तोहफा नहीं लेते थे। एक बार वो एयर इंडिया के विमान से सफर कर रहे थे तब उन्हें एयर इंडिया ने एक सूटकेस गिफ्ट किया था पर उसे भी वो ले नहीं रहे थे, तब उन्हें बताया गया कि इसमें आप की दिनचर्या से सम्बंधित वस्तुएं हैं। इसपर वो तैयार हुए थे उसे लेने के लिए।

निकली दो धोती

महेंद्र नारायण लाल ने बताया की उस अटैची को जब खोला गया तो उसमे से दो धोतियां निकली थी जिन्हे वो अक्सर पहना करते थे। शास्त्री जी जब भी कहीं जाते थे तो इसी अटैची को लेकर जाते थे और इसमें दो धोती और दो कुर्ते पायजामे होते थे। उनकी वह अटैची आज भी संग्रहालय (पैतृक आवास) में संजो के रखी गई है। रोजाना यहां 50 पर्यटक इस समृति को देखने आते हैं। यह पूरा संग्रहालय आप भी घूम सकते हैं। यहां किसी भी प्रकार का टिकट या शुल्क नहीं लिया जाता है। वाराणसी स्टेशन से इस संग्रहालय की दूरी 10 किलोमीटर है और यहां पहुंचने के लिए आप ऑटो कर सकते हैं।