
बुंदेलखंड को बना दिया हवेली का पिछवाड़ा: राजा बुंदेला
वाराणसी. जैसे मेहमान आते हैं तो घर के आगे के हिस्से को सजा दिया जाता है और पीछे के हिस्से में कूड़ा फेंका जाता है। ठीक उसी तरह बुंदेलखंड को हवेली का पिछवाड़ा बना दिया गया है। पिछले सत्तर सालों में यहां के लोगों ने विकास की किरण नहीं देखी है। पलायन, बेरोजगारी, भुखमरी यहां के लोगों की नियति बन चुकी है।
वाराणसी में आयोजित पत्रिका की-नोट में 'उत्तर प्रदेश विभाजित या संयुक्त विषय पर चर्चा करते हुए फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि मुगलों और अंग्रेजों के समय बुदेलखंड एक सूबा था, लेकिन जब देश आजाद हुआ तो हम गुलाम हो गए। कहा जाता है कि देश के सत्ता का रास्ता यूपी से होकर जाता है। क्योंकि, यहां 82 सीटे हैं, लेकिन इन 82 सीटों के चक्कर ने बुंदेलखंड में कितनी तबाही मचाई है, यह सिर्फ बुंदेलखंड के लोग जानते हैं।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में सात नदिया बहती हैं, लेकिन हमें नदियों का पानी नहीं मिलता। यहां चार जगह बिजली बनती है, लेकिन बिजली बुंदेलखंड के लोगों को नहीं मिलती। अभी पिछले दिनों बिड़ला और यूपी सरकार ने ललितपुर में बिजली घर खोला, लेकिन आधा बिजली यूपी सरकार और आधी बिड़ला लेते हैं। जहां यह सेंटर है, वहां के लोगों को आज भी पांच घंटे बिजली मिलती है। आखिर यह कैसा विकास है।
बुंदेला ने आगे कहा कि इस परिस्थिति के लिए जिम्मेदार हमारे नेता हैं। ऐसे तो हमारे नेता वे बड़े-बड़े वादे करते हैं और चुनकर लोकसभा और विधानसभा भी पहुंच जाते हंै, लेकिन वहां पहुंचने के बाद वे पार्टी लाइन पर बात करने लगते हैं। आखिर ऐसा क्यों ? अगर हम अपनी बात नहीं कह सकते तो हमारा अस्तित्व क्या रहा? जो लोग बुंदेलखंड राज्य का विरोध करते है उन्हें वहां की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखना चाहिए। गुजरात कोर्ट के आदेश पर बंटा। कम से कम जहां की बात चल रही है, वहां की चर्चा होनी चाहिए। चर्चा नहीं होगी तो विद्रोह होगा, आंदोलन होगा। जैसा कल हुआ ये सरकारें गलत करने के बाद भी बाबा को प्रश्रय दे रही थी परिणाम सामने है। सोचिये बुंदेलखंड में 67 प्रतिशत लोगों ने पलायन क्यों किया? रोजगार के लिए कुछ है नहीं। जो पलायन कर रहे हैं, उनकी तीन पीढ़ी का नुकसान हो रहा है। सत्ता का डी सेंटलाइजेशन जरूरी नहीं तो वही हाल होगा जो बिहार और यूपी का है। उन्होंने कहा, कहते हैं कि छोटे राज्य की बात कर राजनीति की रोटी सेकी जाती है। मैं सिनेमा का कलाकर हूं, मुझे रोटी सेकनी होती तो सिनेमा में सेकता। बीजेपी मेरी मां है मुझे दर्द है तो मै मां से ही कहूंगा। मुझे उम्मीद है कि पीएम तलाक, जीएसटी के तरह पांच करोड़ वाली आबादी को अलग राज्य का तोहफा जरूर देंगे।
Updated on:
28 Aug 2017 02:33 pm
Published on:
26 Aug 2017 02:55 pm
