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वाराणसी: जिला जेल में बंदियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए शिक्षा मंत्रालय पहल कर रहा है। 'उल्लास' कार्यक्रम के तहत जेल में बंद कैदियों के लिए साक्षरता परीक्षा आयोजित की गई है। इस परीक्षा में पास होने वाले बंदियों को मंत्रालय की तरफ से प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जिससे उनका हौसला बढ़ेगा।
जिला जेल में बंदियों को शिक्षित बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने 'उल्लास' (ULLAS- Understanding Lifelong Learning for All in Society) कार्यक्रम के तहत साक्षरता परीक्षा आयोजित की है। इस परीक्षा के लिए 44 बंदियों ने अपना पंजीकरण कराया था, जिसकी परीक्षा रविवार सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित की गई। इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य बंदियों को साक्षर बनाना और उन्हें समाज के मुख्य धारा धारा से जोड़ना है।
जिला कारागार के जेल अधीक्षक सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि हम कैदियों को साक्षर बनाने की दिशा में हर संभव प्रयास करते हैं। उनके लिए जेल परिसर में ही कक्षाएं चलाई जाती हैं, जिसके लिए एक शिक्षक भी रखा गया है। कक्षा में सभी आयु वर्ग के लोग शिक्षा ग्रहण करते हैं। उन्होंने बताया कि जेल के अंदर स्थापित किए गए विद्यालय में सभी विषयों की पढ़ाई करवाई जाती है और लोग स्वेक्षा से उसमें जाकर शिक्षा लेते हैं।
उन्होंने बताया कि 'उल्लास' कार्यक्रम के तहत देशभर के लोग परीक्षा देते हैं और उसमें उत्तीर्ण होने पर शिक्षा मंत्रालय उन्हें प्रमाण पत्र जारी करता है। इसी के तहत जेल प्रशासन ने बेसिक शिक्षा विभाग से संपर्क करके अपने जेल में शिक्षा अध्यापक और वालंटियर नामित करवाया है। इसके साथ ही 44 बंदियों को हमने इसके तहत रजिस्ट्रेशन कराया और रविवार के दिन शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए प्रश्न पत्र से बंदियों ने परीक्षा दी।
उन्होंने बताया कि इस परीक्षा के लिए एक साल से अपने ही लेवल पर कैदियों की तैयारी करवाई गई है, जिसमें जेल प्रशासन के लोग शामिल हैं। जिन लोगों को लिखना पढ़ना नहीं आता, उन्हें भी पढ़ाया जा रहा है, ताकि वह साक्षर बन सकें, सबसे बड़ी बात यह है कि इस परीक्षा को वह कैदी दे रहे हैं, जो अभी हाल में ही साक्षर बने हैं और इस साक्षरता में जेल प्रशासन ने अहम भूमिका निभाई है।
Updated on:
15 Mar 2026, 1:10 PM IST
Published on:
15 Mar 2026, 1:03 PM IST
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