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Vastu Tips: घर किराए का हो या अपना, वास्तु सबसे पहले आप पर डालता है असर

Vastu Tips for rented house: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की ऊर्जा सिर्फ रहने की सुविधा नहीं देती, बल्कि ग्रहों की शक्ति, आर्थिक स्थिति, रिश्तों और भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती है।
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भारत

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Akash Dewani

Jul 16, 2026

vastu tips for rented house energy effects on luck future home

Vastu Tips for rented house: जानिए कैसे किराए का मकान का वास्तु डालता है असर (फोटो सोर्स- Chatgpt)

Vastu Tips: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की ऊर्जा का असर सिर्फ दीवारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जीवन, रिश्तों और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। पंडित पंकज उपाध्याय से जानिए कि क्या किराए का घर भी आपकी किस्मत बदल सकता है? क्या जिस मकान में आप रहते हैं, वही तय करता है कि भविष्य में अपना घर मिलेगा या नहीं?

घर की ऊर्जा का ग्रहों पर कितना असर पड़ता है?

मनुष्य की कुंडली में ग्रह परिस्थितियां कितनी भी मजबूत क्यों ना हो, उन्हें सही फल प्रदान करने के लिए ब्रह्मांडीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अपने करीबी रिश्तों के बाद सबसे अधिक जुड़ाव अपने रहने के स्थान से होता है। वो जगह जितनी अधिक ऊर्जावान होगी उतना अधिक ग्रहों को बल प्रदान करेगी।

घर के लिए भी जरुरी है ये ऊर्जा

वास्तु शास्त्र के अनुसार अलग-अलग दिशाएं विभिन्न ग्रहों को ऊर्जा प्रदान करेगी। ये ऊर्जा ही हमारा वर्तमान और भविष्य निर्धारित करती है। यह ऊर्जा जितना मनुष्यों के सुख एवं दुख के लिए जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी आवश्यक घर के लिए भी। सोचिए किसी के पिता अधिक सामर्थ्यवान है और किसी के बड़े कमजोर। इसी उदहारण से आप समझ सकते है कि दोनों के जीवन में कितना अंतर होगा। बस घर का भी ऊर्जावान होना उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

आपका किराये का घर ही आपको या मकान मालिक बनाएगा

लोग किराए का घर लेते समय हमेशा यह सोचते हैं कि इस घर में गहराई से वास्तु क्या देखना? यह तो किराए का मकान है। जब अपना मकान लेंगे तब उसे वास्तु अनुरूप ही बनाएंगे। जबकि सत्यता यह है कि आप जिस भी घर में रह रहे हैं वह घर ही निर्धारित करता है कि आपका अगला घर फिर से किराए का होगा या आप मकान मालिक बन कर नए घर में जाएंगे

किस पर पड़ता है ज्यादा प्रभाव

लोगों के मन में हमेशा एक सवाल रहता है की वास्तु का प्रभाव किस पर अधिक रहता है? जो व्यक्ति मकान में रहता है या जो उस मकान का असली मालिक है? किसी भी व्यक्ति के अधिकार में जितनी भी संपत्तियां होगी चाहे वह भूखंड हो, खेती की जमीन हो या फिर बना हुआ भवन उन सब का वास्तु उस व्यक्ति को प्रभावित करता है। अब यह देखना जरूरी है कि उस संपत्ति पर कोई रह रहा है या नहीं। जो व्यक्ति जिस भवन में रह रहा हो उसे वहां का वास्तु सबसे पहले प्रभावित करता है। अगर भवन खाली है तो सीधा उसके मूल मालिक पर उसका प्रभाव देखने को मिलेगा।

उदाहरण से समझिए

उदाहरण के लिए अगर हम अच्छे रेस्टोरेंट में कॉफी पीने जाते हैं तो कुछ समय के लिए वहां का वातावरण हमारे मन को प्रसन्नता से भर देता है। वहीं अगर हम किसी नकारात्मक ऊर्जा वाली जगह पर जाकर खड़े होते हैं तो ऐसा लगता है कि जितनी जल्दी इस जगह को छोड़ दिया जाए उतना अच्छा है।

सोच समझ कर लें कमरा

इसी प्रकार की स्थिति किराए के मकान की भी होती है। यहां तक कि सिर्फ किराए का मकान ही क्यों? जब भी किसी भी कारण से अगर बाहर जाए और होटल में रुकने का काम पड़े तो वहां भी कमरा सोच समझ कर ले। उसका नंबर, बेड की लोकेशन और उसमें टॉयलेट किस दिशा में है इस बात विशेष का ध्यान रखें। कोई व्यक्ति व्यापार या इन्वेस्टमेंट की दृष्टिकोण से अगर कोई संपत्ति खरीदता है और उसमें किसी प्रकार का गंभीर वास्तु दोष है या वह बहुत अधिक ऊर्जावान संपत्ति है तो उसके शुभ या अशुभ प्रभाव उसके मालिक पर तुरंत देखने को मिलेंगे।

जगह का चुनाव होता है आवश्यक

बहुत जरूरी है उस जगह का चुनाव जिस से आप किसी भी रूप में जुड़ने जा रहे है। अगर नियमित रूप से किसी जगह से जुड़ रहे है। चाहे किराए का घर हो तो भी उस जगह की ऊर्जा जीवन में बड़े बदलाव का कारण बनेगी।