
शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरनेवालों का यही बाकी निशां होगा...इन पंक्तियों को सुनकर शरीर में सिहरन सी पैदा होती है। सरहद पर बैठे जवान देशवासियों को महफूज रखने के लिए अपनी जान तक की बाजी लगा देते हैं। कुछ दिनों पहले बदायूं जिला के रहने वाले मोहित ने कुपवाड़ा में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान बलिदान हो गए थे।
देश की रक्षा के लिए बलिदान हुए 25 साल के सेना के जवान मोहित राठौर की शौर्यगाथा से पूरा बदायूं जिला गूंज उठा। गम और गर्व के माहौल में जब जवान का पार्थीव शरीर गांव पहुंचा तो पत्नी की रो-रोकर हालत खराब हो गई। पति को तिरंगा में लिपटा देख कर पत्नी वहीं बेहोश हो गई। पास में बैठी बहनें बार-बार ये कह रही थी कि अब वह राखी किसको बांधेगी, राखी पर किसका इंतजार करेंगी। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद सारे लोग रो पड़े।
पिता नत्थू सिंह अपने बेटे के पार्थिव शरीर को काफी देर तक निहारते रहे। फिर कंपकंपाते हाथों से बेटे को सलामी देते हुए मुखाग्नि दी। अपने बेटे को मुखाग्नि देते हुए पिता की आंखों से आंसू निकल पड़े। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें ढांढस बंधाई। जिलाधिकारी निधि श्रीवास्तव और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार सिंह समेत तमाम नेता भी बलिदानी जवान मोहित राठौर की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। इन लोगों ने पीड़ित परिजनों को ढांढस बंधाया।
Published on:
28 Jul 2024 04:14 pm
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